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मीडिया में सबकुछ अच्‍छा होने में वक्‍त लगेगा : एनके सिंह

: मीडिया के चौथा स्‍तम्‍भ होने के वहम में खुद को रखते हैं पत्रकार – उर्मिलेश : वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में सामाजिक विज्ञान अधिवेशन के चौथे दिन संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र की ओर से राष्‍ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। परिसंवाद के विषय ‘मीडिया राजसत्ता और उत्तरदायित्व’ विषय पर बोलने के लिए देश के प्रमुख मीडिया हस्तियों को आमंत्रित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रेस परिषद के सदस्य शीतला सिंह ने की।

: मीडिया के चौथा स्‍तम्‍भ होने के वहम में खुद को रखते हैं पत्रकार – उर्मिलेश : वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में सामाजिक विज्ञान अधिवेशन के चौथे दिन संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र की ओर से राष्‍ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। परिसंवाद के विषय ‘मीडिया राजसत्ता और उत्तरदायित्व’ विषय पर बोलने के लिए देश के प्रमुख मीडिया हस्तियों को आमंत्रित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रेस परिषद के सदस्य शीतला सिंह ने की।

परिसंवाद में दैनिक भास्कर समूह के संपादक श्रवण गर्ग, दैनिक भास्कर, नागपुर के स्थानीय संपादक मणिकांत सोनी, लोकमत समाचार, नागपुर के संपादक विकास मिश्र, साधना न्यूज चैनल के प्रमुख और भारतीय प्रसारण संघ के सचिव एनके सिंह, राज्यसभा चैनल के संपादक उर्मिलेश और संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय ‘अंकित’ मंचस्थ थे।

परिसंवाद को संबोधित करते हुए विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि वर्तमान संदर्भों में मीडिया के उत्तरदायित्वों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्‍यकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया किसी सामान्य उत्पादकों की तरह नहीं है जो यह कह कर बच जाए कि हम तो उत्पाद बेच रहे हैं। सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वाह की अपेक्षा मीडिया से ही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया शुद्ध व्यापार का रूप ले रहा है, लेकिन व्यापार के लिए मीडिया में इतनी गिरावट नहीं होनी चाहिए कि उसे पेड न्यूज का सहारा लेना पड़ जाए।

इस दौरान भारतीय प्रसारण संघ के सचिव एनके सिंह ने कहा कि मीडिया के सही कार्यों का पता लोगों को नहीं चलता है लेकिन एक गलती होने पर तमाम सवाल खडे़ किए जाते हैं। उन्होंने टेलीविजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय टेलीविजन के महज 16 साल हुए हैं। इतनी शैशवास्था में इसमें गलतियां हो सकती हैं। मीडिया में सब कुछ अच्छा होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि अन्ना के आंदोलन का कवरेज करने पर मीडिया पर सवाल खड़ा किया जाता है, लेकिन सरकार के पक्ष में सकारात्मक खबरों के प्रसारण पर कोई सवाल नहीं उठाता है। दंगों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया की वजह से ही समाज में दंगें नहीं होते, क्योंकि दंगाइयों में मीडिया का खौफ कायम है।

दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने कहा कि सरकार ने 1991 में ही पूरी दुनिया के लिए बाजार खोल दिए फिर मीडिया के बाजारीकरण पर सवाल क्यों खड़ा किया जाता है? उन्होंने कहा कि जिस काम को करने में सरकारी समाचार तंत्र असफल साबित हो रहे हैं, उसे पूरा करने की अपेक्षा निजी समाचार संस्थानों से क्यों की जाती है? सोशल नेटवर्किंग साइट को प्रतिबंधित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 75 के आंदोलन के दौरान तो कोई सोशल साइट नहीं था फिर इतना बड़ा आंदोलन कैसे खड़ा हो गया? उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार देश की नीति अर्थशास्त्र से तय करती है, दूसरी ओर मीडिया से ऐसी नीति की अपेक्षा की जाती है, जिसमें मीडिया का अस्तित्व समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत लाभ के लिए मीडिया को निशाना बनाया जा रहा है।

लोकमत समाचार के संपादक विकास मिश्र ने कहा कि मीडिया की हालत उतनी बुरी नहीं है जितनी बताई जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य की जितनी साख आम जनता के बीच है, उससे कई गुणा ज्यादा साख मीडिया की आम लोगों के बीच में बची है। उन्होंने कहा कि जिस नीरा राडिया मामले को लेकर मीडिया को निशाने पर लिया जा रहा है उसे भी उजागर करने का काम मीडिया ने ही किया है। दैनिक भास्कर, नागपुर के स्थानीय संपादक मणिकांत सोनी बतौर वक्ता बोले कि मीडिया को सवालों के कटघरे में खड़ा करने का मतलब खुद पर सवाल खड़ा करना है। मीडिया एक मास्टर चाभी की तरह है। एक मात्र मीडिया ही है जो हर भाषा, हर समाज को एक मंच पर लाकर खड़ा करता है।

राज्यसभा चैनल के प्रमुख उर्मिलेश ने कहा कि मीडिया सही मायने में चौथा स्तंभ नहीं है बल्कि मिथक है, लेकिन उसके वहम में पत्रकार खुद को रखते हैं। जबकि संविधान द्वारा ऐसा कोई भी उपबंध पत्रकारों के लिए नहीं किया गया है। उन्होंने वर्तमान मीडिया परिस्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मीडिया हमेशा क्षरित होते जा रहा है। मीडिया पर हमेशा राजसत्ता हावी होने का प्रयास करती है, जिसमें बदलाव करने की आवश्‍यकता है। मीडिया यदि हमेशा लाभ के लिए काम करे तो उसका भविष्‍य खतरे में आ सकता है।

अध्यक्षीय वक्तव्य में भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य शीतला सिंह ने कहा कि मीडिया का औद्योगीकरण हो गया है। देश के जितने बड़े उद्योगपति हैं उन्होंने अपने मीडिया संस्थान तैयार कर लिया है। मीडिया के नैतिकताओं का विकास यदि पूंजी के आधार पर होगा तो वह मीडिया को गर्त में ले जाएगा। इस दौरान संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र के प्रो. रामशरण जोशी, प्राध्यापक डॉ. अख्तर आलम, राजेश लेहकपुरे, संदीप कुमार वर्मा और भारी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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