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यशवंत भाई, इंटरव्यू में अखिलेश अखिल के ही शब्द हैं

: अशालीन शब्दों का प्रयोग नहीं करती हैं साध्वी चिदर्पिता : भाई यशवंत जी, चित्रात्मक शैली में हाव-भाव और शब्दों को अक्षरश: प्रस्तुत करने की कला को इंटरव्यू कहा जाना चाहिए, पर हिंदी वीकली अखबार ''हम वतन'' में प्रकाशित बड़े भाई अखिलेश अखिल जी द्वारा लिखित इंटर व्यू में साध्वी चिदर्पिता गौतम का भाव नहीं दिख रहा, साथ ही साध्वी चिदर्पिता गौतम के विचारों को भाई अखिलेश अखिल जी ने अपने शब्द दे दिये हैं, जबकि उन्होंने साध्वी चिदर्पिता गौतम के बारे में अपने इंटर व्यू में ही लिखा है कि वह प्रखर वक्ता और प्रखर विद्वान हैं।

: अशालीन शब्दों का प्रयोग नहीं करती हैं साध्वी चिदर्पिता : भाई यशवंत जी, चित्रात्मक शैली में हाव-भाव और शब्दों को अक्षरश: प्रस्तुत करने की कला को इंटरव्यू कहा जाना चाहिए, पर हिंदी वीकली अखबार ''हम वतन'' में प्रकाशित बड़े भाई अखिलेश अखिल जी द्वारा लिखित इंटर व्यू में साध्वी चिदर्पिता गौतम का भाव नहीं दिख रहा, साथ ही साध्वी चिदर्पिता गौतम के विचारों को भाई अखिलेश अखिल जी ने अपने शब्द दे दिये हैं, जबकि उन्होंने साध्वी चिदर्पिता गौतम के बारे में अपने इंटर व्यू में ही लिखा है कि वह प्रखर वक्ता और प्रखर विद्वान हैं।

साध्वी चिदर्पिता गौतम से मिल चुके या बात कर चुके लोग अच्छी तरह जानते हैं कि उनके लिखने और बोलने की भाषा एक ही है। किसी के लिए भी वह अशालीन शब्दों का प्रयोग कभी नहीं कर सकतीं, लेकिन भाई अखिलेश अखिल जी ने साध्वी के जवाबों में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे वह स्तब्ध और दु:खी हैं। साध्वी के हवाले से भाई अखिल जी ने जो शब्द प्रयोग किये हैं, वह उनके अपने ही हैं। हां, मेरे हवाले से किये होते, तो माना जा सकता था, क्योंकि मेरे लिखने और बोलने की भाषा अलग-अलग है।

इसके अलावा कथित स्वामी चिन्मयानंद के संपर्क में रह चुकी लड़कियों के नाम भाई अखिलेश अखिल जी ने इस विश्वास के साथ पूछे थे कि उनका वह कहीं उल्लेख नहीं करेंगे, पर उन्होंने सभी के सही नाम प्रकाशित कर हमारा विश्वास तोडऩे के साथ उन महिलाओं का भी अपमान किया है, क्योंकि कथित स्वामी के पाप की दास्ता स्वेच्छा से कोई सुनाना चाहे तो ठीक है, वरना हम नहीं चाहते कि सम्मानित जीवन गुजार रही किसी लडक़ी का नाम इस प्रकरण में घसीटा जाये।

कथित स्वामी या उसके अवनीश मिश्रा जैसे किसी चमचे से मैं जीवन में कभी नहीं मिला हूं और न ही कभी किसी से किसी भी माध्यम से किसी तरह की कोई बात हुई है, फिर भी कथित स्वामी और उसके चमचे मुझ पर तरह-तरह के आरोप लगाते रहते हैं। खैर, उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, पर मैं यह पूछना चाहता हूं कि कथित स्वामी को महान संत घोषित करने वाला अवनीश मिश्रा यह बताये कि कथित स्वामी के टुकड़ों पर ही पलने के बावजूद उसने आज तक अपनी पत्नी और बच्चों का सामना कथित स्वामी से क्यूं नहीं कराया? हर सप्ताह या हर महीना की बात छोड़ भी दी जाये तो उसने गुरु पूर्णिमा, होली या दिवाली पर भी अपने बच्चों को कथित स्वामी से आशीर्वाद दिलाना उचित क्यूं नहीं समझा? इसी तरह कथित स्वामी के पक्ष में बयानबाजी कर रहे अन्य लोगों ने भी कथित स्वामी को कभी अपने घर क्यूं नहीं बुलाया, जबकि इतने बड़े संत या राजनेता का घर आना सभी के लिए प्रतिष्ठा का विषय होना चाहिए।

साध्वी या मुझ पर तरह-तरह के आरोप लगाने वाले या कथित स्वामी को महान घोषित करने का प्रयास करने वाले भी सच अच्छी तरह जानते हैं, तभी अपने परिवार को कभी आश्रम नहीं आने दिया और न ही कथित स्वामी को कभी अपने घर बुलाया, पर छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति के लिए फिलहाल अपनी ही आत्मा के विरुद्ध जाकर उसका पक्ष ले रहे हैं और यह भूल रहे हैं कि इंसान को मूर्ख बनाया जा सकता है, ईश्वर को नहीं।

बी.पी.गौतम

स्वतंत्र पत्रकार और साध्वी चिदर्पिता के पति

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