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मोदी, अंबानी, नेटवर्क18, ईटीवी और छंटनी

Himanshu Kumar : सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 चैनलों से तीन सौ से ज्यादा पत्रकारों को निकाला गया. इस मीडिया घराने को कुछ समय पहले मुकेश अम्बानी ने खरीद लिया था. मुकेश अम्बानी ने कुछ ही समय पहले ईटीवी चैनल को भी खरीद लिया है. मुकेश अम्बानी और मोदी की मिलीभगत जग जाहिर है. कुछ ही समय पहले मुकेश अम्बानी ने मोदी को खुश करने के लिये एक बकवास सी खबर उडाई थी कि साहब इन्डियन मुजहिदीन ने मुकेश अम्बानी के आफिस में आकर एक धमकी का खत दिया है. खैर लोगों ने उस खबर की खिल्ली उडाई तो उस खबर को ज्यादा नहीं बढ़ाया गया .

Himanshu Kumar : सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 चैनलों से तीन सौ से ज्यादा पत्रकारों को निकाला गया. इस मीडिया घराने को कुछ समय पहले मुकेश अम्बानी ने खरीद लिया था. मुकेश अम्बानी ने कुछ ही समय पहले ईटीवी चैनल को भी खरीद लिया है. मुकेश अम्बानी और मोदी की मिलीभगत जग जाहिर है. कुछ ही समय पहले मुकेश अम्बानी ने मोदी को खुश करने के लिये एक बकवास सी खबर उडाई थी कि साहब इन्डियन मुजहिदीन ने मुकेश अम्बानी के आफिस में आकर एक धमकी का खत दिया है. खैर लोगों ने उस खबर की खिल्ली उडाई तो उस खबर को ज्यादा नहीं बढ़ाया गया .

मुकेश अम्बानी द्वारा ईटीवी चैनल खरीदने से पहले मोदी ने गुजरात में ईटीवी को एक लाख दो हज़ार एकड़ ज़मीन कौड़ियों के मोल अता कर दी थी. उसके बाद मुकेश अम्बानी ने ईटीवी चैनल को खरीद लिया. अब मुकेश अम्बानी ने सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 चैनल से उन्हीं लोगों को निकाला है जिनके बारे में माना जाता है कि वे लोग साम्प्रदायिकता या फासीवाद के पक्ष में समझौता नहीं कर सकते थे. और जिनके मोदी के साम्प्रदायिक चुनाव प्रचार अभियान में सवाल खड़े करने की आशंका थी.

खतरनाक बात यह है कि अम्बानी की कम्पनी ने अनेकों मीडिया घरानों में बड़े पैमाने में शेयर खरीदे हैं. मोदी को प्रधान मंत्री बनाने के लिये धन पशुओं ने अपने खजाने खोल दिये हैं. चुनाव जीतने के बाद यही धनपशु सरकार की मदद से गाँव को आग लगवा कर ज़मीनों पर, जंगलों पर खनिजों पर कब्ज़ा करेंगे और देश के खजाने को विदेशी भट्टियों के लिये बेच कर पैसा कमाएंगे .और आज खर्च किये पैसे को कई गुना वापिस वसूलेंगे . हमारे नौजवान इन्ही धनपशुओं और उनकी कठपुतली मोदी को अपना भविष्य निर्माता मान रहे हैं. अरे आज देश के संसाधनों को लालच के लिये खत्म कर दिया तो आने वाली पीढियां क्या खायेंगी, कैसे जिएंगी ?

अभी तो तीन चार सौ पत्रकारों की नौकरी गई है. आगे आगे देखिये होता है क्या. इसी विकास के लिये पुलिस द्वारा जलाए गये गाँव , रोती हुई सोनी सोरी तुम्हें दिखाई ही नहीं देती थी , अभी भी जो ये शहर के लड़के लड़कियाँ इस नकली चकाचौंध वाले विकास के रंगीन गुब्बारे के चक्कर में अपने ही करोड़ों देशवासियों के उजाड़े जाने की तरफ देखना भी नहीं चाहते . कल को इनकी भी जब नौकरी जायेगी तब समझ में आएगा कि सब कुछ चंद धनपशुओं के हाथ में नहीं सौंपा जा सक्ता . अदालत पर इन अमीरों का कब्ज़ा , सरकार इनकी जेब में , पुलिस इनकी चाकर , मीडिया इनका भौंपू , जनता क्या करे ? ये अमीर सिर्फ अपने लालच और लाभ के लिये ही काम करेंगे . मुनाफा बढाने के लिये ये कम से कम नौकरों से ज़्यादा से ज़्यादा काम लेंगे , मशीनों से काम लेंगे और मजदूरों को निकाल देंगे . तब कहाँ जाकर रोओगे ?

अरे अमरीका के नौजवान भी अमीरों के इसी लालच के शिकार बन चुके हैं और लड़ने की कोशिश कर रहे हैं . भारत का शहरी मिडिल क्लास कुछ साल बाद लड़ेगा . असली बात याद रखो ये दुनिया सबकी है . और इस पर सबका बराबर हक है . कुछ लोगों को इस पर ज़्यादा हक नहीं दिया जा सक्ता . तुमने अपने ह्क़ से ज़्यादा हड़प कर बैठे लोगों की नौकरी कर के मज़े करने की कोशिश करी थी और जिनका ह्क़ छीना गया था उनकी आवाज़ अनसुनी करने की चालाकी करी थी . अब ठीक रास्ते पर आ जाओ . चलो गलत के खिलाफ और सही के ह्क़ में आवाज़ उठाओ .

जाने माने मानवाधिकारवादी हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से.

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