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मैक्स हॉस्पिटल साकेत ने भूत को बंधक बनाया, देर रात पुलिस ने छुड़ाया

नई दिल्ली : नामी गिरामी फाइव स्टार अस्पतालों व बड़े-बड़े दावे करने वाली मेडिक्लेम कंपनियों की गंदी सांठ-गाठ की वजह से दिल्ली से प्रकाशित एक पत्रिका के संपादक पवन कुमार भूत को देर रात 2 बजे तक हॉस्पिटल के सुरक्षा कर्मियों ने रोके रखा और साकेत थाना प्रभारी के आदेश पर रिहाई संभव हो सकी। अस्पताल और रिहाई मामला थोड़ा अजीब है पर सच है।

नई दिल्ली : नामी गिरामी फाइव स्टार अस्पतालों व बड़े-बड़े दावे करने वाली मेडिक्लेम कंपनियों की गंदी सांठ-गाठ की वजह से दिल्ली से प्रकाशित एक पत्रिका के संपादक पवन कुमार भूत को देर रात 2 बजे तक हॉस्पिटल के सुरक्षा कर्मियों ने रोके रखा और साकेत थाना प्रभारी के आदेश पर रिहाई संभव हो सकी। अस्पताल और रिहाई मामला थोड़ा अजीब है पर सच है।

पवन कुमार भूत ने ICICI LAMOBARD की CASHLESS POLICY ली हुई थी और एक सामान्य से आपरेशन के लिए आवश्यक 80,000 (अस्सी हजार) का भुगतान स्वीकृत (AL NO. 110100196647) होने के बाद 19 जुलाई को सुबह 8 बजे नियमित भर्ती ली गई तथा सारे दिन यथावत टेस्ट किये गए।

किन्तु अचानक शाम 5 बजे ICICI LOMBARD  और अस्पताल द्वारा मरीज को सूचित किया गया कि APPROVAL सिर्फ 8,000 का ही है व आप 72,000 और जमा कराये। मरीज के रूप में पवन कुमार भूत ने अस्पताल व इंश्योरस कम्पनी की इस अजीब व असामान्य धोखाधड़ी की शिकायत को अस्पताल के उच्चाधिकारी डा. संदीप मोर (09810119500) को बताया किन्तु किसी प्रकार का संतोषजनक उत्तर न मिलने पर बिना इलाज किए अस्पताल से वापस जाने का निवेदन किया पर 11 हजार का कथित बिल देने के बाद ही अस्पताल प्रशासन जाने देने के लिए तैयार हुआ। तब लिखित शिकायत दर्ज करने के बाद रात 10 बजे साकेत थाने के पुलिस अधिकारी श्री रितुराज के हस्तक्षेप से चार घण्ठे की बहस के बाद सशर्त सम्पादक को डिस्चार्ज दिया गया।

जानकारी के मुताबिक यह इस तरह की पहली घटना नहीं है। बड़े स्तर पर इस प्रकार की लूट जारी है। पहले इंश्योरस कम्पनी की स्वीकृति लेकर मरीज को अस्पताल भर्ती करता है और बाद में नगद पैसे मांगे जाते है। जीवन की रक्षा के लिए व व्यक्ति के विश्वास के साथ काम करने वाली इन इंश्योरस कंपनियों पर अब सख्त कार्यवाई की जरूरत है। उम्मीद है, इस “माफिया रकैट” की जांच की जाएगी और मासूम मरीजों के जीवन को बचाया जाएगा।

जारी, पवन कुमार भूत, सम्पादक, पुलिस पब्लिक प्रेस
 

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