पिछले चार महीने से अन्ना हजारे इस देश के विभिन्न राज्यों में अपनी जनतंत्र यात्रा के माध्यम से जागृति पैदा कर रहे है, लेकिन किसी भी राष्ट्रीय चैनल पर उनकी खबर नहीं दिखाई जा रही. ऐसा नहीं है की अन्ना को समर्थन नहीं मिल रहा है, हजारो की संख्या में लोग अन्ना की सभाओ में आ रहे है. फिर भी अन्ना के प्रति मीडिया की बेरुखी से वे नाराज़ नज़र आ रहे है. अन्ना ने सरकार और मीडिया में सांठ गाँठ का आरोप लगाया है और कहा है की सरकार उनकी खबरे दबाने के लिए मीडिया को पैसे देती है.
अन्ना ने कहा है की लोकल अखबार और लोकल मीडिया चैनल उनके आन्दोलन को अच्छा कवरेज दे रही है, लेकिन राष्ट्रीय मीडिया पर उनकी कोई खबर नहीं चलायी जा रही है. अन्ना ने ये भी कहा है की अगर उनके 4 महीने की रैलीयो को मीडिया ने कवर किया होता तो आज देश में खल बलि मच चुकी होती. अन्ना ने केंद्र सरकार पर मीडिया को खरीदने का आरोप लगाया और कहा की केंद्र सरकार उनकी खबरे रुकवाने के लिए मीडिया को पैकेज देते है. ये उन्होंने अपने अमेरिका दौरे से पहले दिए गए साक्षात्कार में कहा था.
ज्ञात हो की अन्ना कुछ दिनों के लिए अमेरिका में रहने वाले है जहा उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेना है. ऐसा नहीं है की मीडिया पर किसी व्यक्ति का ऐसा पहला आरोप है. समय समय पर मीडिया में पूंजीवादी ताकतों और सियासी नेताओ की पहुँच को लेकर आरोप लगते रहे है. चुनावो के दौरान पेड़ न्यूज़ एक ट्रेंड बन गया है. तो लोगो में अन्ना के इन आरोपे से जरा भी हैरानी नहीं है. बहरहाल अन्ना के आरोपों ने वैकल्पिक मीडिया की जरुरत को फिर से उजागर किया है और देश को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है की क्या आज की मीडिया विश्वास करने योग्य है? (आवाजआपकी.काम)






