प्रकाश चंद कुकरेती मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं. वे दिल्ली में नौकरी करते हैं तथा गोविंदपुरी कालिकाजी के इलाके में रहते हैं. इनकी शादी पानीपत निवासी मीना कुमारी के साथ हुई थी. प्रकाश का कहना है कि मीना ने इन कई आरोप लगाए. उनके परिवार पर कई आरोप लगाए.
इसके बाद भी ये लोग उसके साथ सभ्य व्यवहार करते रहे, परन्तु अब प्रकाश के ससुरालियों ने उन्हें दहेज के केस में फंसाने की धमकी दी तो उन्होंने तमाम जगह शिकायत करने के बाद महिला आयोग के सामने भी गुहार लगाई. महिला आयोग ने उनसे कुछ बातें पूछी थी, उसी संदर्भ में प्रकाश ने विस्तार से सारी बातें बताई हैं.
सेवा में,
महिला आयोग
कमरा नंबर ३०५
लघु सचिवालय
पानीपत
विषय- मैंने शिकायत की थी कि मुझे दहेज के केस मैं फसाने कि धमकी दी जा रही है
महोदया,
मुझसे पिछली बार यह पूछा गया था कि अगर मेरी पत्नी और उसके परिवार वाले अपनी गलतियाँ लिखित तौर पर मान लेते हैं. साथ ही अगर वह यह भी लिख कर दे दें कि आगे यह सब दुबारा नहीं होगा और मेरे सास-ससुर मेरी पत्नी को भड़का कर मेरे खिलाफ कोई साज़िश नहीं करेंगे. और मेरी पत्नी अगर भविष्य में कोई शिकायत का मौका न दे तो क्या तुम अपनी पत्नी को रखने के लिए तैयार हो, जिसका जबाब देने के लिए मैंने कुछ समय माँगा था. इस बारे मैं मैं अपना जबाब इस तरह दे रहा हूँ :
महोदया, ऐसे मामलों में कोई भी फैसला बहुत ही सोच समझकर लेना पड़ता है क्यूंकि यह जिंदगी भर का सवाल हैं. आगे मेरी पत्नी क्या करेगी और किस तरह रहेगी इसकी गारंटी तो कोई भी नहीं दे सकता क्यूंकि कल को क्या होगा और कोई इंसान कल को किस तरह का व्यव्हार करेगा यह तो भगवान भी नहीं बता सकते. फिर हम लोग तो इंसान है. मैं यह किस तरह बता सकता हूँ कि मेरी पत्नी भविष्य में किस तरह का व्यव्हार करेगी. मैं तो मेरी पत्नी के पिछले तीन चार सालों की हरकतों के आधार पर ही कोई फैसला ले सकता हूँ. और पिछले चार सालों में मेरी पत्नी हमें अपनी माँ और पिताजी के साथ मिलकर हर तरह से परेशान कर चुकी है. जब वह अपनी साजिशों मैं कामयाब नहीं हो पाई तो मेरी पत्नी नीचता पर भी उतर आई और ऐसे ऐसे आरोप हम पर लगा चुकी है, जिनको दोहराते हुए भी शर्म आती है इसलिए मैं यह सब कुछ लिखित तौर पर दे रहा हूँ.
मेरी शादी कुमारी मीना के साथ नवम्बर 2007 में हुई थी. शादी के कुछ समय बाद यानी लगभग तीन माह बाद सन 2008 में मैं अपनी पत्नी को देल्ही लेकर आ गया. देल्ही आने के दो तीन महीने बाद अचानक ही मेरी पत्नी मुझ पर मारपीट का आरोप लगाने लग गई. उसने सीधे मुझे तो कुछ नहीं कहा मगर अपने पिताजी को फोन करके यह कहने लगी कि मेरा पति मुझसे रोज ही मार पीट कर रहा है. यही नहीं मेरी पत्नी मेरी बहिन के घर, जो कि मेरे कमरे से थोड़ी ही दूर था, वहां जाकर भी यही सब आरोप लगाने लगी, जिस पर मेरी बहिन ने मुझे बुलाया. तब जाकर मुझे पता चला कि मुझ पर क्या क्या आरोप लगाये जा रहे हैं. जब मैंने कहा कि यह सब झूठ है और अपनी पत्नी से कहा कि बताओ मैंने तुम्हे कब मारा है. तो मेरी पत्नी कहने लगी कि मुझे यहाँ रहना ही नहीं है. काफी समझाने पर भी जब मेरी पत्नी नहीं मानी तो मैंने घर से अपने पिताजी को बुलाया और साथ ही ससुर जी को भी बुलाया. ससुर जी यही कहते रहे कि मैं आऊंगा. मगर उन्होंने मेरी सास और मेरी पत्नी के जीजाजी को भेजा. जब हम लोग बैठे और जब मैंने यह बात साबित कर दी कि मैंने किसी तरह का गलत व्यवहार भी नहीं किया है मारपीट तो बहुत ही दूर की बात है, तो मेरी पत्नी कहने लगी कि मुझे इस आदमी के साथ रहना ही नहीं है, मुझे सिर्फ तलाक चाहिए और कुछ भी नहीं. और मुझे अगर मजबूर किया गया तो मैं ज़हर खा लूंगी. यह सब सुनकर मेरी सास उसे दूसरे कमरे में लेकर चली गई और फिर पता नहीं मेरी पत्नी और मेरी सास के क्या बात हुई कि मेरी पत्नी यह कहने लगी कि अगर लड़का और उसके पिताजी कहे कि वह किसी तरह का गलत व्यवहार मेरे साथ नहीं करेंगे तो मैं साथ मैं रहने के लिए तैयार हूँ. कोई गलती ना होते हुए भी मुझे यह बचन देना पड़ा. इसके बाद सब ने मिलकर फैसला लिया कि मेरी पत्नी को शायद मुझ से कोई समस्या है इसलिए मेरी पत्नी अब मेरे घर में मेरे माँ और पिताजी के साथ ही रहेगी.
फिर दुर्भाग्य से मैं सन 2009 में अपनी पत्नी को फिर देल्ही लेकर आया (इसके पीछे भी एक कहानी है उस वक्त मेरी पत्नी की सबसे छोटी बहिन यानी मेरी सबसे छोटी साली को करंट लग गया था जिसके कारण मेरी पत्नी कहने लगी कि मुझे अपनी बहिन को देखना है. जिस पर मैं उसे घर जाकर अपने साथ ले आया). मगर इस बार भी वही कहानी दोहराई गयी. एक दिन अचानक मेरे ससुर जी का फोन मेरे भाई को आया और उन्होंने कहा कि प्रकाश मेरी बेटी से रोज मार पीट कर रहा है. और मैं तुम पर दहेज का केस कर रहा हूँ. जब मेरे भाई ने मुझे बताया कि इस तरह से ससुर जी का फोन मेरे पास आया है. तो मैंने तत्काल ससुर जी को फोन किया और कहा कि आप किस आधार पर यह कह रहे हो कि मैं इस तरह की कोई हरकत कर रहा हूँ. इस पर वह बोले कि और मेरी बेटी रोज मुझको फोन करके कहती है कि मुझे रोज मारा पीटा जा रहा है. इस पर मैंने कहा कि अगर तुमको इस तरह का कोई फोन भी आ रहा था तो तुम्हारा फ़र्ज़ था कि सबसे पहले तो तुम मुझको कहते कि तुम इस तरह की हरकत क्यूँ कर रहे हो. मगर आपने ना तो मुझसे किसी भी तरह की पूछताछ की और ना ही कोई तहकीकात की. जबकि आप जानते हैं कि पिछली बार भी आपकी लड़की ने झूठ बोला था. फिर भी आप मात्र उसके कहने पर मुझे इस तरह किस प्रकार धमका सकते हो. जबकि हो सकता है इस बार भी आपकी लड़की झूठ बोल रही हो मगर आपने तो सीधे ही कहा कि मै तुम पर दहेज का केस कर दूंगा. जबकि इस तरह तो तब धमकाया जाता है जब यह बात साबित हो जाए कि आपके समझाने के वावजूद हम लोग आपकी बेटी के साथ गलत बर्ताव कर रहे हैं. और आखिर मैं आपको इस तरह धमकाना पड़ा. इस पर मेरे ससुर जी बोले चलो जो हुआ सो हुआ. मगर हम सब परेशान थे कि यह हो क्या रहा है. मेरी पत्नी इस तरह के आरोप झूठे और मनघडंत क्यूँ लगा रही है. जब मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि आज इस तरह का फोन मेरे भाई के पास आया था और फिर अब यह बताओ कि मैंने तुम्हें कब मारा है तो यह सुनकर मेरी पत्नी मुझसे लड़नी लगी. और और कहने लग गई कि मैं यहाँ से भाग जाउंगी. ज़हर खा लूंगी इस पर मैंने अपने ससुर जी को कहा कि आप यहाँ आओ और अपनी लड़की को समझाओ. मगर वह नहीं आये. उन्होंने अपने भाई याने की मेरी पत्नी के ताउजी और ताई को भेजा. सारी बात जब मेरी पत्नी के ताई और ताउजी को सारी बात समझाई गई तो वह हाथ जोड़कर वापस चले गए.
उन्होंने यहाँ तक कहा कि आज के बाद इस मामले में हम कुछ नहीं बोलेंगे. और किसी को बताना भी नहीं कि हम लोग यहाँ आये थे. फिर मैंने मेरे ससुर जी को फोन किया और कहा कि आपके बड़े भाई ने कुछ कहा ही नहीं. इसलिए अब आप आओ. तब अगले दिन मेरी सासू जी आईं. मेरी सासू जी ने सीधे कहा कि बेटी चल अपना घर है एक मेरी बेटी कमा ही रही है, तू भी नौकरी करके अपना गुजर कर लेगी. यह कहकर मेरी सासू जी मेरी पत्नी को लेकर पानीपत चली गई. जब कोई चारा नहीं था तो मैंने अपने पिताजी को फोन करके देल्ही बुलाया. मेरे पिताजी ने मेरे ससुर जी को फोन करके कहा कि आप भी आओ और दोनों देखते हैं कि आखिर मामला क्या है. मगर मेरे ससुर जी मेरे पिताजी से मिलने नहीं आये. उन्होंने मेरी सास और मेरी छोटी साली को भेजा. इस पर मेरे पिताजी ने कहा कि आप लोगों से क्या बात करनी है आप लड़की के पिताजी को भेजो, मेरे पिताजी दो दिन तक देल्ही में रहे मगर मेरे ससुर जी नहीं आये, फिर थक हार कर मेरे पिताजी वापस चले गए. उधर लड़की यही आरोप लगाती रही कि मुझे मारा पीटा जा रहा है. अब मेरे सामने यह समस्या थी कि मैं यह किस तरह साबित करूँ कि मेरी पत्नी झूठ बोल रही है. बहुत सोचने के बाद मुझे अपनी समस्या का एक हल दिखाई दिया क्यूंकि अकेले में मेरे सामने मेरी पत्नी कई बार यह कबूल कर चुकी थी कि उसके साथ कोई मारपीट नहीं की गई है, मगर यही बात मैं अपनी पत्नी के मुंह से सबके सामने किस तरह से कहलवाउ, अगर किसी तरह मेरी पत्नी सबके सामने यह कह दे कि उसके साथ कोई मारपीट नहीं की गई है तो मैं अपनी बेगुनाही साबित कर सकता हूँ. मगर मेरी पत्नी यह सब क्यूँ कहेगी. यहाँ पर मुझे लगा कि किसी भी तरह मुझे अपनी पत्नी से यह सब कबूल करवाना ही है. बहुत सोचने के बाद मुझे एक उपाय सुझाई दिया. मुझे इस बात का तो पूरा पता था कि मेरी पत्नी कभी भी सबके सामने यह कतई स्वीकार नहीं करेगी कि उसके साथ कोई भी मारपीट नहीं की गई थी. मगर समस्या यह थी कि पत्नी से यह किस तरह उगलवाया जाये. लेकिन कहते हैं जहाँ चाह वहां राह मुझे अपनी समस्या का हल मोबाइल फोन में दिखा. मैंने ६५०० रुपये में एक फोन ख़रीदा. अब मैं अपनी पत्नी सास ससुर और सालियों से जो भी बात करता था वह रिकॉर्ड कर लेता था इस तरह यह सब ड्रामा तीन महीने तक चलता रहा और अंतत तीन महीने बाद मैंने अपनी पत्नी से यह कबूल करवा ही लिया कि उसके साथ कोई मारपीट नहीं हुई है. तब जाकर मैंने समझौते की बात शुरू कर दी क्यूंकि अब मेरे पास वह सबूत था, जो सारे मामले कि हवा निकल सकता था.
अब समझौते के लिए कहाँ बैठें यह समस्या थी, क्यूंकि पत्नी के पक्ष वाले देल्ही आने के लिए तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि हम तीन बार देल्ही आ चुके हैं और अब चौथी बार नहीं आयेंगे. इसलिए उन्होंने मुझे पानीपत बुलाया जिस पर मैंने मना कर दिया, तब जाकर बड़ी मुश्किल से हम लोग मेरी पत्नी के जीजाजी के घर शामली में बैठे. जब मैं दिन में दो बजे के करीब शामली पंहुचा तो वहां पर ५-७ लोग समझौते के लिए पहले ही बैठे थे. मैंने सबसे पहले अपनी पत्नी को अकले मैं बुलाया और उसको उसकी वह रिकॉर्डिंग सुनाई, जिसमें वह कह रही थी कि उसके साथ कोई मारपीट नहीं की गई थी. साथ ही मैंने कहा कि अगर यहाँ पर तुमने झूठ कहा तो मैं सारी रेकॉर्डिंग्स सबके सामने सुना दूंगा. फिर जब हम लोग आपस मैं बैठे तो सबसे पहले मेरी पत्नी को बुलवाकर पूछा गया कि बताओ क्या बात है, मगर मेरी पत्नी बोले तो क्या उसके मुंह पर जैसे ताला लग गया हो वह कुछ नहीं बोली. इस पर मैंने सबको बताया कि मैंने इस तरह की रेकॉर्डिंग्स कर रखी है. अब वह कुछ नहीं कह सकती है और अब मैं कह सकता हूँ कि आपकी लड़की झूठ बोल रही है और रिकॉर्डिंग सिर्फ मेरी पत्नी की ही नहीं की गई है बल्कि मैंने इस दौरान अपनी सास ससुर सालियों, लड़की के जीजाजी और दीदी से जो जो बात की है वह सब मेरे पास रेकॉर्डेड है. यह सुनकर सब लोग ऐसे शांत हो गए मानो हमारे बीच में किसी कि मृत्यु हो गई हो. कुछ लोग तो उसी वक्त उठकर चले गए तब मेरे ससुर जी बोले कोई बात नहीं आप यह रिकॉर्डिंग डिलीट कर देना और अब यह मामला समाप्त समझो. यह कह कर वह बाहर चले गए. जबकि मुझे तो लगा कि मेरी पत्नी के जीजाजी, उसकी दीदी और मेरे ससुर मेरी पत्नी को बहुत डांटेंगे क्यूंकि उसके एक झूठ पर दोनों परिवार वाले तीन महीने तक परेशान रहे थे. मगर उन्होंने तो कुछ कहा ही नहीं वह अपनी लड़की के साथ तो बात करते रहे मगर उन्होंने मुझसे कोई बात नहीं की और उनकी बातचीत का मुख्य मुद्दा रेकॉर्डिंग्स थी. क्यूंकि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि मैं इस तरह का कोई गेम खेल सकता हूँ. इन सारी बातों से मुझे यह शक हो गया कि हो ना हो यह सब लोग मिलकर मेरे खिलाफ कोई साज़िश रच रहे थे, जिन रिकॉर्डिंग के आधार पर मैं खुद को तीसमार खां समझ रहा था वह तो एक फुस्स पटाखा निकला. मेरे ससुर जो मेरे आने पर बहुत खुश थे वह अचानक इस तरह दुखी हो गए मानो उनकी वर्षों की तपस्या पर पानी पड़ गया हो. वह मुझसे तो कटने लगे मगर अपनी बेटी के साथ खूब बातें करने लगे जबकि उन्हें मेरे साथ बातें करनी चाहिए थी और साथ ही अपनी लड़की के झूठ पर मुझसे माफ़ी मंगनी चाहिए थी, मगर जब ऐसी कोई बात नहीं हुई.
फिर मैं अपने ससुर जी को बाहर घुमाने ले गया और मैंने उनसे साफ़ पूछा कि आखिर इस तरह कि साज़िश करके आपको क्या मिला और आखिर आप का इस साज़िश के पीछे क्या मकसद है. इस पर वह चुप रहे. मैंने यह भी कहा कि अगर इन रेकॉर्डिंग्स के बिना पर कोर्ट में चला गया तो आपको दो साल की जेल भी हो सकती है और साथ ही जिन जिन कि रेकॉर्डिंग्स मेरे पास हैं उनको भी अदालत में भी पेश होना पड़ेगा, इस पर मेरे ससुर जी बोले आगे ऐसा कुछ नहीं होगा और आप भी यह सारी रेकॉर्डिंग्स डिलीट कर देना और अपने माँ और पिताजी को यह रेकॉर्डिंग्स नहीं सुनना साथ ही किसी से भी इनका ज़िक्र नहीं करना. वरना मेरी बदनामी हो जायेगी. फिर अगले दिन सुबह मैं अपनी पत्नी को वापस अपने घर उत्तराखंड ले कर चला गया. रास्ते में मेरी पत्नी कहने लगी कि इस तरह रिकॉर्ड करके तुमने अच्छा नहीं किया तुम यह सब अपने माँ और पिताजी को यह सब नहीं सुनना. मैंने कहा कि मुझे तो सिर्फ तुझसे मतलब है. मैं यह सब अपने माँ और पिताजी को नहीं सुनाउंगा. इस पर मेरी पत्नी बोली कि अभी सारी रिकॉर्डिंग डिलीट कर दो, चूँकि सारी रेकॉर्डिंग्स मैं अपने लैपटॉप मैं भी सेव कर चुका था इसलिए पत्नी का दिल रखने के लिए मैंने फोन से सारी रेकॉर्डिंग्स डिलीट कर दी. मैंने सोचा अब मेरे खिलाफ कोई साज़िश नहीं होगी फिर धीरे-धीरे वक्त गुज़रता गया कुछ वक्त बाद हमारी एक बेटी भी हुई. मैंने सोचा कि चलो अब सब कुछ ठीक हो जायेगा. मगर मुझे क्या पता था कि मेरी पत्नी के दिमाग में और मेरे ससुराल पक्ष वालों के दिमाग में कुछ और ही चल रहा है. इसी वर्ष 24 मई 2011 को अचानक ही मेरी पत्नी किसी को बिना बताये अपनी बेटी को छोडकर लापता हो गई. तुरंत ही मैंने अपने ससुर जी एवं सास को फोन किया तब मुझे पता चला कि मेरी पत्नी पानीपत में अपने पिताजी के पास आ रही है. जब मैंने पूछा कि आखिर बात क्या हुई है इस पर मेरी सास बोली कि मेरी बेटी को उसके सास ससुर ने तीन दिनों से खाना नहीं दिया है. जिसके कारण उसे यह कदम उठाना पड़ा.
जारी…
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