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यशवंत की गिरफ्तारी से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ

भड़ास4मीडिया के संस्थापक, संचालक, संपादक यशवंत सिंह की गिरफ्तारी से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ और इसका कारण वो नहीं है जो जगमोहन फुटेला या उनके जैसे मित्रों ने बताया है। भड़ास4मीडिया के जो तेवर रहे हैं उसमें ये कोई बड़ी बात नहीं है, ये तो होना ही था और मैं समझता हूं काफी देर से हुआ। देश, समाज, मित्रों, शासन, प्रशासन और विरोधियों ने यशवंत को इतना समय दे दिया है कि उसका कद उन सबों से ज्यादा है। अच्छी खबरें करने के लिए न हो, समय अनुकूल पत्रकारिता करने के लिए न हो, बड़े-बड़ों को परेशान कर सकने की शक्ति या माद्दा के लिए ही सही, है जरूर। इसलिए, जब जर्नलिस्ट कम्युनिटी का एसएमएस आया तो मैंने यशवंत का नंबर नहीं मिलाया और न अनिल सिंह से बात करने की कोशिश की और न भड़ास4मीडिया के तकनीकी विशेषज्ञ राकेश डुमरा से यह जानने की कोशिश की कि साइट पर कोई ‘हचलच’ (रविवार होने के बावजूद) क्यों नहीं है।

भड़ास4मीडिया के संस्थापक, संचालक, संपादक यशवंत सिंह की गिरफ्तारी से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ और इसका कारण वो नहीं है जो जगमोहन फुटेला या उनके जैसे मित्रों ने बताया है। भड़ास4मीडिया के जो तेवर रहे हैं उसमें ये कोई बड़ी बात नहीं है, ये तो होना ही था और मैं समझता हूं काफी देर से हुआ। देश, समाज, मित्रों, शासन, प्रशासन और विरोधियों ने यशवंत को इतना समय दे दिया है कि उसका कद उन सबों से ज्यादा है। अच्छी खबरें करने के लिए न हो, समय अनुकूल पत्रकारिता करने के लिए न हो, बड़े-बड़ों को परेशान कर सकने की शक्ति या माद्दा के लिए ही सही, है जरूर। इसलिए, जब जर्नलिस्ट कम्युनिटी का एसएमएस आया तो मैंने यशवंत का नंबर नहीं मिलाया और न अनिल सिंह से बात करने की कोशिश की और न भड़ास4मीडिया के तकनीकी विशेषज्ञ राकेश डुमरा से यह जानने की कोशिश की कि साइट पर कोई ‘हचलच’ (रविवार होने के बावजूद) क्यों नहीं है।

मैंने यह जानने की कोशिश की कि गिरफ्तारी किसकी शिकायत पर हुई है और शिकायत है क्या। मामला उसी से समझ में आ गया और शनिवार को गिरफ्तार किए जाने से वैसे भी सब कुछ साफ ही था। हो सकता है साक्षी जोशी और विनोद कापड़ी की शिकायत में दम हो पर यशवंत जैसों की गिरफ्तारी ऐसे ही नहीं होती और जिस ढंग से उसे गिरफ्तार किया गया उससे लगता है कि साक्षी और विनोद कहीं किसी के मोहरे न हों। यह भी संभव है कि यशवंत से फोन पर भिड़त के बाद जिस तरह जगमोहन फुटेला चाहते थे कि चंडीगढ़ में एफआईआर करवाकर हिसाब बराबर करें पर जैसा कि उन्होंने लिखा है, एक मित्र के बीच-बचाव करने से वे ऐसा नहीं कर पाए। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ और एफआईआर हो गई तो हो सकता है, किसी और ने इसका फायदा उठा लिया हो। हालांकि यह समय इस संबंध में अटकलें लगाने का नहीं है और मामला कुछ समय में साफ हो ही जाएगा।

इस संबंध में मुझे यह भी खुशी है कि यशवंत के छूटने के बाद पढ़ने के लिए कुछ बढ़िया पीस मिलेगा। यशवंत बगैर किसी लाग लपेट के लिखते हैं और विरोधी को भी पूरा मौका देते हैं (बशर्ते वह लिखे, कहीं भी)। इसलिए क्या कैसे हुआ, खेल में कौन प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से शामिल था यह सब जानना दिलचस्प होगा। और अगर विनोद-साक्षी अपनी बात लिखें तो निश्चित रूप से वह भी पढ़ने लायक होगा। मैं नहीं समझता कि यशवंत इस गिरफ्तारी या ऐसी किसी कार्रवाई के लिए शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक तौर पर तैयार नहीं होंगे। और अगर वे तैयार थे तो परेशानी की कोई बात ही नहीं है। बाकी उनकी मनःस्थिति तो थाने की तस्वीर से साफ ही है।

यहां मैंने यशवंत पर जो आरोप हैं उसकी चर्चा नहीं की है। पर यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि पैसे मांगने के लिए यशवंत को फोन करना पड़ेगा – इसपर मुझे यकीन नहीं है। अश्लील एमएमएस वह किसी एक लड़की को भेजेगा यह भी मेरे गले नहीं उतर रहा है क्योंकि ये दोनों काम वह साइट के जरिए खुले आम कर सकता था और एक क्या लाखों लोगों को वह वीडियो दिखा सकता था। साइट चलाने, घर चलाने या दारू पीने के लिए पैसे मांगने की अपील वह साइट पर खुले आम करता रहा है और लोग उसे पैसे ही नहीं, दारू की बोतल या फिर दारू के लिए अलग से पैसे भी देते रहे हैं। ऐसे में उसे किसी को पैसे के लिए धमकाने की जरूरत होगी, मुझे नहीं लगता। कोई और पुराना हिसाब बराबर करना हो तो मैं नहीं कह सकता।

वैसे भी, जो लोग कोई पंगा नहीं लेते बहुत ही सरल, शांत जीवन जीते हैं वे भी कानून तोड़ने या पुलिस के हत्थे चढ़ सकने वाली गलती डर से या पर्याप्त अक्ल होने के कारण नहीं करते हैं। ऐसे में जो व्यक्ति रोज बड़े बड़ों से पंगा लेता हो, किसी की न सुनता हो, जिसके खिलाफ कई अदालतों में कई मामले दर्ज हों, जिसने कइयों को नाराज कर रखा हो वह किसी टीवी चैनल के संपादक जैसे शक्तिमान से इस तरह टकराएगा मुझे नहीं लगता। बहुत ही बेवकूफ हो तो बात अलग है। पर इस मामले में यशवंत की बेवकूफी की भूमिका है या किसी के ज्यादा चालाक या शक्तिमान होने की यह तो समय ही बताएगा। इंतजार कीजिए – कुछ दिन में सब साफ हो जाएगा।

लेखक संजय कुमार सिंह लंबे समय तक हिंदी दैनिक जनसत्ता में वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहे हैं. इन दिनों बतौर उद्यमी अनुवाद कंपनी का संचालन कर रहे हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.


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