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मुंबई में तीन नये दैनिक अखबारों ने दी दस्तक

: पहले दक्षिण मुंबई, उसके बाद अब्सोल्यूट इंडिया और अब दबंग दुनिया भी लांच : हाल ही में मुंबई से लांच हुए दैनिक दबंग दुनिया के साथ ही अब मुंबई में नये दैनिकों की संख्या तीन हो गई है। इससे पूर्व दैनिक दक्षिण मुंबई फिर अब्सोल्यूट इंडिया लांच हो चुके हैं। दक्षिण मुंबई लांच होने के बाद स्मूथली अपने विकास में लगा हुआ है वहीं अब्सोल्यूट इंडिया आने से पहले अच्छी चर्चा बटोरने के बाद भी उसमें कुछ खास नहीं दिखा। उस अखबार में संपादकीय पृष्ठ ही नहीं है, जिसके कारण उसका काफी मजाक भी बनाया जा रहा है। हालांकि उस अखबार के साथ कई प्रतिष्ठित नाम जुड़े होने की वजह से अभी भी अच्छे की उम्मीद की जा रही है। अब्सोल्यूट इंडिया के प्रधान संपादक वरिष्ठ पत्रकार द्विजेंद्रनाथ तिवारी हैं।

: पहले दक्षिण मुंबई, उसके बाद अब्सोल्यूट इंडिया और अब दबंग दुनिया भी लांच : हाल ही में मुंबई से लांच हुए दैनिक दबंग दुनिया के साथ ही अब मुंबई में नये दैनिकों की संख्या तीन हो गई है। इससे पूर्व दैनिक दक्षिण मुंबई फिर अब्सोल्यूट इंडिया लांच हो चुके हैं। दक्षिण मुंबई लांच होने के बाद स्मूथली अपने विकास में लगा हुआ है वहीं अब्सोल्यूट इंडिया आने से पहले अच्छी चर्चा बटोरने के बाद भी उसमें कुछ खास नहीं दिखा। उस अखबार में संपादकीय पृष्ठ ही नहीं है, जिसके कारण उसका काफी मजाक भी बनाया जा रहा है। हालांकि उस अखबार के साथ कई प्रतिष्ठित नाम जुड़े होने की वजह से अभी भी अच्छे की उम्मीद की जा रही है। अब्सोल्यूट इंडिया के प्रधान संपादक वरिष्ठ पत्रकार द्विजेंद्रनाथ तिवारी हैं।

दबंग दुनिया का पहला अंक काफी धमाकेदार है। लेकिन उसका माईनस पॉइंट यह है कि इसमें काम करने वालों का इंटरव्यू लगभग चार महीने पूर्व हो चुका था। लेकिन लांचिंग की तारीख लगातार खिसकाया जा रहा था जिसके कारण ज्वाइन कर चुके लोग काफी निराश हो रहे थे। लेकिन अचानक 23 अक्टूबर को यह अखबार लांच कर दिया गया तथा चार महीने से इंतजार कर चुके कर्मचारियों को बुलाया तक नहीं गया और न ही उनकी चार महीनों की सेलरी दी गई। उन लोगों में कुछ को तो यहां काम मिल गया, कुछ ने दूसरी नौकरी ढूंढ़ ली जबकि जो कुछ लोग इंतजार में घर बैठे रहे उन्हें काफी निराशा हाथ लगी है, क्योंकि यह उनके साथ धोखा साबित हुआ।

दैनिक दबंग दुनिया के संपादक नीलकंठ पारटकर हैं। श्री पारटकर इसके पहले मेट्रो7डेज के संपादक रह चुके हैं जो लांच तो बड़े ही धूमधाम से हुआ था लेकिन थोड़े ही दिन बाद आर्थिक अभाव के कारण बंद हो गया और यहां भी तमाम कर्मचारियों को अपनी एक से दो महीने की सैलरी गंवानी पड़ी थी। इसके साथ ही मुंबई में अब हिंदी अखबारों की काफी अच्छी संख्या हो गई है। यहां के प्रमुख हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स, नव भारत, यशोभूमि, हमारा महानगर, जागरूक टाइम्स, प्रातःकाल सहित ये तीनों अखबार भी शामिल हो गए हैं। हालांकि अभी भी इस शहर को एक अच्छे हिंदी समाचार पत्र की जरूरत है, जो ये सभी देने में असफल हैं।

मुंबई से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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