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सुख-दुख...

मुझे मेरी बीबी से बचाओ (दो)

महोदया जैसा कि स्पष्ट हो चुका है है कि मेरी पत्नी मेरे माता पिता के पास से २४ मई २०११ को बिना बताये अपने पिता के घर पानीपत चली गई थी. और बाद में मेरी सास के द्वारा मुझे पता चला कि मेरी पत्नी को मेरी माँ ने तीन दिन से खाना नहीं दिया है. जब मैंने बताया कि यह सब झूठ है क्यूंकि २३ मई २०११ (यानि कि मेरी पत्नी के घर छोड़कर जाने से एक दिन पहले तक) तो मैं अपने माता पिता के साथ घर में ही था.

महोदया जैसा कि स्पष्ट हो चुका है है कि मेरी पत्नी मेरे माता पिता के पास से २४ मई २०११ को बिना बताये अपने पिता के घर पानीपत चली गई थी. और बाद में मेरी सास के द्वारा मुझे पता चला कि मेरी पत्नी को मेरी माँ ने तीन दिन से खाना नहीं दिया है. जब मैंने बताया कि यह सब झूठ है क्यूंकि २३ मई २०११ (यानि कि मेरी पत्नी के घर छोड़कर जाने से एक दिन पहले तक) तो मैं अपने माता पिता के साथ घर में ही था.

मेरी पत्नी अपने आरोपों से एकदम पलट गई. फिर मेरी पत्नी ने कहा कि मुझे मेरी सास ने घर से धक्के देकर निकाल दिया. साथ ही सब कमरों में ताला भी लगा दिया. और मेरी मेरी बेटी भी मुझसे छीन ली. तो मैंने कहा कि अगर ऐसी बात है तो फिर मेरी पत्नी के पास पैसे और मोबाइल फोन कहाँ से आया. क्यूंकि मेरी माँ तुम्हे पैसे और मोबाइल फोन देकर तो घर से नहीं निकलेगी (क्यूंकि मुझे पता था कि मेरी पत्नी के पास १० हज़ार रुपये थे. मेरी पत्नी ने १० हज़ार की बात तो नहीं मानी मगर ५००० रुपये सबके सामने अपने पास होना कबूल किया था और आपके सामने भी २००० रुपये होना कबूल किया था) यह सुनकर मेरी पत्नी इस आरोप से भी पलट गई. फिर मेरी पत्नी ने आरोप लगाया कि मुझे मारा गया. जिससे डरकर मैं अपने माता-पिता के पास चली गई. इस पर जब मैंने कहा कि अगर ऐसी ही बात थी तो तुम ने गांव में किसी की मदद क्यूँ नहीं ली. बगल में मेरी दादी रहती है उसके पास क्यूँ नहीं गई और सबसे बड़ी बात जब तुम्हारे पास फोन भी था तो मुझे फोन करके क्यूँ नहीं बताया गया.

और पानीपत जाने के बजाय तुम देल्ही मेरे पास क्यूँ नहीं आई. तो मेरी पत्नी मारपीट के आरोप से भी मुकर गई. (हालाँकि पिछली सुनवाई पर मेरी पत्नी ने आपके सामने कहा कि मुझे मेरी सास ने जलती लकड़ी से मारा. और जब आपने पूछा कि बताओ तुम कहाँ पर जली हो तो मेरी पत्नी ने कहा कि लकड़ी का जलता हिस्सा मेरी सास ने अपने हाथ मैं रखा और मुझे दूसरी तरफ से मारा. जिस पर मुझे हंसी भी आ गई थी. और इस तरह हंसने पर आपने मुझे ड़ाटा भी था. क्यूंकि यह तो एकदम ही सफेद झूठ ही हुआ). कुल मिलकर स्पष्ट है कि मेरी पत्नी बिना वज़ह घर से भागी थी और अगर मैं स्पष्ट कहूँ तो यही लगता है कि मेरी पत्नी एक साज़िश के तहत या किसी और ही वज़ह से घर से भागी थी यह बात जब मेरी पत्नी के घरवालों यानी मेरे ससुराल पक्ष की समझ में आई और उन्हें लगा कि हम किसी भी तरह यह साबित नहीं कर सकते की उनकी कोई जुल्म या अत्याचार हुआ है, और इसलिए मेरी पत्नी घर से भागी तो यह चुपचाप बैठ गए. हमारे द्वारा कई बार फोन करने के बाद यह लोग बड़ी मुशकिल से मिलने के लिए तैयार हुए.

११ नवम्बर को मेरे ससुर जी ने फोन किया कि हम लोग १२ नवम्बर २०११ को आ रहे हैं, मगर इस शर्त पर कि तुम्हारे घर पर नहीं बैठेंगे, हम लोग गुमखाल में, जो कि मेरे घर से ४० किलोमीटर दूर है वहां पर किसी चाय की दुकान में बैठेंगे. इस पर हमने कहा कि इस तरह के मामले कोई चाय की दुकान मैं बैठकर थोड़े ही सुलझाए जाते हैं, आप हमारे घर पर आओ. इस पर मेरे ससुर जी ने कहा कि मैं तो नहीं आ रहा हूँ और अब मैं पानीपत जाकर सीधा केस करूँगा. इस पर हमने कुछ नहीं कहा. फिर मेरे ससुर जी ने ११ नवम्बर को फोन किया और कहा कि हम लोग कल आ रहे है मगर हम तुम्हारे घर नहीं आयेंगे और देविखाल, जो कि मेरे घर से मात्र ५ या ७ मिनट दूर है वहां पर बैठेंगे जब हम इसके लिए भी तैयार हो गए तो इन्हों ने मिलने से मना कर दिया और धमकी दी कि चुपचाप आकर अपनी बहू ले जाओ वरना मैं दहेज का केस कर दूँगा. (जिस की शिकायत डर के मारे मैंने तत्काल एसपी साहब पानीपत को मेल के माध्यम से कर दी थी) बाद में मेरे ससुर जी ने कहा कि हम देविखाल में ही मिलेंगे.

खैर जब हम लोग समझौते के लिए १३ नवम्बर २०११ को आपस मैं बैठे तो मेरी पत्नी द्वारा मेरे माँ पिताजी पर कोई आरोप नहीं नहीं लगाया गया. मगर जब हमने यह पूछा कि पहले यह बताओ कि तुम भागी क्यूँ थी तो इस पर मेरी पत्नी चुप रही. बाकी लोग बोले कि तुम्हारी पत्नी नादान है, नासमझ है जिससे कारण उससे गलती हो गई है. इस पर मैंने कहा कि अगर आप लोग मानते हो कि आपकी लड़की से गलती हो गई है तो फिर आप लोग हमारे बुलाने पर भी मेरी पत्नी को लेकर ६ महीने तक क्यूँ नहीं आये. इस पर साथ में आये लोग बोले कि मेरे ससुर जी भी से भी गलती हो गई है. मगर जब हमने कहा कि यह गलती कोई पहली बार थोड़े ही हो रही है. यह तो बार बार हो रहा है. फिर इसका उपाय क्या है. और गलती की बात आप कह रहे हो मेरी पत्नी और मेरे ससुर जी तो कुछ कह ही नहीं रहे है. इस पर वह लोग भी चुप हो गए. तब हमने कहा कि अब कि बार हम लिखित में सब कुछ लेंगे. जिस पर कुछ लोग तो तैयार हो गए मगर मेरे ससुर जी ने लिखकर देने से साफ़ मना कर दिया. तब मेरी पत्नी के एक चाचाजी जो कह रहे थे कि मैं पुलिस में हूँ और मुझे पता है कि अगर मेरे भाई यानी कि मेरे ससुर जी ने तुम पर दहेज का केस कर दिया तो क्या क्या होगा शायद तुम्हे मालूम ही नहीं है. इसलिए अपना भला बुरा सोच लो मैं तो यही बता सकता हूँ कि तुम्हारा साथ क्या क्या होगा (जिससे डरकर मैंने इस तरह धमकाने की शिकायत वापस आकार  देल्ही पुलिस में भी कर दी थी), मगर हम ने यही कहा कि इस बार जो भी समझौता होगा वह लिखित में होगा. इसके लिए मेरी मेरे ससुर जी बिलकुल भी तैयार नहीं हुए और धमकाते हुए वापस चले गए कि अब तो मैं दहेज का मुकदमा ही करूँगा, इस तरह आप खुद देख सकते हो कि सारा मामला क्या है.

महोदया मेरी पत्नी ने मुझे और मेरे परिवार को शादी के बाद से ही परेशान करना शुरू कर दिया था. मेरी पत्नी की सारी बातें बताना तो शायद सम्वभ भी नहीं होगा मगर मैं कुछ ऐसी बातें बता रहा हूँ जिससे मेरी पत्नीके बर्ताव और क्रूरता का पता चलता है वह बातें इस तरह से हैं-

१- दो साल पहले  भी मेरी पत्नी ने इस तरह के झूठे आरोप लगाये थे. जिस पर मेरी सास उसको देल्ही से पानीपत ले गई थी. लगभग ढाई महीने बाद हम लोगों के बीच बातचीत हो पाई. उस वक्त भी मैंने साबित कर दिया था कि मेरी पत्नी सब कुछ झूठ कह रही है. मगर इस पर मेरे ससुर जी हम सब लोगों को दहेज के केस मैं फंसाकर जेल भिजवाने की धमकियाँ देने लग गए. जिस से डरकर मैं चुपचाप अपनी पत्नी को वापस ले आया और अपनी गलती न होते हुए भी मैंने परिवार की मान मर्यादा और परिवार की शांति के लिए अपनी पत्नी के पैर पकड़कर  कहा था कि वह कोई बवाल न करे और मेरे घर की सुख शांति बरक़रार रहे. मगर इस बात का मेरी पत्नी ने यह सिला दिया कि मुझे मुंह छुपाने के लिए मजबूर होना पड़ा. मेरी पत्नी जब तब यही कहती रही कि मैं तो वापस लौटकर इस लिए आई क्यूंकि लड़के ने पैर पकड़कर मुझे मजबूर किया. वरना मैं तो कभी भी वापस लौटकर नहीं आती. इस बात का प्रचार मेरी पत्नी पूरे गांव में कर चुकी है. जिसकी वज़ह से मुझे बहुत ही मानसिक कष्ट हुआ. और इस बात की मुझे बहुत ही पीड़ा है.  इन सब को भुलाकर अगर मैं बड़ा दिल करके मेरी पत्नीको वापस ले भी जाता हूँ तो मेरी पत्नी दुबारा इस तरह मुझे बदनाम नहीं करेगी इसकी क्या गारन्टी है.

२-एक दिन जब मेरी माँ मेरी बेटी को प्यार कर रही थी तो मेरी पत्नी ने कहा कि तुम इस लड़की को किस हैसियत से प्यार कर रही हो. इस का बाप कौन से तुम्हरा लड़का है. यानी कि इसका बाप तो कोई और ही है. यह सब सुनकर मेरी माँ पर क्या गुजरी होगी आप कल्पना ही कर सकते हो. क्या मेरी माँ मेरी पत्नी को दुबारा वही मान सम्मान दे सकती है.

३- मेरी पत्नी ने मेरे पिताजी पर आरोप लगाया कि उन्हें मैंने रात को अपने कमरे में तांक- झांक करते हुए देखा है. बस यही आरोप नहीं लगाया कि उन्होंने कुछ गलत किया है. क्या मेरे पिताजी इसको भूल सकते हैं.

४- जैसा कि मैं अपने भाई के बारे में बता चुका हूँ कि उसको क्या बीमारी है. बचपन में लगी किसी चोट कि वज़ह से उसके दिमाग कि एक नस बंद हो चुकी है और उस नस के आस पास का हिस्सा सुख चुका है. और शरीर के किसी भी हिस्से में खून नशों के द्वारा पहुचता है. और जैसे कि हम सब जानते हैं कि शरीर को जो हिस्सा ज्यादा काम करता है खून का दौरा उस हिस्से कि तरफ बढ़ जाता है. अगर मैं उदहारण दूं तो अगर सर्दी मैं हमारे हाथ ठन्डे हो जाये और अगर हम दोनों हाथों को आपस में रगड़ ले तो थोड़ी देर बाद हमारे हाथ गरम हो जाते हैं. क्यूंकि खून का प्रवाह हथेली कि तरफ बढ़ जाता है, जिससे हमारे हाथ गरम हो जातें हैं. अगर मैं दूसरा उदहारण रेस लगाने का दूं तो जैसे ही हम रेस लगाते हैं हमारे दिल कि धड़कन बढ़ जाती है, क्यूंकि खून का बहाव दिल की तरह बढ़ जाता है, इसीलिए डाक्टर्स हृदय रोगियों को भाग दौड़ से मना करते हैं क्यूंकि उनके दिल तक जाने वाली नशें पहले ही बंद हो जाती हैं. इसी तरह अगर मेरे भाई को तनाव हो जाये, तो सब जानते हैं कि आदमी दिमाग से ही सोचता है और तनाव का असर सीधे दिमाग पर पड़ता है. अब अगर दिमाग पर जोर पड़ेगा तो खून का दौरा दिमाग कि तरफ ज्यादा होगा. मगर उसके दिमाग की नस तो पहले से ही बंद है इसलिए खून उसके दिमाग तक पहुंच नहीं पायेगा और उसे अटैक आ जायेगा. इसलिए हम उसे कोई भी ऐसी बात नहीं बताते हैं जिससे उसे तनाव हो जाये. डाक्टर्स ने तनाव उसके लिए जहर बताया है. मगर यह सब जानते हुए भी मेरी पत्नी ने और मेरे ससुराल वाले ने हमेशा ही  देल्ही में छोटी सी बातों पर हमेशा ही तनाव पैदा करने की कोशिश की. बार-बार भाई की बीमारी के बारे में बताने के वाबजूद भी यह सब लोग साजिश रचकर मेरे घर मैं तनाव पैदा करते रहे. ताकि अपने भाई की खातिर ही सही मैं अपने भाई से अलग हो जाऊ. इन्होंने सीधे मेरे भाई को फोन करके दहेज का केस करने की धमकी देनी शुरू कर दी. जिससे कारण उसको अटैक आ गया. फिर मेरे ससुर मेरे भाई को धमका ना सके डरकर मुझे मेरे भाई का फोन नंबर ही बदलना पड़ा, अगर यह सब कुछ भुलाकर मैं अपनी पत्नी को दुबारा वापस ले जाता हूँ तो इस बात की कम से कम मुझे कोई उम्मीद नहीं है कि मेरी पत्नी सुधर जायेगी. मुझे पूरी उम्मीद है कि जैसा मेरी पत्नी अभी तक छोटी छोटी बातों पर आसमान सर पर उठा लेती है. तलाक लेने. भाग जाने और ज़हर खाने की जैसी धमकी वक्त वे वक्त देती है, वैसा दुबारा नहीं करेगी. यह सारी हरकतें दुबारा करेगी और अगर इसकी इन हरकतों से मेरे घर में तनाव पैदा होता है और मेरे भाई को कुछ हो जाता है तो मेरे भाई के बाल बच्चों को कौन देखेगा.

५- मेरी पत्नी खुद शादी से पहले अपने मायके में दो बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी है. अगर मेरे घर में ऐसा कोई हादसा हो जाता है तो कौन जिम्मेदार होगा. मेरे ससुर जी मुझ पर हमेशा ही दहेज का केस करने के लिए तैयार रहते हैं. वह पिछले तीन सालों से मुझे पूरे परिवार सहित जेल भेजने की धमकियाँ दे रहे हैं. ऐसे में अगर मैं मेरी पत्नी को वापस घर ले जाता हूँ और मेरी पत्नी कोई गलत कदम उठा लेती है तो फिर तो मेरे ससुर मुझ पर मर्डर का आरोप लगाकर मेरी पूरी जिंदगी ही खराब कर देंगे. अगर ऐसा होता है तो कौन जिम्मेदार होगा. और जिस तरह मेरी पत्नी भागकर इधर-उधर चली जाती है, उससे मेरी पत्नी के साथ कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो उसकी जबाबदारी कौन लेगा. क्या मुझे इतनी बड़ी मुसीबत मोल लेनी चाहिए.

६- जैसे मैं पहले ही बता चुका हूँ कि इसी वर्ष जुलाई में मेरे दादाजी का देहांत हुआ. घर में किसी के देहांत होने पर गम होता ही है. ऐसे वक्त पर तो दुश्मन भी घर सांत्वना देने आता है. मेरे पिताजी ने मेरे ससुर जी को फोन भी किया और कहा भी कि इस वक्त घर में गम का माहौल है आप मेरी बहु को हमारे पास लेकर आ जाओ. आप से कोई पूछताछ भी नहीं होगी मगर कोई नहीं आया, इससे तो यही पता चलता है कि मेरे ससुराल पक्ष को मुझ से और मेरे घर वालों से कितनी हमदर्दी है. जब इनका ऐसे दुःख के वक्त इस तरह का हाल था तो फिर मेरी पत्नी और मेरे ससुराल वालों से किस तरह कोई उम्मीद रखी जा सकती है.

७- महोदया जैसा कि मैं बता ही चुका हूँ कि इसी वर्ष १४ अप्रैल २०११ को मैं अपने फ्लैट मैं शिफ्ट हुआ था. उस वक्त भी मेरी पत्नी मेरे माता और पिताजी के साथ ही थी. उस वक्त मेरे दादाजी जीवित थे, उनकी उम्र उस वक्त ९८ वर्ष थी. अतः स्पष्ट है कि एक आदमी २४ घंटे उनके पास होता था. चूँकि मेरी बेटी ऊपर का दूध ही पीती थी और गाँव में दूध पैसा देकर भी नहीं मिलता है, तो मेरी माँ एक भैंस १५००० रुपये में खरीदकर लाई थी. क्यूंकि हमारे पास एक भैंस पहले से ही थी इस तरह हमारे पास दो भैसें हो गई थी. मगर यह सब जानते हुए भी मैंने कहा कि १४ अप्रैल को गृह प्रवेश के वक्त मेरी पत्नी भी पूजा में मेरे साथ होनी चाहिए. इस पर मेरे पिताजी मेरी पत्नी को लेकर देल्ही आये. मेरी माँ ने दो भैसों और मेरे दादाजी की देखभाल अकेले की. गृह प्रवेश पर मैंने अपने ससुर जी को भी बुलाया था और वह आये भी थे. हालाँकि यह सब जरूरी भी नहीं था. क्यूंकि गृह प्रवेश एक व्‍यक्तिगत मामला है, मगर इसी वर्ष अक्टूबर में जब मेरे ससुर जी ने अपनी छोटी बेटी यानी कि मेरी साली की शादी की तो हमें कार्ड तो क्या फोन भी नहीं किया गया. क्या यह हरकत यह नहीं बताती कि उनकी नज़रों में हमारी क्या औकात है.

८- जिस वक्त  मेरी पत्नी मेरे साथ देल्ही मैं थी उसी वक्त मेरे भांजे का जन्मदिन आया. मेरी बहिन द्वारा हम सब लोगों को रात को खाने पर बुलाया गया. दिन में जब मेरी बहिन मेरी पत्नी को यह सब बताने गई तो मेरी पत्नी ने तब तो हाँ कहा, मगर जब शाम को मेरी बहिन दुबारा आई तो मेरी पत्नी ने पेटदर्द का बहाना बना दिया और आने से मना कर दिया. मेरी बहिन तीन बार आई मगर मेरी पत्नी फिर भी मेरी बहिन के घर नहीं गई. रात को जब मैं ड्यूटी से वापस आया तो पता चला कि मेरी पत्नी ने घर में खाना भी नहीं बनाया है. मैं क्या करता अगर मेरी पत्नी को कुछ कहता तो वह आसमान सर पर उठा लेती. जैसा हर बार होता था मैं चुपचाप ही रहा. क्यूंकि कुछ कहता तो पत्नी भागकर पता नहीं कहाँ चली जाती.

यह तो चंद बातें है. जो मेरी पत्नी इतना सब कुछ कर सकती है उसने और क्या क्या किया होगा हमें ही पता है. छोटी सी बात पर चूड़ी मंगलसूत्र और बिंदी निकालकर विधवा औरत का भेष बना लेती है. यहाँ तक की नाक की लौंग भी निकाल लेती है, जबकि हमारे यहाँ रिवाज़ है कि विधवा औरत भी अपनी नाक से लौंग भी नहीं उतारती है. महिला तभी अपनी लौंग उतारती है जब उसके आगे पीछे कोई भी ना हो, यही नहीं घर मैं कोई मेहमान या गाँव का व्यक्ति आ जाये तो खुद को कमरे में बंद कर लेती है. मिलजुलकर रहना तो शायद इसने कभी सीखा ही नहीं है. इसके अलावा सास-ससुर से जुबान लड़ाना. बेबजह घर से गायब रहना छोटी छोटी बातों पर भी गुस्से में अपनी एक साल की लड़की को पीटना, कई बातें है क्या क्या बताऊँ.

जारी… 

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