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”यशवंत की गल्ती क्या है, मैं बताता हूं”

यशवंत भाई, नमस्कार. आप जेल से बहार आ गये, बधाई हो. ३ जुलाई को यह भड़ास के लिए भेजा था, मगर लगा नहीं. कोई बात नहीं. मेरा मोबाइल गायब हो गया है. अपना नंबर भेज दें. आभारी रहूँगा. अल्लाह आपकी परेशानी दूर करे.
आपका शुभचिंतक
शिबली

यशवंत भाई, नमस्कार. आप जेल से बहार आ गये, बधाई हो. ३ जुलाई को यह भड़ास के लिए भेजा था, मगर लगा नहीं. कोई बात नहीं. मेरा मोबाइल गायब हो गया है. अपना नंबर भेज दें. आभारी रहूँगा. अल्लाह आपकी परेशानी दूर करे.
आपका शुभचिंतक
शिबली

यशवंत की गिरफ्तारी अफसोसनाक

एएन शिबली

भड़ास4मिडिया के संपादक यशवंत सिंह के खिलाफ जो भी आरोप लगाए जा रहे हों, यह एक हकीकत है और इसे हर कोई समझ रहा है कि यशवंत को एक साज़िश के तहत गिरफ्तार किया गया है. इस साज़िश में कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं. हर कोई इस तथ्य से अवगत है कि आज मीडिया में यशवंत जितना ईमानदार और बेबाकी से लिखने वाला कोई नहीं है. उसने बड़ी इमानदारी से हमेशा हर किसी के बारे में लिखा. कभी यह ख्याल नहीं किया फलां चैनेल छोटा है और फलां चैनेल बड़ा या फिर यह कि फलां पत्रकार छोटा है और फलां बड़ा.

यशवंत ने इमानदारी से लिखते हुए हर किसी कि बखिया उधेरी और पत्रकारों कि आवाज़ भी उठायी तो पत्रकारों कि ग़लत हरकत को भी उजागर किया. यह यशवंत का ही कमाल है कि जिस प्रकार नेट इस्तमाल करने वाले जिस प्रकार गूगल को जानते हैं उसी प्रकार देश का लगभग हर पत्रकार भड़ास को जनता है. यशवंत कि सिर्फ यह गलती है कि वह हद से ज्यादा ईमानदार आदमी है और यही वजह है कि उसने कभी किसी के खिलाफ लिखें में संकोच नहीं किया चाहे वह व्यात्क्ति कितना ही बड़ा कियूं न हो. यही कारण है कि देश के कई बड़े अखबारों के दफ्तर और चैनेल के दफ्तर में भड़ास पढने पर पाबंदी लगी है.

मैं यह बात नहीं मान सकता कि यशवंत ने किसी को धमकी दी होगी या फिर किसी से फिरौती मांगी होगी. अगर यशवंत इस नेचर के होते तो भड़ास को चलने के लिए वह बार बार पाठकों से आर्थिक मदद कि अपील क्यूं करते. वह किसी भी चैनेल के मालिक से कह सकते थे कि मुझे पैसे देते रहो, तुम्हारे बारे में कभी कुछ नहीं लिखूंगा मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया. मुझे याद है जब उन्होंने पहली बार भड़ास पर आर्थिक मदद कि अपील डाली तो मैंने उन्हें १००० रूपये की मामूली मदद का चेक भेजा.

मुझे तब बड़ी हैरानी हुई जब उन्होंने इस मामूली मदद को न सिर्फ कबूल किया बल्कि मुझे फ़ोन करके बताया कि शिबली भाई सबसे पहली मदद आपकी ओर से ही आई है. यही नहीं, उन्होंने इस मदद को खबर बना कर भड़ास पर चेक की फोटो के साथ लगा भी दिया. अब गौर कीजिये, क्या ऐसा करने वाला आदमी उगाही के लिए किसी को धमकी दे सकता है? यशवंत की गिरफ्तारी एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है और इसमें वह सब बेईमान मीडिया वाले शामिल हैं, जो खुद को इमानदार कहते हैं और बड़े चैनल होने का ढिंढोरा पीटते हैं.

लेखक हिंदुस्तान एक्सप्रेस के ब्यूरो चीफ हैं. उनसे 9891088102 पर संपर्क किया जा सकता है.


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