Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

यशवंत की ‘जानेमन जेल’ पढ़ते हुए रोहित की ‘जेल डायरी’ याद आई, पढ़ें कुछ अंश

Manika Mohini :  'जानेमन जेल' यशवंत सिंह की पहली पुस्तक है, जो किसी विधा के तहत नहीं लिखी गई है. यह लेखक का आत्मालाप है. डायरी इसलिए नहीं कह सकते क्योंकि इसमें तिथिवार ब्यौरा नहीं है. इसमें मुख्यरूप से तो लेखक के जेल में कैद होकर बिताए 68 दिनों के अनुभवों की कहानी है.

Manika Mohini :  'जानेमन जेल' यशवंत सिंह की पहली पुस्तक है, जो किसी विधा के तहत नहीं लिखी गई है. यह लेखक का आत्मालाप है. डायरी इसलिए नहीं कह सकते क्योंकि इसमें तिथिवार ब्यौरा नहीं है. इसमें मुख्यरूप से तो लेखक के जेल में कैद होकर बिताए 68 दिनों के अनुभवों की कहानी है.

साथ ही जेल से अपनी वेबसाइट bhadas4media.com को लिखे दो पत्र, जेल से छूटने के बाद समाज में उनका स्वागत, उनके स्वागत में उनके फेसबुक पर प्राप्त ढेरों प्रतिक्रियाएं, 'भड़ास' को चलाने के लिए भोगी जा रही आर्थिक कठिनाइयां, उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए जनता से सहायता की अपील। ये सभी कुछ इस 117 पन्नों की किताब में है.

गाज़ियाबाद की डासना जेल का लेखक ने इस बढ़िया तरीके से वर्णन किया है कि हम बाहर बैठे जेल-जीवन को अपने सामने सचित्र घटित होते हुए देख सकते हैं. लेखक का दृष्टिकोण सकारात्मक है, उसने बेहद उन्मुक्त रूप से जेल की विसंगतियों को अपनाया है. उसे वहां के वातावरण में बाहर के वातावरण की तुलना में एक सुखद बदलाव का अनुभव होता है. लेखक यशवंत सिंह के अनुसार …. "जेल से मैं भी डरता रहा हूँ क्योंकि समाज जेल को बुरी जगह के रूप में देखता है, यहाँ आकर लगा कि अब तक मैं बुरी जगह और बुरे लोगों के बीच था, जहाँ हर कोई अपने घात, ताक, स्वार्थ, चिंता में डूबा होता है. यहाँ तो सब विश्राम की मुद्रा में हैं. सब का सब कुछ स्थगित है, बस ढेर सारा जीवन है.… सब के सब खूब सोते हैं, दिन में भी, रात में भी. अनिद्रा और हाइपर टेंशन की कैद में करवट बदलते महानगरियों को सलाह है कि वे ज़िन्दगी चाहते हैं तो जेल टाइप सिस्टम डेवलप करें।"

अंत में सिर्फ इतना कि पुस्तक रोचक है, एक बैठक में पूरी पढ़ी जा सकती है. इसका मूल्य 95 रूपए है जो लेखक से अच्छे कमीशन पर खरीदी जा सकती है. मैंने 86 रुपए में homeshop18 से प्राप्त की.

xxx

Manika Mohini : यशवंत सिंह की पुस्तक 'जानेमन जेल' पढ़ते हुए उनकी सकारात्मक सोच देख कर मुझे रोहित द्वारा लिखे गए उनके ''जेल की डायरी'' के कुछ अंश याद आए जो अंग्रेजी से मेरे द्वारा हिन्दी में अनूदित होकर 'पाखी' के दिसंबर, '12 अंक में छप चुके हैं, आप भी पढ़ें, कैसे प्रतिकूल परिस्थितियों से समझौता करके व्यक्ति हर हाल में खुश रहना सीख जाता है.…

मैं एक धर्मशाला में रहता हूँ, जिसे आम आदमी की भाषा में जेल कहते हैं.… आमतौर पर समझा जाता है कि जेल में रहना जैसे अग्नि परीक्षा से गुजरने के समान है. लेकिन असली मायने में ऐसा कतई नहीं है. जब मैं अपने व्यावसायिक जीवन में सीढ़ी-दर-सीढ़ी ऊपर चढ़ रहा था, मेरी उन्नति मुझे आम आदमी से दूर ले जा रही थी. भगवान् ने शायद यह सोचा, बच्चे, यह रास्ता तुम्हारे लिए नहीं है, तुम आम आदमी के लिए बने हो. अब मेरा वास्ता आम आदमी से पड़ा है.

मैंने कभी सूर्य की तपती गर्मी को महसूस नहीं किया था, न ही कभी सर्दियों की चिलचिलाती ठंड को, न बारिश को. यहाँ मुझे प्रकृति से पूर्ण साक्षात्कार का अवसर मिला. ज़ाहिर सी बात है कि मैंने प्रकृति के नज़दीक होने का पूरा आनंद लिया. मैंने पौधों और फूलों को महसूस किया. वस्तुतः मैं भूल चुका था कि चिड़िया कैसी दिखती है. सालों-साल ऐसा चलता रहा था कि सुबह ऑफिस जाना और रात को घर वापस लौटना. मेरे पास आकाश की ओर देखने का समय नहीं था. मैं केवल आत्मलीन होता जा रहा था. मैं एक ऐसी दौड़ में शामिल था जिसे किसी ने कभी नहीं जीता. यहाँ आकर मेरी इन्द्रियों ने प्रकृति को पूरी तरह अनुभव किया. मुझे बहुत अच्छा लगता था. यद्यपि मेरे भीतर एक दर्द था परन्तु मेरी इन्द्रियों ने एक नए यौवन को महसूस करना शुरू कर दिया था.

मैं कहना यह चाहता हूँ कि पीड़ा झेलना और जीवन को अनुभव करना, इन दोनों के बीच बड़ा अंतर है. मैं हर क्षण अनुभव कर रहा हूँ. मैं हर गुज़रते हुए क्षण को अनुभव कर रहा हूँ. मैं प्राकृतिक सौन्दर्य को जैसे परत-दर-परत देख रहा हूँ. मैं पीड़ा नहीं झेल रहा, जीवन का अनुभव कर रहा हूँ. पीड़ा और अनुभव में बड़ा फर्क है. जब आप विचारों में एक जगह ठहर जाते हैं, तब आप पीड़ित होते हैं. जब आप आगे बढ़ते हैं, तब आप अनुभव करते हैं. अतः इस प्रकार की कष्टदायक स्थितियों में आगे बढ़ने की भावना ज़िन्दगी को समझने के समान है अन्यथा कष्ट झेलना है.… फिर यहाँ न पैसा कमाने की फ़िक्र है, न ज़िन्दगी की अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भागदौड़ करने की. रहने की जगह है, खेलने के लिए खुला मैदान है, पढने के लिए किताबें हैं, खाना है, बिजली है, पानी है और ये सब मुफ्त है. वाह, इससे ज्यादा और क्या चाहिए। बाहर की दुनिया वाला तनाव यहाँ नहीं है.

जो चीज़ें बाहरी ज़िन्दगी का ज़रूरी हिस्सा हैं, वह यहाँ रत्ती भर भी नहीं हैं. यहाँ पर मुख्य मुद्दा यह है कि यहाँ से बाहर कैसे निकला जाये. हर कैदी उस जादुई पल का इंतज़ार करता है जब वह आज़ादी कि रोशनी में सांस लेगा. वैसे यहाँ सब ने अपने भाग्य के आगे आत्मसमर्पण किया हुआ है. सम्बन्धी उन्हें भूल जाते हैं और प्रतिक्रिया में ये भी सम्बन्धियों को भूल जाते हैं. सौभाग्य या दुर्भाग्य से उसके बाद ज़िन्दगी बहुत आसान हो जाती है. अस्तित्व की आधारभूत ज़रूरतें ही शेष रह जाती हैं. हर कैदी केवल मूल भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के बारे में ही सोचता है. फिर यहाँ पर कैदी को हर रोज़ अपनी क्षमताओं को साबित करने का दबाव नहीं है जो बाहरी जीवन का एक ज़रूरी हिस्सा है, अपने अधिकारी के आगे अपनी क्षमताओं को साबित करो, अपने सम्बन्धियों के आगे अपनी सफलताओं को साबित करो आदि आदि. इस रूप में यहाँ कि ज़िन्दगी आसान हो जाती है…. जैसे-जैसे मेरी यह यात्रा आगे बढ़ रही है, मैं मंत्रमुग्ध होता जा रहा हूँ.

मोनिका मोहिनी

मोनिका मोहिनी

मोनिका मोहिनी के फेसबुक वॉल से.


'जानेमन जेल' किताब घर बैठे मंगाने के लिए आप किताब का नाम, अपना नाम, पूरा पता पिन कोड सहित और अपना मोबाइल नंबर लिखकर 09873734046 पर SMS कर दें. किताब कुछ ही दिनों में आपके हाथ में होगी. मूल्य सौ रुपये से कम है और छूट के साथ उपलब्ध है.


इन्हें भी पढ़ सकते हैं…

यशवंत ने 68 दिन में जेल को बना लिया जानेमन

xxx

'भड़ासजी', अच्छा लिखा आपने, किताब का नाम 'रोमांस विथ जेल' भी रखा जा सकता था

xxx

पाठकों की नजर में 'जानेमन जेल' : मुकुंद हरि शुक्ला की समीक्षा

xxx

पाठकों की नजर में 'जानेमन जेल' : चंदन श्रीवास्तव की टिप्पणी

xxx

डासना जेल में हुआ 'जानेमन जेल' किताब का विमोचन, यशवंत ने गाया मंच से भजन

xxx

'जानेमन जेल' का जाने-माने साहित्यकारों के हाथों विमोचन

xxx

यशवंत ने विनोद कापड़ी – साक्षी जोशी को समर्पित की अपनी पहली किताब 'जानेमन जेल'

xxx


संबंधित खबरें…

Yashwant Singh Jail

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...