शंभूनाथ शुक्ल : शत-शत नमन! आज दोपहर नोएडा फिल्म सिटी जाने के लिए जो टैक्सी मिली उसे एक महिला चला रही थीं। ऐसा पहली दफे हुआ। मैने पूछा कि टैक्सी चलाने का कैरियर उन्होंने क्यों ऑप्ट किया? उनका जवाब था कि कैरियर भी और मजबूरी भी। मुझे गाड़ी चलानी आती थी इसलिए पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर घर की गाड़ी चलाने की ख्वाहिश ने टैक्सी चलवाना शुरू करवा दिया। महिला बेहद सौम्य लेकिन अदम्य साहस की धनी दिखीं।
उन्होंने बताया कि आज तक किसी ने भी उनसे बदसलूकी नहीं की न तो किसी अन्य ड्राइवर ने न ही किसी यात्री ने। उनके दो बच्चे हैं। लड़की एमए कर रही है और लड़का एमबीए की कोचिंग। हालांकि उनका पति आज एक अच्छे पद पर है। उन महिला के प्रति मेरा मन नमन करने लगा उनके साहस और उनकी हिम्मत व नेकनीयती को देखकर। उनके माथे पर चंदन का टीका एकदम दक्षिण भारतीय शैली में लगा हुआ था। पर उन्होंने बताया कि वह कोई दक्षिण भारतीय नहीं बल्कि दिल्ली की ही गूजर बिरादरी से है और उनके पति यादव हैं। मैने कहा कि यह हिम्मत किसी शेर बिरादरी की महिला ही दिखा सकती है पोंगा पंडितों की बिरादारी से नहीं।
मुझे अचानक बाबू वृंदावन लाल वर्मा का मशहूर ऐतिहासिक उपन्यास मृगनयनी याद आ गया। इसकी नायिका यानी कि मृगनयनी एक गूजर युवती है जो ग्वालियर के राजा मानसिंह को अपनी वीरता और तीर चलाने के अपने कौशल से मंत्रमुग्ध कर देती है। कालांतर में वही गूजर युवती ग्वालियर की राजरानी बनती है। और बाद के युद्धों में राजा मान सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ती है।
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वाल से