शराब माफिया पोंटी चड्ढा के नए नए किस्से सामने आ रहे हैं. सौ करोड़ से ज्यादा की उसकी तहखाने में पड़ी तिजोरी के बारे में जानकारी मिली है. उसने देश-विदेश में अकूत पैसा इकट्ठा कर रखा है. अगर पोंटी चड्ढा के मीडिया मैनेजमेंट के पक्ष को देखा जाए तो कई कड़वी सच्चाइयां सामने आएंगी. मुरादाबाद का रहने वाला पोंटी चड्ढा मुरादाबाद के अखबारों के संपादकों को डलिया भिजवाया करता है. यह जानकारी मुरादाबाद के एक वरिष्ठ पत्रकार ने भड़ास4मीडिया को दी.
कई संपादकों से करीबी संबंध रखने वाले इस पत्रकार का कहना है कि पोंटी चड्ढा होली-दिवाली के मौके पर संपादक लोगों को डलिया भिजवाता है. डलिया का आशय है स्काच, ह्विस्की, रम आदि की बोतलों के साथ महंगे महंगे गिफ्ट से सजी डाली. इन गिफ्ट के अलावा भी अन्य कई तरीकों से संपादकों को ओबलाइज किया जाता था. इस कारण पोंटी के खिलाफ कभी कोई खबर इन अखबारों में प्रकाशित नहीं होती थी. पूरे पांच साल पूरे यूपी में शराब के पव्वे, अद्धे और बोतलों पर अघोषित मायावती टैक्स पोंटी चड्ढा के लोग वसूला करते थे और कहीं कोई चूं चपड़ तक नहीं होती थी.
किसी अखबार ने अरबों खरबों रुपये की इस अवैध वसूली की खबर को प्रकाशित नहीं किया और न ही किसी चैनल ने स्टिंग किया. पिछले दस पंद्रह दिन से लखनऊ इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार डेली न्यूज एक्टिविस्ट पोंटी चड्ढा के कारनामों का लगातार भंडाफोड़ करता रहा. तब जाकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नींद टूटी.

डीएनए में आज फ्रंट पेज पर पोंटी के यहां छापेमारी की खबर के साथ डीएनए में प्रकाशित हो रही खबरों का भी जिक्र किया गया.
माना यह भी जा रहा है कि चुनाव का मौसम होने और सपा की सरकार बनने की संभावना के कारण भी पोंटी चड्ढा पर गाज गिराई गई है. अगर ऐसा न होता तो माया राज में ही पोंटी पर छापा पड़ जाना चाहिए था.
और नहीं तो कम से कम दारू की बोतलों पर अवैध उगाही बंद करा दिया जाना चाहिए था. लेकिन यह सब कुछ माया राज के नेताओं व अफसरों के संरक्षण में होता था इसलिए किसी ने जानबूझ कर रोका टोका नहीं. कहने वाले कहते हैं कि पोंटी चड्ढा ने अखबार मालिकों और चैनल मालिकों तक से सेटिंग कर रखी थी. सबको इतना पैसा दिया गया था कि किसी ने भी इस शराब माफिया के अवैध कारनामों को लेकर मुंह व कलम सिल रखा था.
पोंटी पर छापे के बाद कई अखबार उसके बारे में खुलासे करते दिख रहे हैं लेकिन काफी पहले आ चुकी सीएजी रिपोर्ट के आधार पर किसी ने शराब माफिया के खिलाफ खबर नहीं छापी. सीएजी की रिपोर्ट में प्रदेश में आबकारी घोटाले और चीनी मिल घोटाले के बारे में विस्तार से बताया गया है. लेकिन अखबार वाले व चैनल वाले सब देख सुनकर भी चुप्पी साधे रहे. अब जबकि अखबार व चैनल मालिकों को लगने लगा है कि यूपी में राजकाज बदलने वाला है और इनकम टैक्स के छापे के बाद पोंटी चड्ढा फंसता नजर आ रहा है तो सबने इस नए मौसम में नया सुर अपना लिया है. धन्य हैं अपने पत्रकार और अपनी मीडिया.






