खुद को देश का नम्बर वन बताने वाला अखबार दैनिक जागरण महान और दिवास्वप्न देखने वाले लोगों के हाथों में हैं. तमाम लोग चाहते भी हैं कि यह अखबार ऐसे ही महान लोगों के हाथ में रहे ताकि पाठक वर्ग खुद-ब-खुद इस अखबार से दूर होता चला जाए. मामला दैनिक जागरण, मुगलसराय से जुड़ा हुआ है. यहां पर बिना कार्यक्रम हुए झूठी खबर छापी गई, जिससे अखबार की तो किरकिरी हुई ही, तमाम पाठक भी स्थानीय पत्रकार के इस हवा हवाई खबर पर जमकर हंसी उड़ाते नजर आए.
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सौजन्य से मुगलसराय के वीआईपी गेट पर पांच मई रविवार को प्याऊ का उद्घाटन दैनिक जागरण से ही लंबे समय तक जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार सीबी सिंह को करना था, परन्तु दैनिक जागरण ने अपने ही पुराने सहयोगी के बारे में गलत खबर प्रकाशित कर दी. जागरण ने बिना तथ्यों का पता लगाए, बिना मौके पर गए गलत खबर का प्रकाशन कर दिया. उसने एक दिन पहले ही प्याऊ का उद्घाटन करवा दिया. साथ में सीबी सिंह जी का फर्जी भाषण भी अपने मन से लिख दिया.
जबकि सच्चाई यह थी कि प्याऊ का उद्घाटन शनिवार को हुआ ही नहीं, बल्कि यह रविवार को पहले से निश्चित था. इस आशय की सूचना अमर उजाला ने प्रकाशित भी की थी कि रविवार को होगा प्याऊ का उद्घाटन. इस खबर के छपने के बाद कम से कम पत्रकारिता जगत के अलावा पाठकों ने भी जागरण की जमकर खिल्ली उड़ाई, क्योंकि मामला पत्रकारों से जुड़ा हुआ था, उसके बाद भी गलत और फर्जी खबर छपने पर लोग तमाम तरह के कमेंट करते रहे.
खैर, यह तो रहा पहला पक्ष. दूसरा पक्ष यह है कि भड़ास पर खबर छपने के बाद संबंधित पत्रकार की स्थिति मजबूत मानी जाती है. जागरण के पत्रकार कहते हैं कि अगर उनके खिलाफ खबर भड़ास पर प्रकाशित हुई तो प्रबंधन की नजर में उनका नम्बर बढ़ जाता है. तो हम चाहते हैं कि प्रबंधन ऐसे पत्रकारों का नम्बर बढ़ाता रहे क्यों कि यही पत्रकार तो देर सबेर जागरण की नैया पार लगाएंगे. हम फर्जी लिखने वाले जागरण के पत्रकारों का नम्बर प्रबंधन की नजर में बराबर बढ़वाते रहेंगे.
वैसे भी जागरण के मुगलसराय की जिम्मेदारी संभालने वाले विनय वर्मा बनारस के जीएम अंकुर चड्ढा के खास माने जाते हैं. और अंकुर चड्ढा डाइरेक्टर वीरेंद्र कुमार के खास हैं, लिहाजा संपादक की भी ऐसे मामलों में कोई सुनवाई नहीं होती है. विनय वर्मा दैनिक जागरण की पत्रकारिता के अलावा स्कूल का संचालन करते हैं, पत्रकारों के नेता हैं, तमाम संगठनों से भी जुड़े हुए हैं, लिहाजा उनके पास अपने कामों से कम समय अखबार के लिए बचता है. इसलिए वे ज्यादातर जगहों पर गए बिना ही समाचार लिख डालते हैं. इस स्थिति में गड़बड़ी होती ही रहती है. इसके पहले भी उनके कारनामों की शिकायत प्रेस काउंसिल से की जा चुकी है. नीचे जागरण तथा अमर उजाला में पांच मई को प्रकाशित खबर…

जागरण में पांच मई को प्रकाशित खबर

अमर उजाला में पांच मई को प्रकाशित खबर






