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लखनऊ

मुरादाबाद में फालोवरों की पिटाई : ना मेडिकल, ना एफआईआर

एसएसपी मुरादाबाद द्वारा तीन फालोवरों को बुरी तरह मारने-पीटने के मामले में आज फालोवर सुंदर ने मुझे फोन करके बताया कि उन तीनों को अब तक ना तो मेडिकल और न एफआइआर नहीं करने दिया जा रहा है. साथ ही उन्हें पुलिस लाइन में लगभग नज़रबंद स्थिति में रखा गया है. यह मानवाधिकार हनन का अत्यंत गंभीर मामला होने के कारण मैंने इस बातचीत से अवगत कराते हुए डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिख कर इन तीनों का तत्काल मेडिकल करा कर एफआइआर दर्ज कराये जाने और इन्हें किसी भी प्रकार की अग्रिम प्रताड़ना से रोके जाने का अनुरोध किया है.

एसएसपी मुरादाबाद द्वारा तीन फालोवरों को बुरी तरह मारने-पीटने के मामले में आज फालोवर सुंदर ने मुझे फोन करके बताया कि उन तीनों को अब तक ना तो मेडिकल और न एफआइआर नहीं करने दिया जा रहा है. साथ ही उन्हें पुलिस लाइन में लगभग नज़रबंद स्थिति में रखा गया है. यह मानवाधिकार हनन का अत्यंत गंभीर मामला होने के कारण मैंने इस बातचीत से अवगत कराते हुए डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिख कर इन तीनों का तत्काल मेडिकल करा कर एफआइआर दर्ज कराये जाने और इन्हें किसी भी प्रकार की अग्रिम प्रताड़ना से रोके जाने का अनुरोध किया है.

प्रेषित पत्र–
तत्काल/अत्यावश्यक

सेवा में,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय- एसएसपी मुरादाबाद द्वारा तीन फौलोवर को पीटने के मामले में एफआइआर दर्ज किये जाने हेतु

महोदय,
कृपया मेरे पत्र संख्या- AT/MBD/DGP/01 दिनांक-22/09/2013 का सन्दर्भ ग्रहण करें जिसके माध्यम से मैंने मानवाधिकार हनन विषयक एक अत्यंत गंभीर प्रकरण, जिसमें एसएसपी मुरादाबाद द्वारा तीन फौलोवर श्री सुंदर सेंगर, श्री दया किशन और श्री गुमान सिंह की कथित पिटाई के मामले में न्यायोचित कार्यवाही कराये जाने का निवेदन किया था. कालान्तर में ज्ञात हुआ कि इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए और मामले की सच्चाई के दृष्टिगत तत्कालीन एसएसपी मुरादाबाद को निलंबित कर दिया गया. यह सोच कर कि जब घटना सही पायी गयी है तो इस प्रकरण में एफआइआर भी दर्ज हो ही जाएगा, मैं भी यह घटना भूल गया था.

आज प्रातः जब मैं आजमगढ़ में अपनी नयी तैनाती के लिए निकल ही रहा था कि मुझे मेरे फोन नंबर 094155-34526 पर एक नंबर 090586-56777 से समय 09.51 पर फोन आया. यह फोन श्री सुन्दर ने किया था. वे मुझसे मामले में बात करना चाहते थे पर मैं जल्दी में था और बहुत विस्तार से वार्ता नहीं हो पायी. उन्होंने इतना अवश्य कहा कि उनका अब तक एफआइआर भी दर्ज नहीं हुआ है और मेडिकल तक नही हुआ है. यह भी कहा कि उन्हें सूत्रों से बताया गया ही कि उनका फोन टैप किया जा रहा है. मैंने इस नंबर पर लगभग 10.23 बजे अपनी ओर से फोन लगा कर बात की तो मालूम हुआ वह नंबर उनके किसी परिवार वाले का है और उनसे मैंने श्री सुन्दर का नंबर 094585-28198 ले कर समय 10.26 बजे करीब 4.51 मिनट बात की.

श्री सुन्दर ने मुझे बताया कि उन तीनों लोगों का मेडिकल नहीं हो रहा है. वे परसों दिनांक-22/09/2013  को मेडिकल कराने जिला अस्पताल गए थे तो कहा गया था कि थाने से रिपोर्ट चाहिए. जब वे रिपोर्ट के लिए लगभग छह-साढ़े छह बजे थाने गए तो उन्हें जबरदस्ती पुलिस लाइन ले आया गया. वहां उन्हें गेस्ट हाउस में लगभग नज़रबंद दशा में रखा गया. पहले लाइन के प्रतिसार निरीक्षक और उसके बाद जिले के पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण, पुलिस अधीक्षक, नगर और एएसपी ने उनसे पूछा कि थाने क्यों गए थे. यह भी पूछा कि एफआइआर क्यों लिखवाना चाहते हैं. उन्हें रात्री में करीब 11 बजे छोड़ा गया. इसके बाद उनके घर के सामने सिपाहियों का पहरा लगा दिया गया.
कल 23/09/2013 उन तीनों फौलोवर की पत्नियां डीआईजी मुरादाबाद से मिली थीं और उन्हें प्रार्थनापत्र दिया. डीआईजी से मिलने के बाद घर के आगे से सिपाहियों का पहरा हटा लेकिन वे आज भी पुलिस लाइन से बाहर नहीं जा सकते. श्री सुन्दर के अनुसार उनकी पत्नी बीमार हैं- बिस्तर पर हैं पर डॉक्टर को दिखवाने के लिए भी अनुमति लेनी हो रही है.

कल रात वे तीनों रात ढले करीब 11-11.30 बजे फिर जिला अस्पताल गए थे कि मेडिकल हो जाए. वहां कहा गया कि जिले के सीएमओ ने मेडिकल करने से मना किया है, थाने की चिट्ठी लाने पर ही मेडिकल किया जाएगा.
आज इन तीनों को पुलिस लाइन में ड्यूटी दी गयी है- श्री सुन्दर गेस्ट हाउस और बाकी दो स्टोर और मेस ड्यूटी पर हैं. वे लगभग नज़रबंद हालत में हैं. श्री सुन्दर के अनुसार उनका तत्काल डाक्टरी होना नितांत आवश्यक है क्योंकि समय के साथ चोट के निशानों पर भी असर होता है पर अभी तक तो डाक्टरी ही नहीं हुई है, एफआइआर की बात कौन करे.

मैंने श्री सुन्दर की कही बातें मुरादाबाद स्थित अपने कुछ मित्रों से सत्यापित कराया तो उन्होंने भी कहा कि ये बातें पूरी तरह सत्य हैं. अतः यह मामला बहुत अधिक गंभीर दीखता है. आप सहमत होंगे कि यदि जो बात श्री सुन्दर कह रहे हैं, वह सत्य है तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता कि पुलिस विभाग के ही तीन पीड़ित, गरीब, कमजोर लोग घटना के चार दिन बाद एफआइआर तो क्या, अपना मेडिकल तक नहीं करा पाए हों और शिकायत करने के बाद उलटे नज़रबंद कर दिए गए हों. होना तो यह चाहिए था कि अपने से वरिष्ठ और सामाजिक/प्रशासनिक दृष्टि से कई गुना रुतबेदार अधिकारी की आपराधिक ज्यादतियों के खिलाफ आवाज़ उठाने पर उनकी पूरी सहायता की जाती और होता यह दिख रहा है कि उलटे यही तीनों लोग प्रताड़ित हो रहे हैं और इनका मेडिकल/ एफआइआर तक नहीं हो रहा है.

अतः मैं निवेदन करूँगा कि इन तथ्यों के आलोक में मानवाधिकार हनन का अत्यंत महत्वपूर्ण मामला होने के नाते तत्काल इस मामले पर व्यक्तिगत दृष्टि डालने की कृपा करें और यदि मुझे बतायी गयी बातें सही पायी जाती हैं तो तत्काल मेडिकल करवाते हुए उचित धाराओं में एफआइआर दर्ज किये जाने के निर्देश निर्गत करने और इन तीनों फौलोवर को इस प्रकार प्रताड़ित करने/डराने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराये जाने की कृपा करें.

पत्र संख्या- AT/MBD/DGP/01                                     
भवदीय,
दिनांक-24/09/2013
(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34526

प्रतिलिपि- प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश, लखनऊ को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

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