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यहां पर आकर आरएसएस फेल हो जाता है

स्वप्निल कुमार : आर.एस. एस. ने इस देश की सेवा की है इस बात में संदेह नही है । मै भी कभी स्वयं सेवक रह चुका हूँ, स्वयं सेवको के समर्पण, सेवाभावना, उत्साह आदि को जानता हूँ । और उसका आज भी तहे दिल से सम्मान करता हूँ. लेकिन, किसी भी संस्था की आत्मा होती है उसका 'एजेंड़ा' । वह किन उद्देश्यो के लिये काम कर रही है, समाज में किन मूल्यों को स्थापित करना चाहती है ?

स्वप्निल कुमार : आर.एस. एस. ने इस देश की सेवा की है इस बात में संदेह नही है । मै भी कभी स्वयं सेवक रह चुका हूँ, स्वयं सेवको के समर्पण, सेवाभावना, उत्साह आदि को जानता हूँ । और उसका आज भी तहे दिल से सम्मान करता हूँ. लेकिन, किसी भी संस्था की आत्मा होती है उसका 'एजेंड़ा' । वह किन उद्देश्यो के लिये काम कर रही है, समाज में किन मूल्यों को स्थापित करना चाहती है ?

यहाँ पर आकर आर. एस. एस. फेल हो जाता है । वो सिखाता है कि तुम हिंदू होने पर गर्व करो. जबकि, यह संयोग मात्र है कि मेरा, तुम्हारा या किसी और का जन्म हिंदू घर में हुआ है । इसमे प्रकृति का कोई हस्तक्षेप नही । वो तो लाखो करोड़ो साल से अपनी व्यवस्था से चल रही हैं । ये हिंदु, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैनी, बुद्धिस्ट, पारसी, यहूदी आदि रोज नये – नये पैदा तथाकथित भगवान, खड़े होते संगठन ये सब इंसानी दिमागी फितूर हैं, कचरा है. ये तुम्हारी गुलामी की मानसिकता का द्योतक है कि तुमने बुद्धत्व को छोड़ 'बुद्ध' को पकड़ा ।

आर.एस. एस. आज भी हिंदु राष्ट्र के सपने देखता है. इसके लिये वो किसी किसी भी हद तक गिर सकता है. हत्याओ के उत्सव मना सकता है. ऐसी सोच तो तमाम कठमुल्लो ( जैसे इंडियन मुजाहद्दीन) की भी है. और अपरोक्ष रूप से इसाई मिशनरियो की भी है. नफरत की राजनीति कर रहें है ये लोग और इसे हिदुंत्व का नाम देते है । आर.एस. एस. विशुद्द रूप से एक ब्राम्हणवादी संस्था है, जो अपने उन्ही सड़े – गले आग्रहो में जीती है। जिसके तमाम भोले – भाले कार्यकर्ताओं को नही पता कि उनका भावनात्मक रूप से शोषण किया जा रहा है । इसलिये मुख्य रूप से कार्यकर्ता नहीं बल्कि इनके आका, मुखिया दोषी हैं।

स्वप्निल कुमार के फेसबुक वॉल से.
 

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