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”मुझे अंग्रेजी नहीं, हिंदी के लेखक के रूप में ज्यादा सम्मान मिलता है”

इंदौर : साइबर संस्कृति के इस युग में रोज नए तकनीकी उपकरण आ रहे हैं लेकिन तकनीकी क्रान्ति के इस दौर में भी पुस्तकों का महत्व बना रहेगा. तकनीक के क्षेत्र में चाहे कितनी भी प्रगति हो जाए, मनुष्य के जीवन में किताबों का महत्व और भूमिका कभी कम नहीं होगी. ये बात संविधान विशेषज्ञ और लेखक सुभाष कश्यप ने कही. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया और श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित नौ दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये पुस्तक मेला लोगों को किताबो से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के उपसभापति एवं पूर्व कुलपति डा. भरत छापरवाल ने की.

इंदौर : साइबर संस्कृति के इस युग में रोज नए तकनीकी उपकरण आ रहे हैं लेकिन तकनीकी क्रान्ति के इस दौर में भी पुस्तकों का महत्व बना रहेगा. तकनीक के क्षेत्र में चाहे कितनी भी प्रगति हो जाए, मनुष्य के जीवन में किताबों का महत्व और भूमिका कभी कम नहीं होगी. ये बात संविधान विशेषज्ञ और लेखक सुभाष कश्यप ने कही. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया और श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित नौ दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये पुस्तक मेला लोगों को किताबो से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के उपसभापति एवं पूर्व कुलपति डा. भरत छापरवाल ने की.

संसद और संविधान पर हिन्दी और अंग्रेजी में श्रेष्ठ पुस्तकों के रचियता सुभाष कश्यप ने कहा कि कम कीमतों में श्रेष्ठ किताबें उपलब्ध कराकर एनबीटी देश के आम आदमी तक किताबे पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है. हिन्दी के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के लेखक को अधिक सम्मानित माना जाता है मगर मेरा व्यक्तिगत अनुभव ये है कि मुझे हिन्दी के लेखक के रूप में अधिक मान-सम्मान मिलता है.

शुभारंभ समारोह में उपस्थित लेखक, कवि, साहित्यकार, विद्यार्थी एवं अन्य पुस्तक प्रेमियों को संबोधित करते हुए डा. भरत छापरवाल ने कहा कि नेशनल बुक ट्रस्ट और समिति द्वारा आयोजित इस पुस्तक मेले का इंदौर के पुस्तक प्रेमियों को वर्ष भर इंतज़ार रहता है.एनबीटी के संपादक श्री पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि इस पुस्तक मेले में देश के सत्तर प्रख्यात प्रकाशकों ने विभिन्न विषयों पर प्रकाशित लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की है. मेले में हिन्दी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, उर्दू और अंग्रेजी सहित कई भारतीय भाषाओं के नए प्रकाशन उपलब्ध है. पुस्तक प्रेमियों को प्रकाशकों द्वारा आकर्षक छूट भी दी जा रही है.

प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत प्रधानमंत्री श्री बसंतसिंह जौहरी, पत्र सूचना अधिकारी श्री मधुकर पंवार,  साहित्यमंत्री श्री हरेराम वाजपेयी, अर्थमंत्री श्री अरविंद जवलेकर, शोध मंत्री डा. दिलीप कुमार चौहान,  प्रचार मंत्री श्री अरविन्द ओझा, पुस्तकालय मंत्री श्री राकेश शर्मा ने किया.स्वागत भाषण समिति के प्रबंधमंत्री प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने दिया.

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में १३ नवंबर की शाम ०४ बजे ''विदेश में हिन्दी'' विषय पर अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा. समिति के शिवाजी भवन में आयोजित इस अन्तराष्ट्रीय गोष्ठी में जापान की हिन्दी विदुषी तोमोको किकुची, सूरीनाम के हिन्दी विद्वान श्री भगवान, भोपाल के संभागायुक्त और विचारक श्री मनोज श्रीवास्तव और श्री मधुकर पंवार (सूचना अधिकारी, पत्र सूचना कार्यालय)भाग लेंगे. इस अवसर पर एनबीटी द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों – हिरोशिमा का दर्द सूरीनाम और नीदरलैंड की लोककथा का विमोचन भी होगा. सभी हिन्दी प्रेमी इस कार्यक्रम में सादर आमंत्रित है.

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