मुंबई : लोकसभा चुनाव के लिए आचर संहिता लागू होने से पहले ही मुंबई में पेड न्यूज का खेल शुरू हो गया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुरुदास कामत ने इसका श्रीगणेश किया है. शनिवार को कामत ने मुंबई से निकलने वाले तीन हिंदी अखबारों और 5 उर्दू अखबारों में पैसे देकर आधा-आधा पेज का फर्जी न्यूज छपवाया.
दरअसल महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को अब तक के लगभग सभी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मुंबई और आस-पास के शहरों के झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों का पूर्ण समर्थन मिलता रहा है. इसकी वजह से 2004 के विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस-राकांपा गठबंधन ने 1 जनवरी 1995 के बाद 1 जनवरी 2000 तक बनी सभी अवैध झुग्गी-झोपडिय़ों को संरक्षण देने का वादा किया था.
इस वादे के बल पर 2009 तक के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वह शिवसेना-भाजपा को पराजित करते आई. अब चुनाव समीप है और कांग्रेस की हालत खस्ता. इसलिए कांग्रेस के कृपाशंकर सिंह सहित अन्य उत्तर भारतीय नेताओं ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर दबाव बनाया कि लोकसभा चुनाव के पहले 2000 तक के झोपड़ों को संरक्षण देने का कानून बनाया जाए. पिछले दिनों हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पीडब्लूडी मंत्री छगन भुजबल व वस्त्रोद्योगमंत्री नसीम खान ने यह मामला जोरशोर से उठाया था.
2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2000 तक बनी झोपडिय़ों को संरक्षण देने वाला विधेयक शुक्रवार को एक झटके में पास कर दिया. शनिवार को मुंबई से निकलने वाले हिंदी अखबार नवभारत, हमारा महानगर, उर्दू दैनिक इंकलाब, उर्दू टाईम्स, सहाफत, अवधनामा जैसे अखबारों में आधे-आधे पेज की पेड न्यूज छपी. शीर्षक था 'गुरुदास कामत की मेहनत रंग लाई, 2000 तक के झोपड़ों को मिली मान्यता'.
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इस फर्जी खबर के अनुसार 2000 तक के झोपड़ों को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने जो फैसला लिया. उसका पूरा श्रेय सिर्फ कामत महोदय को जाता है. हालांकि कामत इस पेड न्यूज में अपने साथ सोनिया गांधी, राहुल गांधी का फोटा छपवाना नहीं भूले. सूत्रों के अनुसार कामत ने इस पेड न्यूज पर 4 लाख रुपए खर्च किए. गुरुदास कामत मुंबई की उत्तर पश्चिम सीट से सांसद हैं और इस बार भी कांग्रेस उम्मीदवार होंगे.
'मिस्टर नाट रिचेबल एमपी' के रूप में कुख्यात कामत की राह इस बार मुश्किल नजर आ रही है. मुंबई के एक पत्रकार कहते हैं कि कामत किसी पत्रकार सहित किसी का भी फोन काल रिसीव नहीं करते और न ही एसएमएस का जवाब देते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें पता है कि चुनाव के समय पेड न्यूज छाप अखबारों में पैसे देकर जो चाहेंगे छपवा लेंगे. इस पेड न्यूज प्रकरण को लेकर मुंबई के कई पत्रकारों और समाज सेवियों ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया में शिकायत करने की तैयारी की है.
सबसे शर्मनाक बात है कि पेड न्यूज छापने वाले अखबारों के संपादकों ने ऐसी खबरों पर तनिक भी आपत्ति नहीं जताई और न ही इस तरह के पैसे लेकर छापे गए समाचारों पर कहीं विज्ञापन या एडीवीटी लिखवाया. पाठकों के बीच मिलावटी खबर परोसने वाले इन अखबारों का लाइसेंस रद्द किए जाने को लेकर भी विचार करने की जरूरत है. अभी कुछ रोज पहले ही राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अखबार वालों के एक सम्मेलन में पेड न्यूज पर चिंता जताई थी. पर दूसरों को प्रवचन देकर नैतिकता सिखाने में तत्पर रहने वाले अखबार वालों को तनिक शर्म नहीं आई कि वे खुद क्यों एक गंभीर और लोकतंत्र विरोधी बुराई को बढ़ावा दे रहे हैं. कांग्रेस नेता कामत ने पैसे दकर पेड न्यूज छपवाने का जो कलंकित कार्य किया है इसका संज्ञान कांग्रेसे के वरिष्ठ नेताओं को लेना चाहिए.








