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मीडिया पर नियंत्रण के लिए सशक्‍त स्‍वायत संस्‍थान की जरूरत : प्रांजय

गुवाहाटी। जानेमाने पत्रकार प्रांजय गुहा ठाकुरता ने मीडिया पर एक सीमा तक नियंत्रण की जरूरत बताते हुए इसके लिए एक सशख्त स्वायत संवैधानिक संस्था बनाए जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि ब्रिटेन और अमेरीका की तरह यहां भी मीडिया पर नियंत्रण करने वाली संस्था होनी चाहिए जो चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट की तरह होनी चाहिए। गुवाहाटी प्रेस क्लब के मासिक कार्यक्रम "इस माह के अतिथि' में और उससे पहले "मीडिया की नैतिकता' विषय पर आयोजित कार्यशाला में भाग लेते हुए प्रांजय ने कहा कि हर चीज की एक लक्ष्मण रेखा होती है और इसे याद दिलाने के लिए एक सशख्त संस्था की जरूरत है। भारतीय प्रेस परिषद और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मीडिया को लक्ष्मण रेखा पार करने से रोक नहीं पा रहे हैं क्योंकि इनके पास कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है।

गुवाहाटी। जानेमाने पत्रकार प्रांजय गुहा ठाकुरता ने मीडिया पर एक सीमा तक नियंत्रण की जरूरत बताते हुए इसके लिए एक सशख्त स्वायत संवैधानिक संस्था बनाए जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि ब्रिटेन और अमेरीका की तरह यहां भी मीडिया पर नियंत्रण करने वाली संस्था होनी चाहिए जो चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट की तरह होनी चाहिए। गुवाहाटी प्रेस क्लब के मासिक कार्यक्रम "इस माह के अतिथि' में और उससे पहले "मीडिया की नैतिकता' विषय पर आयोजित कार्यशाला में भाग लेते हुए प्रांजय ने कहा कि हर चीज की एक लक्ष्मण रेखा होती है और इसे याद दिलाने के लिए एक सशख्त संस्था की जरूरत है। भारतीय प्रेस परिषद और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मीडिया को लक्ष्मण रेखा पार करने से रोक नहीं पा रहे हैं क्योंकि इनके पास कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने मीडिया की नैतिकता में आती गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में करीब 800 चैनल हैं और इन चैनलों ने टीआरपी और पैसे कमाने की होड़ में सामाजिक और मानवीय मर्यादाओं को ताक पर रख दिया है। गुवाहाटी के जीएस रोड पर हुई घटना की भर्त्सना करते हुए प्रांजय ने कहा कि इस प्रदेश की पत्रकारिता जगत को बदसलूकी की शिकार महिला से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक महिला का वस्त्र हरण और उसे लंबे समय तक टेलीविजन चैनल पर दिखाना पत्रकारिता का काला अध्याय है।

यह पूछने पर कि क्या घटना के समय एक फोटोग्राफर का काम फोटो लेने के बदले घटना के शिकार लोगों को बचाना होना चाहिए तो लोकसभा टेलीविजन के एंकर ने कहा कि फोटोग्राफर पहले मानव है और उसके बाद फोटोग्राफर। उन्होंने सवालिए लहजे में कहा कि कहा जीएस रोड की तरह कोई घटना में किसी फोटोग्राफर की बहन या बेटी हो तो वह पहले क्या करेगा? कमरा फेंक कर उससे बचाएगा या फोटो लेगा। उन्होंने कहा कि एक फोटोग्राफर या पत्रकार को उनके पेशे की गरिमा और ड्यूटी के साथ सामाजिक दायित्व और मानवीय संवदेनाओं को नहीं भूलना चाहिए।

अखबारों पर बाजार का दबाव और संपादकीय टीम पर बढ़ रहे प्रबंधकीय दबाव से मुकाबला की नसीहत पत्रकारों को देते हुए प्रांजय गुहा ने कहा कि यदि प्रबंधन नैतिकता को ताक पर रहने के लिए दबाव दे तो नैतिकता को त्यागने के बदले इस्तीफा देकर दूसरी नौकरी ढूंढ़ लेनी चाहिए और यदि नौकरी न मिले तो सड़क पर सब्जी बेचनी चाहिए। क्योंकि मीडिया लोकतंत्र के लिए जरूरी है और लोकतंत्र तब बचेगा जब मीडिया रहेगा।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.

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