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सुख-दुख...

मुझे लगता था कि इस तेवर के कारण भड़ास ज्यादा दिन नहीं चलेगा

सर्वप्रथम बड़े भाई यशवंत जी के मिशन और भड़ास4मीडिया के चार साल पूरे होने पर ढेर सारी बधाई. आज के चार साल पहले जब भड़ास इन्टरनेट के रास्ते हम तक पहुंचा था तो उसके तेवर कलेवर को देखने के बाद तो लगता ही नहीं था कि ये दो चार महीने भी चल पायेगा. क्योंकि तहलका का हश्र मैंने देखा था कि एक खबर ने तरुण जी को किस हालत में पहुंचा दिया था. जबकि भड़ास तो सैकड़ों तहलका को भी मात देने वाला था, तो इसका क्या होगा. मन में एक अजीब सी दहशत थी कि क्या होगा, चलेगा भी या नहीं. जिस तरह दिन प्रतिदिन सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ भड़ास बिना किसी की परवाह किये पंगे ले रहा था, बड़ा ही रोमांचक लगता था.

सर्वप्रथम बड़े भाई यशवंत जी के मिशन और भड़ास4मीडिया के चार साल पूरे होने पर ढेर सारी बधाई. आज के चार साल पहले जब भड़ास इन्टरनेट के रास्ते हम तक पहुंचा था तो उसके तेवर कलेवर को देखने के बाद तो लगता ही नहीं था कि ये दो चार महीने भी चल पायेगा. क्योंकि तहलका का हश्र मैंने देखा था कि एक खबर ने तरुण जी को किस हालत में पहुंचा दिया था. जबकि भड़ास तो सैकड़ों तहलका को भी मात देने वाला था, तो इसका क्या होगा. मन में एक अजीब सी दहशत थी कि क्या होगा, चलेगा भी या नहीं. जिस तरह दिन प्रतिदिन सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ भड़ास बिना किसी की परवाह किये पंगे ले रहा था, बड़ा ही रोमांचक लगता था.

हर रोज़ यही सोचता कि जिस बहादुरी के साथ भाई यशवंत इसे चला रहे हैं, क्या होगा उनका, आज तो बंद ही हो जायेगा. अगली सुबह होती तो फिर कोई आक्रमण हो जाता, भाई फिर मुस्कुराता हुआ दिखता. बस आत्मा को बड़ी अजीब सी शांति मिलती कि नहीं, मैं ही गलत सोच रहा था, भाई को मात दे पाना आसान नहीं है. भड़ास बढ़ता ही रहा. लोग जुड़ते चले गये और आज भड़ास एक बीज से बड़ा बरगद सा हो गया, वो भी महज चार सालों में. तो निश्चित रूप से इसके पीछे यशवंत भाई का अदम्य साहस, निर्भीकता, सच को सच कहने का ज़ज्बा ही था, वो मानें या न मानें, लेकिन आज भड़ास को जानने वाले जरूर मानते हैं.

अख़बार चैनलों की आड़ में पत्रकारों का शोषण हो रहा और दूसरों के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले पत्रकार खुद ही उसका दंश झेल रहे. उनके आवाज़ उठाने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था. भड़ास ने उन्हें ऐसी स्थिति में एक बड़ा मंच दिया जहां वो अपना दुःख दर्द लोगों से सिर्फ बाँट ही नहीं सकते बल्कि पूंजी व पहुंच के मद में चूर हो चुके अपने कथित मालिकों तक अपनी आवाज़ पहुंचा सकते हैं. अपनी बात ख़त्म करने से पहले फिर एक बार बड़े भाई यशवंत जी के ज़ज्बे को सलाम. भड़ास व उससे जुड़े सभी सहयोगियों मित्रों शुभचिंतकों को भड़ास की चौथी वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई. जय हिंद.

कुंवर समीर शाही

पत्रकार
अयोध्या फैजाबाद
09795503555

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