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बिहार

मुंगेर में सम्पन्न हुआ कवि मथुरा प्रसाद गुंजन स्मृति सम्मान समारोह

रविवार, 17 नवंवर 2013 को बिहार के मुंगेर में कवि मथुरा गुंजन स्मृति सम्मान -2013 सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता गीतकार छंदराज ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में डा. शंकर मोहन झा, पूर्व प्राचार्य, हिन्दी विद्यापीठ एवं संपादक विद्यापीठ पत्रिका, देवघर एवं विशिष्ठ अतिथि विधानंद प्रसाद थे। 
रविवार, 17 नवंवर 2013 को बिहार के मुंगेर में कवि मथुरा गुंजन स्मृति सम्मान -2013 सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता गीतकार छंदराज ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में डा. शंकर मोहन झा, पूर्व प्राचार्य, हिन्दी विद्यापीठ एवं संपादक विद्यापीठ पत्रिका, देवघर एवं विशिष्ठ अतिथि विधानंद प्रसाद थे। 
 
इस समारोह में कवि शंहशाह आलम (मुंगेर/पटना) को उनकी पुस्तक ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’ के लिए, राज्यवर्धन द्वारा संपादित कविता सग्रह ‘स्वर-एकादश’, डॉ रानी श्रीवास्तव, मुजफ्फरपुर को उनकी पुस्तक ‘खुली खिड़कियों वाला तहखाना’ एवं डॉ जी.पी.शर्मा, सहरसा को उनकी पुस्तक ‘क्रांति-गाथा’ के लिए ‘कवि मथुरा प्रसाद गुंजन स्मृति सम्मान समारोह 2013’ से सम्मानित किया गया।
 
आगत साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों के स्वागत पश्चात कवि मथुरा प्रसाद गुंजन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर डा. देवव्रत सिन्हा ने कहा कि कवि अपनी कविता से भिन्न नहीं होता। मथुरा प्रसाद गुंजन ने अपने साहित्य को अन्तः स्पन्दन और मनुष्य की सर्वोत्तम कृति माना। गुंजन एक सहज आदमी थे, वे लोक सम्पर्क क्रम में कहा करते थे कि "एक नेक इन्सान होना मुझे अच्छा लगता है और इन्सानियत, मनुष्य पूजा, सृष्टि के कण-कण की पूजा को अपना नैसर्गिक धर्म मानता हूं। पीड़ित मानवता की सेवा मेरा धर्म-कर्म है और साहित्य मेरी प्राणशक्ति, ऊर्जा शक्ति है।"
 
गीतकार छंदराज ने मथुरा प्रसाद गुंजन के साथ बिताए क्षण को स्मरण करते हुए कहा कि मथुरा प्रसाद गुंजन के काव्य गुरू पं. अवध भूषण मिश्र के काव्य व्यक्तित्व की अमृत वर्षा बूंदों से गुंजन का काव्य व्यक्तित्व भाव स्नात, सौन्दर्य स्नात हुआ, जिससे प्रथम कृति ‘साकेत विजय’ अपनी लघु काया में यादगार कृति बन गई और साहित्य जगत में स्मरण करने के योग बन बैठे। 
 
समारोह में कवि सम्मेलन सत्र का आगाज बांका से पधारे विकास सिंह गुल्टी के गीत- अंग देश की पावन धरती कहै करि पुकार, मांझी चल से गंगाधार.. से हुआ। भागलपुर से पधारी कवयत्री रेणु ठाकुर ने सुनाया- जब कभी मेरे ख्यालों में कोई आता है/ मशहूर कोई और बना जाता है..। शायर फ़ैयाज रस्म ने कहा .. गज़ल ऐसी कहो जिस पर गज़ल को नाज़ हो.. / कलम के साथ जो वादा किया था, वही वादा निभाता हूं गजल में। भागलपुर के शायर कमर तावां ने कहा- किसी की आन पानी में किसी की शान पानी में, हुआ इंसा का है यारों बहुत नुकसान पानी में..। कवि एसबी भारती ने अपनी चांद पर केन्द्रित कविता- उन्हें जिनका पेट खाली उसे चांद रोटी नजर आता है.. सुनाया। कवि शहंशाह आलम ने अपनी ‘काठमांडू मैं गया कलकता मैं गया’ शीर्षक कविता सुनाते हुए कहा- सबसे अनूठा प्रेम मैंने किया सबसे अनोखी इच्छा मैंने की/ भय को मैने भगाया/ शत्रुओं को चेतावनी मैंने दी.. सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डा. जीपी शर्मा ने कवि मथुरा प्रसाद गुंजन पर केन्द्रित कविता का पाठ किया। रानी श्रीवास्तव ने दामिनी पर केन्द्रित ‘थोड़ी देर के लिए’ एवं ’जल का जलजला’ शीर्षक कविता का पाठ किया। शंकर मोहन झा ने अपनी कविता में कहा- अभावों की भीड़ में भाव व्यक्त करने की क्षमता ही मर गयी..। मधेपुरा से आये अरविन्द श्रीवास्तव ने अपनी कविता ‘हत्यारे की अनुपस्थिति में’ कहा-
हत्यारे की अनुपस्थिति ने पूरी फ़िल्म को 
नमकहीन
उबाऊ और थकान भरी बना दिया था
एशियाई घटनाक्रम में
चाइनीज उपस्थिति और
भारतीय चुप्पी सी!
 
प्रसिद्ध गज़लकार छंदराज की एक बानगी -लुट गयी होगी या जली होगी, बात लड़की यूँ चली होगी.. सुनाकर श्रोताओं पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए गीतकार शिवनन्दन सलील ने कहा –  मौसम बदला हम-तुम बदले वह सब बदल गया/ पागल है दिल बदल न पाया फिर से मचल गया।
 
सम्मेलन में- सुबोध छवि, श्याम सुंदर सिंह, सुनील कनौजिया, लाडले साहब, चंद्रशेखर, खुर्शीद अनवर, कृष्ण कुमार क्रांति एवं ज्योति सिंहा ने अपनी कविता से श्रोताओं को प्रभावित किया। मथुरा जी के सुपुत्र निर्मल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन शिवनन्दन सलील ने किया।
कई मायने में मुंगेर में आयोजित इस वर्ष का मथुरा प्रसाद गुंजन स्मृति सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन यादगार रहा। 
 
अरविन्द श्रीवास्तव/ मधेपुरा 
संपर्क – 9431080862.
 
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