नई दिल्ली : हरियाणा में रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन के लेन-देन की जांच बिठाने और एक डील रद्द करने वाले 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अफसर डॉ. अशोक खेमका की छवि एक ईमानदार अधिकारी की है। उन्हें पहले भी ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ी है। वह गुड़गांव में हजारों करोड़ रुपये की जमीन को बिल्डरों के नाम किए जाने का घोटाला उजागर कर चुके हैं और जल्दी-जल्दी तबादले की उन्हें आदत पड़ चुकी है।
डा. अशोक खेमका का कहना है कि उनका तबादला कुछ सरकारी अफसरों और बिल्डरों की साठगांठ के खिलाफ कार्रवाई करने पर किया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा कि मैंने आरोपी ऑफिसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन आरोपियों ने मेरा ही तबादला करा दिया। उन्होंने यह भी लिखा है, 'मुझे धमकी दी जा रही है कि अपमानित करने के लिए हर महीने मेरा तबादला किया जाएगा।' एक न्यूज चैनल से बातचीत में भी खेमका ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, ' या तो मैं अपनी ड्यूटी
निभाऊं या फिर किसी से बना कर चलूं। सभी सरकारें एक जैसी हैं। पिछले 21 सालों में मेरा 40 बार तबादला हो चुका है।'
उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में लैंड डील पर अपने द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट पर कहा कि जिस अधिकारी ने म्यूटेशन को स्वीकृति थी वह इसके लिए अनाधिकृत था। म्यूटेशन को स्वीकृति देना उसके अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह ठीक नहीं कि मैं अपने सिद्धांतों को एक तरफ रखकर काम करूं। मेरे लिए संभव है कि या तो मैं कर्तव्य का पालन करूं या सबसे बना कर चलूं? 40 बार ट्रांसफर होने पर कई तरह की बातें होती हैं जिससे जलालत और मानहानि झेलनी पड़ती है। नौकरशाहों को सिर्फ काम करने के लिए पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए।'
खेमका तीन महीना पहले ही आईजी रजिस्ट्रेशन बनाए गए थे। वाड्रा-डीएलएफ डील की जांच के अलावा उन्होंने गुड़गांव के 7 गांवों की पंचायती जमीनों को बिल्डरों को ट्रांसफर करने के मामले में गड़बड़ी का भी पर्दाफाश किया था। जमीन की बिक्री के गोरखधंधे में उन्होंने विभाग के ही दो ऑफिसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी सिफारिश की थी।
तबादले पर गहरी नाराजगी जताते हुए खेमका ने कहा कि वह जमीर बेचकर नौकरी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पिछले 21 वर्षो में उनका चालीस बार तबादला किया जा चुका है। उन्होंने आरोप भी लगाया कि सभी सरकारें एक ही तरह की होती हैं। उन्होंने कहा कि इक्कीस वर्षो की सर्विस में उन्होंने पहली बार प्रमुख सचिव को इस तबादले के खिलाफ लिखा है। उन्होंने कहा कि ऐसा उन्होंने तब किया जब पानी सर से ऊपर चला गया है।
अधिकारियों के तबादले के आदेश 11 अक्टूबर को दिए गए थे। इस पर अरविंद केजरीवाल ने ट्विट कर हरियाणा के मुख्यमंत्री से पूछा है कि आखिर उन्होंने खेमका के तबादले का कदम क्यों और किसके कहने पर उठाया। खेमका के तबादले पर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि वाड्रा जिस तर्ज पर भारत को बनाना रिपब्लिक कह रहे हैं वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
खेमका ने इस तबादले पर अपना विरोध दर्ज कराया है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके पास इस आदेश को मानने के अलावा और दूसरा कोई विकल्प नहीं है। खेमका लैंड कंसोलिडेशन एंड लैंड रिकार्ड में डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात थे। 15 अक्टूबर को उन्होंने अपने ऑफिस में अंतिम दिन बिताया।
खेमका ने कहा बड़ी ज़लालत और मानहानि होती है जब आप सही कदम उठाते हैं और आपका ट्रांसफर कर दिया जाता है। सब ऐसा सोचते हैं कि आपने चोरी की है, ये समझा जाता है के ये चोर है, ये नहीं चल सकता, ये बना कर नहीं चलता, इसका ट्रांसफर कर दो। खेमका ने कहा कि मैं इस तरह किसी से बनाकर नहीं चल सकता। मेरा ज़मीर गंवारा नहीं करता। कब तक सहन करूंगा? इसकी भी एक सीमा होती है। अपने खिलाफ रवैये के लिए सिर्फ कांग्रेस ही नहीं सभी सरकारों को दोषी बताते हुए खेमका ने कहा कि सबका एक ही व्यवहार रहा है, बस चेहरे बदल जाते हैं।
मूल खबर पढ़ें- वाड्रा-डीएलएफ डील जांचने और एक डील रद्द करने वाले आईएएस खेमका पर गिरी गाज





