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सुख-दुख...

मुझे मेरी बीबी से बचाओ (तीन)

 महोदया सब कुछ भूलकर भी मैंने दिनांक २/१२/२०११ को रात ८ बजकर १० मिनट के लगभग अपने ससुर जी को फोन किया. और मैंने कहा कि आप की क्या राय है. इस पर वह बोले कि मैं तो यही चाहता हूँ कि तुम्हारा घर बस जाये. इस पर मैंने कहा कि अगर आप यही चाहते हों तो आप देल्ही आ जाओ हम लोग बैठ कर बातें कर लेते हैं.

 महोदया सब कुछ भूलकर भी मैंने दिनांक २/१२/२०११ को रात ८ बजकर १० मिनट के लगभग अपने ससुर जी को फोन किया. और मैंने कहा कि आप की क्या राय है. इस पर वह बोले कि मैं तो यही चाहता हूँ कि तुम्हारा घर बस जाये. इस पर मैंने कहा कि अगर आप यही चाहते हों तो आप देल्ही आ जाओ हम लोग बैठ कर बातें कर लेते हैं.

इस पर मेरे ससुर जी ने कहा जो भी बात होगी ९ तारीख को ही होगी. मैं कहीं नहीं आऊंगा. इस पर मैंने कहा कि मेरी पत्नी से मेरी बात कराओ. और जब मैंने अपनी पत्नी को पूछा कि तुम क्या चाहती है तो मेरी पत्नी ने कहा कि मैं तो साथ में रहना चाहती हूँ. मगर जब मैंने कहा गया कि पहले यह बताओ कि तुम घर से भागी क्यूँ थी तो मेरी पत्नी के द्वारा कोई स्पष्ट जबाब नहीं दिया गया. जब मैंने यह पूछा कि अब आगे तुम किस तरह रहोगी तो इस पर भी मेरी पत्नी ने कोई भी स्पष्ट जबाब नहीं दिया. इस बातचीत के दौरान मेरी पत्नी ने कहा कि अगर पहले ही दिन हम तुम पर केस कर देते तो बात ही कुछ और हो जाती, जिससे साफ़ पता चलता है कि मेरी पत्नी और उसके घरवालों की नीयत अभी भी साफ़ नहीं है. वह समझौते की बात खाली दिखावे के लिए कर रहे हैं. उनका मकसद कुछ और ही है.

महोदया शादी एक बहुत ही पवित्र बंधन है. इसमें सिर्फ पति और पत्नी का मिलन ही नहीं होता बल्कि दो परिवार भी मिलकर एक हो जाते हैं. मगर मेरे साथ ऐसा हुआ ही नहीं मेरे ससुराल पक्ष वाले ही मेरी पत्नी के साथ मिलकर मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ साज़िश रचने लगे. जब वह साज़िश में कामयाब नहीं हो पाए तो मुझे दहेज के केस में फंसाकर मेरे पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकियाँ देने लगे. और अब जब उनकी पूरी सच्चाई सामने आ चुकी, तो वह सब के सामने तो यही कहते हैं कि हम सब कुछ कबूल करके किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहते हैं. मगर अकले में उनका व्यवहार बिलकुल ही बदल जाता है. जिसका पहला सबूत यह है कि मेरी पत्नी के परिवार द्वारा मुझ पर ड्रग्स लेने और नशे की गोलियाँ खाने के आरोप आपके सामने ही लगाये गए. जो कि बिलकुल ही झूठ है. अगर आप चाहे तो इस बात की पुष्टि कहीं से भी कर सकती है. और चाहे तो मैं किसी भी डाक्टर्स द्वारा अपना मेडिकल चेक अप करवाने के लिए भी तैयार हूँ. मैं तो यहाँ तक कहता हूँ कि अगर किसी भी डॉक्टरी जांच में यह साबित हो जाये कि मैं ड्रग्स या नशे की गोलियाँ खाता हूँ तो मैं भगवान को साक्षी मानकर बचन देता हूँ कि मैं बिना शर्त अपनी पत्नी को वापस लेकर चला जाऊँगा. इससे बड़ी बात मैं नहीं कह सकता.

महोदया होना तो यह चाहिए था कि यह लोग अपनी गलती मान लेते. इससे तो यही साबित होता है कि यह अभी भी झूठ बोलने से नहीं हिचकिचा रहे हैं. दूसरा सबूत यह है कि मेरी पत्नी ने खुद कहा कि अगर पहले दिन ही केस कर देते तो बात ही दूसरी हो जाती. इससे साफ़ पता चलता है कि उन्हें अपनी गलतियों का कोई भी पछतावा नहीं है. उल्टा वह अफ़सोस मना रहे है कि हमने केस क्यूँ नहीं किया. और बात दूसरी ही हो जाती का क्‍या मतलब हुआ, इसके तो यही मतलब है कि दहेज का केस करने के पीछे भी इनका कोई छुपा हुआ मकसद है. यह सीधे-सीधे ब्लैकमेलिंग है. यानी कि यह दहेज का केस भी किसी मकसद से करना चाहते हैं.

कुल मिलकर इस बात का मतलब तो यही है कि अभी तक यह लोग यही मान रहे हैं कि इन्हें मुझ पर केस ना करके बहुत ही बड़ी गलती कर दी है. साथ ही इस बात को साफ़ धमकी भी माना जा सकता है, इससे यह भी पता चलता है कि अभी तो मामला सुलझा भी नहीं और मेरी पत्नी ने फिर से धमकी देनी शुरू कर दी है. इससे मेरे अंदर यह भी डर पैदा हो गया है कि मेरी पत्नी अपनी हार इतनी जल्दी नहीं मानेगी. और जैसा उसका स्वभाव है वह जरूर कुछ ना कुछ करेगी. इसलिए मुझे शक ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि मेरी पत्नी भी जरूर कुछ ना कुछ गलत काम करेगी. वह निश्चय ही अपने माँ और पिताजी के साथ मिलकर कोई ऐसा ड्रामा जरूर करेगी, जिसमें हम लोग बुरी तरह फँस सकते हैं. इसलिए इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने और अपने परिवार की भलाई को देखते हुए फैसला किया है कि अभी तक मेरी पत्नी को और मेरे सास-ससुर को अपनी गलतियों का कोई भी अहसास नहीं हो पाया है, इसलिए अभी मैं अपनी पत्नी को अपने साथ नहीं ले जा पाउँगा. जिसका का मुझे बहुत ही दुख है. मगर मैं कुछ वक्त तक इंतज़ार करूँगा. शायद मेरी पत्नी और मेरे ससुराल वालों को अपनी गलतियों का अहसास हो और वह सचमुच बदल जाए. अगर ऐसा होता है तो यकीन मानिये सबसे ज्यादा खुशी मुझे ही होगी. क्यूंकि मुझे तो पिछले चार सालों से इसी दिन का इंतज़ार है.

महोदया अगर इस सारी जांच पड़ताल के बाद भी अगर कहीं से भी यह साबित हो जाय कि हमने कहीं पर भी कानून का उल्‍लंघन किया है या अपनी पत्नी के साथ कोई ऐसा काम किया है जो गैर कानूनी हो व जिससे मेरी पत्नी को कोई मानसिक शारीरिक या और किसी भी तरह की परेशानी हुयी हो तो मैं भगवान को साक्षी मानकर बचन देता हूँ कि मैं बिना शर्त अपनी पत्नी के पैरों मैं गिरकर उसे अपने साथ ले जाऊँगा.

नोट- मैंने कहा है कि मेरे पास कुछ रिकॉर्डिंग्स भी है. उनका विवरण इस प्रकार है

१- दो वर्ष पहले जब मेरी पत्नी को मेरी सास अपने साथ पानीपत लेकर चली गई थी तो उसके बाद मेरी अपनी पत्नी, अपनी सास, अपने ससुर जी, अपनी दोनों सालियों और पत्नी के  जीजाजी व उसकी उसकी दीदी से जो जो बातें हुई सब का रिकॉर्ड मेरे पास है. जिनको सुनकर साफ़ पता लगता है कि मेरी पत्नी और मेरे ससुराल वालों का व्यव्हार कैसा था. और किस तरह वह किसी भी कीमत पर अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहते थे. साथ ही यह भी पता चलता है कि मेरी पत्नी किस हद तक झूठ बोलती है और मेरी पत्नी के घरवाले किस हद तक उसका साथ दे रहे थे.

२- इस साल जब २४ मई २०११ को मेरी पत्नी मेरे घर से भागकर गई थी उसके बाद मैंने जो भी बात अपनी पत्नी सास और ससुर जी से कि थी सब मेरे पास रेकॉर्डेड है, जिससे साफ़ पता चलता है कि मेरी पत्नी और ससुराल वाले किस हद तक झूठ बोलते हैं.

३- जब हम समझौते के लिए देविखाल मैं बैठे थे उस वक्त क्या क्या बातें हुई थी, किसने क्या क्या कहा था वह भी मेरे पास रेकॉर्डेड है.

४- दो वर्ष पूर्व जब हम शामली मैं समझौते के लिए बैठे थे तो हमारी क्या-क्या बात हुई वह सब मेरे पास रिकार्डेड है.

इतने वक्त तक सारी रेकॉर्डिंग्स को संभाल कर रखने के पीछे दो वजह थी. पहली मुझे हर वक्त यह डर रहता था कि कभी भी मेरी पत्नी और मेरे ससुराल वाले कोई भी साज़िश रच सकते हैं. दूसरी वज़ह यह थी कि सारी रेकॉर्डिंग्स मेरे लैपटॉप पर मेरी मेल आईडी पर भी सेव थी. अगर वह फोन पर सेव होती तो कभी की डिलीट हो जाती. सारी रेकॉर्डिंग्स इस वज़ह से संभाल कर रखी गई थी, अगर कभी मेरे ससुर मुझ पर कोई केस कर दें तो अपने बचाव में उनको दिखा सकूं. क्यूंकि मुझे अपने ससुराल पक्ष पर इतनी सारी साजिशें रचने के कारण एक प्रतिशत का भी यकीन नहीं था कि वह ऐसी हरकतें दुबारा नहीं करेंगे. अब मैं कह सकता हूँ कि मेरी आशंका सही थी वरना दो साल पहले क्या क्या हुआ था कौन साबित कर सकता था.

महोदया इस विषय मैं आगे अगर किसी भी तरह की जांच पड़ताल होती है और अगर उसमे आपको मेरी किसी भी तरह की जरूरत महसूस होती है तो मैं आपके सम्मुख हाज़िर हो जाऊंगा

नोट – इस मामले की याने की धमकी देने की शिकायत मैं देल्ही पुलिस और उत्तराखंड पुलिस से भी कर चुका हूँ.

मेरी यह कहानी भारत की नंबर 1 मीडिया वेबसाइट bhadas4media.com पर भी प्रकाशित हो चुकी है, जिसका शीर्षक है- धमका रही है पत्नी झुको वरना दहेज के केस मैं अंदर कर दूँगी.

पत्नी के इस तरह घर से भागने की शिकायत मैं  s.p. panipat. s.p pauri garhwal व  commissioner uttrakhand को फैक्स के माध्यम के द्वारा २४ मई २०११ को ही कर चुका हूँ. साथ ही जब मुझे यह पता चला कि मेरी पत्नी पानीपत जा रही है. और क्यूंकि मेरे घर से पानीपत ८ या ९ घंटे का रास्ता है और रास्ते में कोई भी हादसा हो सकता था इसलिए मैंने तुरंत दिनांक २४ मई २०११ को एक मेल एसपी. पानीपत को भी भेज दी थी, जिस पर पानीपत पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की मुझे कोई जानकारी नहीं है. मगर उत्तराखड पुलिस द्वारा इस मामले की छानबीन की गई थी. उत्तराखंड पुलिस ने लड़की के घर वालों से भी पूछताछ की थी. जिस पर लड़की ने खाली यह कहा है कि मुझे मारा पीटा गया. सारी छानबीन के बाद उत्तराखंड पुलिस ने लड़की के सारे आरोपों को फर्जी बताया है. और इस मामले में हमें बेगुनाह बताया है’ इसकी कॉपी मेरे पास मौजूद है.

जब मैंने यह साबित कर दिया था कि मेरी पत्नी के घरवाले सारी साज़िश में बराबर रूप से शामिल हैं और लड़की सोच समझकर ड्रामा कर रही है, उसके ६ महीने बाद मेरी माँ ने उसके नाम से ४५००० रुपये के किसान विकास पत्र ख़रीदे थे. जब मैंने अपनी माँ से कहा कि तुमने ऐसा क्यूँ किया, क्यूंकि मेरी पत्नी कभी भी कोई भी आरोप लगाकर भाग सकती है तो मेरी माँ ने कहा ऐसा अब नहीं होगा अब उसकी लड़की हो चुकी है और जानवर भी अपनी औलाद को छोड़कर नहीं जाता है इसलिए वह अब कुछ नहीं करेगी.

 मेरी शादी के १ महीने बाद ही मेरी माँ ने मेरी पत्नी के नाम से हर महीने ५०० रुपये बैंक मैं जमा करने शुरू कर दिये थे. इतना ही पैसा मेरी माँ मेरे भाई की पत्नी के नाम से भी जमा करती है जबकि मेरे व मेरे भाई के नाम से कोई भी पैसा जमा नहीं किया गया. क्या यह सब यह नहीं बताता कि हम बहू को बेटी का प्यार देते हैं, वरना कितने माँ बाप हैं जो लड़कों के बजाय बहुओं के नाम से बैंक मैं पैसा जमा करते हैं. अभी मेरी पत्नी के नाम से बैंक में २५ हज़ार रुपये व भाई की पत्नी के नाम से ६० हज़ार रुपये जमा हो चुके हैं.( उसकी शादी पहले हो चुकी थी इसलिए उसके नाम से ज्यादा पैसे जमा हैं). यहाँ तक कि जब मैंने अप्रैल २०११ में एक फ़्लैट लिया तो मुझे २.५ लाख रुपया इधर उधर से उधार लेना पड़ा, मगर मेरी माँ ने कहा कि मैं अपनी बहुओं के नाम से जमा पैसा नहीं निकालूंगी. (समाप्‍त)

प्रकाश चंद कुकरेती

इस बारे में जानने के लिए इस लिंकों पर भी क्लिक कर सकते हैं : धमका रही है पत्नी- झुको वरना सबको दहेज में अंदर करा दूंगी!

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