हिंदुस्तान के फर्जीवाड़ा और विज्ञापन घोटाले का श्रीकृष्ण प्रसाद ने पोल क्या खोला, अब सभी बड़े अखबारों के फर्जीवाड़े और जालसाजी सामने आने लगी है. हिंदुस्तान के बाद अब खुद को नम्बर एक कहने वाले जागरण की भी पोल खुल गई है. इसके 17 संपादकों और निदेशकों के खिलाफ चार सौ बीसी समेत कई मामलों में मुकदमा दर्ज हुआ है. मुजफ्फरपुर में तो कोर्ट ने खुद अपनी जांच के बाद जागरण के निदेशकों तथा संपादकों को कोर्ट में पेश होने का सम्मन भेजा है.
हालांकि अभी तो केवल मुजफ्फरपुर में मामला दर्ज हुआ है लेकिन बताया जा रहा है कि जागरण का यह फर्जीवाड़ा उसके लगभग सभी यूनिटों में चल रहा है. मुजफ्फरपुर में जागरण ने खुद अपने कारस्तानी से ही साबित कर दिया था कि वो फर्जीवाड़ा कर रहा है. रमण कुमार यादव ने जब जागरण की पोल आरटीआई के जरिए खोलनी शुरू की तो डरे जागरण ने फटाफट अपना आरएनई नम्बर आवेदित कर दिया. अब उसे नया आएनआई नम्बर भी मिल गया है.
पहले दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के प्रिंट लाइन में रजिस्ट्रेशन नम्बर BIHHIN/2000/3097 प्रकाशित किया जाता था तथा ईमेल में [email protected] का प्रकाशन किया जाता था. इसके अलावा पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर तथा सिलीगुडी से प्रकाशित और पटना से मुद्रित लिख कर प्रकाशन किया जाता था. लेकिन जब रमण कुमार ने जागरण की पोल खोलनी शुरू की तो 29 जून 2012 से इसका प्रिंट लाइन चेंज हो गया. आरएनआई की जगह आवेदित, memo no- 101 dated 23/6/2012 लिखा जाने लगा. साथ ही इसका ईमेल आईडी भी बदल कर [email protected] कर दिया गया. बाद में आरएनआई ने दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के लिए नम्बर BIHHIN/2012/47184 आबंटित किया. अब इसी का प्रकाशन अखबार में किया जा रहा है.
यानी इस तथ्य से साफ जाहिर है कि दैनिक जागरण एक ही आरएनआई पर कई जगहों से अलग अलग एडिशन प्रकाशित करके फर्जी तरीके से सरकारी तथा गैर सरकारी विज्ञापन वसूल रहा था. साफ है कि हिंदुस्तान की तरह जागरण ने भी गलत तरीके से अखबार का अवैध केंद्रों से प्रकाशन कर करोड़ों रुपये के सरकार विज्ञापन की हेराफेरी की है. अब कोर्ट में सुनवाई के बाद साफ हो गया है कि जागरण के निदेशक और संपादक चार सौ बीसी के जरिए पैसा बना रहे थे.

हल्द्वानी में भी जागरण अखबार का अवैध प्रकाशन कर रहा है. यहां भी आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ. अयोध्या प्रसाद भारती ने आरटीआई डालकर दैनिक जागरण के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था. यहां भी देहरादून के नम्बर पर हल्द्वानी से अखबार प्रकाशित किया जा रहा था. यूपी में भी इस अखबार के छह यूनिटों को छोड़कर बाकी सारे एडिशन किसी ना किसी तरीके से फर्जी हैं. यह बात आरटीआई के जरिए सामने आ चुकी है. आरटीआई की सूचना से पता चला था कि दैनिक जागरण के बनारस, इलाहाबाद, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ़, नोएडा एडिशनों का प्रकाशन गलत नामों पर हो रहा है. क्योंकि आरएनआई की जानकारी में जागरण पब्लिकेशन के अंतर्गत इन एडिशनों का नाम नहीं है.
जागरण के आधा दर्जन एडिशन सही रजिस्ट्रेशन पर प्रकाशित हो रहे हैं तो आधा दर्जन एडिशनों को सरकार तथा आरएनआई के आंखों में धूल झोंककर प्रकाशित किया जा रहा है. सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा बनारस यूनिट में दिख रहा है क्योंकि यह अखबार इस नाम से रजिस्टर्ड न होते हुए भी बनारस तथा इलाहाबाद से दैनिक जागरण के नाम से प्रकाशित हो रहा है. इस तरह से यह अखबार पिछले कई दशकों में इन आधा दर्जन यूनिटों से अरबों का सरकारी तथा पब्लिक विज्ञापन का राजस्व वसूल चुका होगा. यानी अगर इसकी जांच की जाए तो शायद देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आएगा. इस बारे में बताया जा रहा है कि बनारस में दैनिक जागरण अवैध तरीके से नौ जिलों में अपने एडिशनों का प्रकाशन कर रहा है. इसके अलावा इलाहाबाद में भी कई जिलों में अवैध प्रकाशन किया जा रहा है. बिना रजिस्ट्रेशन के इन सभी जिलों में अखबार के नए संस्करण रोज प्रकाशित किए जा रहे हैं.
फर्जी एडिशनों के जरिए यह अखबार करोड़ों का सरकारी विज्ञापन उगाह चुका है. जानकारियों में अब इस अखबार तथा इसके प्रबंधन की कलई लगातार खुलती जा रही है. जिस तरह से इस अखबार के फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है, उससे साफ लगता है कि देर सबेर इसके कर्ताधर्ताओं को जेल जाना ही पड़ेगा. धीरे धीरे खुलासा हो रहा है कि इस अखबार ने किस तरह से सबको धोखा देकर माल बटोरा है. देश का यह नम्बर वन अखबार यूपी में मात्र छह जगहों से रजिस्टर्ड है. रमन कुमार यादव द्वारा आरएनआई से मांगी गई सूचना अधिकार से इस बात का खुलासा हुआ है. सूचना में जानकारी दी गई है कि उत्तर प्रदेश में यह अखबार मात्र छह जगहों से प्रकाशित हो रहा है. जिन जगहों से इस अखबार का रजिस्ट्रेशन कराया गया है उसमें कानपुर, मेरठ, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर और झांसी शामिल हैं. इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि पांच जगहों के संपादक तो संजय गुप्ता हैं, लेकिन झांसी वाले एडिशन के संपादक यशवर्द्धन गुप्ता हैं.
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इन छह जगहों के अलावा दैनिक जागरण के नाम से इस अखबार का कहीं भी रजिस्ट्रेशन नहीं है. इससे साफ है कि अन्य जिलों एवं जिन स्थानों से यह अखबार प्रकाशित हो रहा है वो पूर्ण रूप से फर्जी है. ऐसे ही फर्जी प्रकाशन के चलते बिहार में इस अखबार के प्रबंधन के खिलाफ मुजफ्फरपुर में कोर्ट में मामला दर्ज हो चुका है. बताया जा रहा है अगर इस मामले में सरकारी मशीनरी तथा अन्य जिम्मेदार संस्थाओं ने ईमानदारी से अपना काम किया तो एक बहुत बड़े घोटाले पर से तो पर्दा उठेगा ही, दैनिक जागरण के तमाम कर्ताधार्ता भी आईपीसी की कई धाराओं में जेल की सलाखों के पीछे होंगे.
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बड़ा घोटाला : केवल छह जगहों से रजिस्टर्ड दैनिक जागरण पूरे यूपी में कर रहा है प्रकाशन
बनारस, इलाहाबाद, आगरा, मुरादाबाद, अलीगढ़ में अवैध प्रकाशन कर रहा है दैनिक जागरण!
बिना रजिस्ट्रेशन के हल्द्वानी से अखबार निकाल रहा था दैनिक जागरण
हिंदुस्तान के बाद जागरण का भी फर्जीवाड़ा सामने आया, रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन






