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यशवंत को जेल में सड़ाकर मनोबल तोड़ने की साजिश

: करीबियों को प्रताडि़त व गिरफ्तार कर भड़ास को बंद करने का कुत्सित अभियान : साक्षी जोशी और विनोद कापड़ी द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमों के आधार पर यशवंत को तुरत-फुरत जेल भेजने के बाद दैनिक जागरण प्रबंधन ने भी एक मुकदमा ठोंक दिया। साक्षी और विनोद कापड़ी द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमों में यशवंत की जमानत टाल-मटोल के बाद दे दी गयी, लेकिन जागरण द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमें में अभी तक यशवंत को जमानत नहीं दी मिली है। जागरण प्रबंधन ने इसी फर्जी मुकदमे में पुलिस पर दबाव बनाकर भड़ास के कंटेंट एडीटर अनिल सिंह को भी जेल भिजवा दिया।

: करीबियों को प्रताडि़त व गिरफ्तार कर भड़ास को बंद करने का कुत्सित अभियान : साक्षी जोशी और विनोद कापड़ी द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमों के आधार पर यशवंत को तुरत-फुरत जेल भेजने के बाद दैनिक जागरण प्रबंधन ने भी एक मुकदमा ठोंक दिया। साक्षी और विनोद कापड़ी द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमों में यशवंत की जमानत टाल-मटोल के बाद दे दी गयी, लेकिन जागरण द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमें में अभी तक यशवंत को जमानत नहीं दी मिली है। जागरण प्रबंधन ने इसी फर्जी मुकदमे में पुलिस पर दबाव बनाकर भड़ास के कंटेंट एडीटर अनिल सिंह को भी जेल भिजवा दिया।

साथ ही पुलिस ने यशवंत के घर पर छापामारी करके लैपटाप व कंम्यूमटर की हार्ड-डिस्क को जब्त कर लिया। नोएडा कोर्ट द्वारा जागरण के मुकदमें में यशवंत को जमानत न देकर, अर्जी को खारिज करके सिर्फ डेट पर डेट दी जा रही है। जिस तरह के फर्जी मुकदमे यशवंत और अनिल पर लगाये गये हैं, उसमें अव्वल तो गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं थी। और अगर अपहरण के अंदाज में दोनों की आतंकवादियों सरीखी गिरफ्तारी की गयी तो उन्हें  कोर्ट से तुरंत बेल मिल जानी चाहिए थी। या फिर कुछ दिनों के भीतर ही जमानत मिल जानी ही चाहिए थी। लेकिन मीडिया के कुछ भ्रष्ट मालिकों व संपादकों ने मिलीभगत करके यूपी पुलिस को अपने प्रभाव में करके भड़ास टीम का मनोबल तोड़ने की साजिशें रचीं जिसके तहत जेल में उन दोनों को सड़ाने व डरा-धमका कर ‘भड़ास’ को न चलाने देने के लिए कुत्सित अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान का हिस्सा है यशवंत व अनिल को जमानत न दिया जाना। अनिल सिंह यशवंत की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कनर काट रहे थे। अनिल को नोएडा कोर्ट के पास पुलिस ने अपहरण किया और इधर-उधर घुमाने के के बाद हवालात में रखा, फिर जेल भेज दिया।

इसी अंदाज में इससे पहले यशवंत का भी पुलिस ने पहले अपहरण किया था और यहां-वहां घुमाने के बाद उन्हेंप जेल भेजा था। यशवंत के घर पर भारी पुलिस बल ने छापा मार कर घरवालों को डराया-धमकाया और कंप्यूभटर-लैपटाप को जब्त  कर लिया। फिलहाल दैनिक जागरण समेत भ्रष्टा मीडिया मालिकों व संपादकों की टोली पूरा प्रयास कर रही है कि यशवंत और अनिल की जमानत न होने दी जाए और इन मामलों को लटकाए रख कर भड़ास के संस्थापक व हिन्दी न्यूज मीडिया के नेतृत्वटकारी यशवंत सिंह और तेज-तर्रार पत्रकार व भड़ास के कंटेंट एडिटर अनिल सिंह को जेल में सड़ाया जाए। इस खेल में भ्रष्ट व प्रभावशाली लोग हाथ धोकर यशवंत के पीछे लगे हुए हैं।

पर पूरे मामले का दूसरा पक्ष यह है कि डासना जेल में अनिल और यशवंत निराश-हताश या परेशान होने की जगह गर्व और ताजे हौसलों से भरे हुए हैं कि उन्हें सच्ची पत्रकारिता करने और भ्रष्टाचार की पोल खोलने के कारण एक साजिश के तहत जेल भेजा गया है। इन दोनों का एक मुलाकात के दौरान कहना था कि हर दौर में खरी व सच्ची बात कहने-लिखने वालों को समाचार संस्थानों के मालिकों और प्रभावशाली लोगों द्वारा तरह-तरह से परेशान किया जाता रहा है, उसी कड़ी में हम लोग ताजा शिकार हैं।

उधर, आशंका व्यक्त की जा रही है कि यशवंत की पैरवी करने के कारण जिस तरह अनिल को निशाना बनाकर जेल में डाला गया है, उसी तरह कुछ अन्य भड़ास समर्थकों व पैरवीकर्ताओं का यूपी पुलिस अपहरण करके उन्हें जेल भेज सकती है। भ्रष्ट  मीडिया मालिकों व यूपी पुलिस की साजिश है कि भड़ास किसी भी हाल में अब न चले और इससे जुड़े लोग जेल में ही सड़ते रहें, तब तक जब तक उनके हौसले न टूट जाएं। लेकिन हमारे साथियों का हौसला तो इन प्रताड़नों के बावजूद बुलंद है। यशवंत और अनिल की गिरफ्तारी की बावजूद भड़ास का लगातार चलते रहना भड़ास-विरोधियों को पच नहीं रहा है।

नोएडा कोर्ट में पेशी के दौरान बातचीत में यशवंत ने बताया कि आर्थिक दिक्कलतों के कारण संभव है कि भड़ास कुछ समय के लिए बंद हो जाए, लेकिन यह भ्रष्टाचार विरोधी अभियान हरगिज रूकेगा नहीं। यह भी हो सकता है कि बाद में यह अभियान नये-नये नाम और शक्ल  से शुरू कर दिया जाए। यशवंत ने भड़ास को चाहने वालों से अपील की कि वे इस मुश्किल वक्त- में नैतिक रूप से भड़ास को सपोर्ट करें और भ्रष्ट  मीडिया मालिकों व निरंकुश यूपी पुलिस के खिलाफ अपने अपने स्त़र पर प्रतिरोध दर्ज करायें। यशवंत ने आशंका जाहिर की कि भ्रष्ट  मीडिया मालिकों व भ्रष्ट संपादकों की टोली पुलिस के साथ सांठगांठ कर उनपर कई और फर्जी मुकदमे लाद सकती है और जेल से बाहर निकलने पर जान से मरवा सकती है। यशवंत ने कहा कि वे अपने मिशन में मरते-दम जुटे रहेंगे, चाहे उन पर कितने भी जुल्म और सितम किये जाएं।

देखना है कि मीडिया, प्रशासन, पालिटिक्स आदि से जुड़े लोग यशवंत-अनिल की रिहाई के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास करते हैं या फिर भ्रष्टाचार के इस दौर में अपना कर्तव्य निभाने की जगह मौन साधकर भ्रष्टापचारियों को मूक-समर्थन देते हैं। कहा भी गया है- समय कहेगा उनका भी अपराध, जो तटस्थ हैं।

भड़ास ब्यूरो रिपोर्ट.


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