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मीनाक्षी लेखी ने कहा – ओपन ट्रायल फेयर ट्रायल होता है

बीते साल 16 दिसंबर को दिल्‍ली में हुए गैंग रेप मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई ओपन कोर्ट में किए जाने की याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस मामले की सुनवाई के दौरान मीडिया को अदालत में जाने और इस केस को कवर करने की इजाजत मिलनी चाहिए। मीडियाकर्मियों की ओर से पेश एडवोकेट मीनाक्षी लेखी ने पत्रकारों का पक्ष रखते हुए कहा कि ओपन ट्रायल फेयर ट्रायल होता है और यह आरोपियों का भी अधिकार है। हम पब्लिक को सच्चाई बताने से डर क्यों रहे हैं। 

बीते साल 16 दिसंबर को दिल्‍ली में हुए गैंग रेप मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई ओपन कोर्ट में किए जाने की याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस मामले की सुनवाई के दौरान मीडिया को अदालत में जाने और इस केस को कवर करने की इजाजत मिलनी चाहिए। मीडियाकर्मियों की ओर से पेश एडवोकेट मीनाक्षी लेखी ने पत्रकारों का पक्ष रखते हुए कहा कि ओपन ट्रायल फेयर ट्रायल होता है और यह आरोपियों का भी अधिकार है। हम पब्लिक को सच्चाई बताने से डर क्यों रहे हैं। 

 
ट्रायल कोर्ट ने 7 जनवरी को इस मामले में इन कैमरा सुनवाई का निर्देश दिया था और कहा कि सुनवाई से संबंधित रिपोर्ट न तो दिखाई जाए और न ही छापी जाए। कुछ मीडियाकर्मियों की ओर से याचिका दाखिल करके कहा गया कि उनका राइट टु स्पीच एंड एक्सप्रेशन का अधिकार प्रभावित हो रहा है, इसलिए उन्‍हें मामले के कवरेज की इजाजत दी जाए। अधिवक्‍ता लेखी ने दलील दी कि रोक के चलते एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट के अधिकार का हनन हो रहा है। 
 
इस मामले में दिल्‍ली पुलिस ने कहा था कि सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत रेप से संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो सकती। पुलिस के इस एडवाइजरी के खिलाफ दलील देते हुए लेखी ने कोर्ट के समक्ष कहा कि समाज के जिम्मेदार वर्ग व मीडिया को इस मामले की सुनवाई को कवर करने की इजाजत होनी चाहिए। उन्होंने दलील दी कि इस मामले में मीडिया ने पहले दिन से ही जिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग की और विक्टिम का नाम सामने नहीं आया। विक्टिम फैमिली ने भी नाम उजागर कर दिया लेकिन मीडिया ने नाम उजागर नहीं किया। 
 
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश दयान कृष्णन ने मीडिया की अर्जी का विरोध किया और कहा कि यह मामला रेप से जुड़ा हुआ है और प्रत्येक रेप केस के ट्रायल इन कैमरा किए जाने का प्रावधान है। इस मामले में तमाम गवाहों के बयान हुए हैं और अभी कइयों के बयान होने बाकी हैं। निचली अदालत ने मामले की सुनवाई इन कैमरा कर रखी है। उन्होंने दलील दी कि राइट टु रिपोर्ट पूर्ण अधिकार नहीं है। मीडिया इस केस में पार्टी नहीं है। लीगल प्रावधान आरोपी और विक्टिम पर लागू होता है। दोनों पक्षों की दलील के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
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