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यूपी का आबकारी घोटाला- तीन : 16 फर्जी कंपनियों के मालिक पर नसीमुद्दीन की मेहरबानी!

:  एक लाख की कंपनी को अरबों का कारोबार : एक पता व एक फोन नंबर पर चार कंपनियां : इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त के यहां करोड़ों रुपए के आबकारी घोटाले में आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी एवं शराब माफिया पोंटी चड्ढा के विरुद्ध पत्रकार विनय मिश्र द्वारा दाखिल किए गए अतिरिक्त दस्तावेजों में कहा गया है कि वर्ष 2007 में बसपा सरकार के गठन के बाद आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बनाया गया, जिन्होंने सुनियोजित ढंग से आबकारी घोटाले की योजना बनाई और आबकारी कारोबार के तहत 16 फर्जी कंपनियां चलाने वाले गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पोंटी चड्ढा उम्र लगभग 50 वर्ष पुत्र श्री कुलवंत सिंह चड्ढा निवासी बी-508, न्यू फ्रेंडस कालोनी नई दिल्ली-65 को सौंप दिया।

:  एक लाख की कंपनी को अरबों का कारोबार : एक पता व एक फोन नंबर पर चार कंपनियां : इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त के यहां करोड़ों रुपए के आबकारी घोटाले में आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी एवं शराब माफिया पोंटी चड्ढा के विरुद्ध पत्रकार विनय मिश्र द्वारा दाखिल किए गए अतिरिक्त दस्तावेजों में कहा गया है कि वर्ष 2007 में बसपा सरकार के गठन के बाद आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बनाया गया, जिन्होंने सुनियोजित ढंग से आबकारी घोटाले की योजना बनाई और आबकारी कारोबार के तहत 16 फर्जी कंपनियां चलाने वाले गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पोंटी चड्ढा उम्र लगभग 50 वर्ष पुत्र श्री कुलवंत सिंह चड्ढा निवासी बी-508, न्यू फ्रेंडस कालोनी नई दिल्ली-65 को सौंप दिया।

शिकायत में कहा गया है कि पोंटी चड्ढा ने 40 लोगों का गिरोह बना रखा है, जो पोंटी द्वारा चलाई जा रही कंपनियों के निर्देशक मंडल में शामिल हैं। इनका पूरा नाम, पता व कंपनियों का नाम सहित पूर्ण विवरण भी लोकायुक्त के यहां दाखिल किया गया है। इस सांठगांठ के तहत मंत्री नसीमुद्दीन व पोंटी चड्ढा के बीच लम्बी डील हुई। इस डील के तहत सरकार बनते ही मंत्री जी के इशारे पर 5 जून 2007 को ब्लू वॉटर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दे दिया गया। यह कि विभागीय नियम दरकिनार कर आबकारी नीति में फेरबदल के तहत यह कार्य शीर्ष सहकारी संस्था जिसे कार्य का पूर्ण अनुभव हो, उसे देने के बजाय मात्र एक लाख रुपए की पूंजी वाली कंपनी ब्लू वॉटर को बगैर किसी टेंडर के पूरे प्रदेश का अरबों रुपए का आबकारी कारोबार कैसे दे दिया गया।

इस प्रकरण को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद सरकार व विभाग को जारी नोटिस पर सरकार ने यू टर्न लेते हुए यह जवाब दिया कि प्राइवेट कंपनी से अब कार्य नहीं कराया जाएगा और पूर्व की भांति काम होगा। सर्वोच्च न्यायालय में दिए गए जवाब के विपरीत फिर से सन 2007 की तरह काम होने लगा घोटाले के आरोप से बचने के लिए 13 जनवरी 2009 को ब्लू वॉटर का नाम बदलकर रायल ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड कर दिया। ब्लू वॉटर के नाम परिवर्तन का विवरण भी लोकायुक्त के यहां दाखिल किया गया है। आबकारी विभाग द्वारा देशी विदेशी मदिरा का थोक कारोबार वर्ष 2008-09 में 4 कंपनियों को दिया गया, इनमें एमथीस्ट टाउन प्लानर्स प्रा. लि., फ्लोरा एंड फेना हाउसिंग एंड लैंड डेवलपर्स, पटियाला किंग्स लिंकर्स, इंडैक्स फूड एंड ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड का नाम है। एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग नामों से संचालित 4 कंपनियों को ब्लू वॉटर के बाद पूरे प्रदेश में बगैर किसी टेंडर के थोक व फुटकर के सभी तरह के आबकारी कारोबार पर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इशारे पर पोंटी चड्ढा ने कब्जा कर लिया और पिछले 5 वर्ष के दौरान भारी घोटाला करके देश व प्रदेश की जनता को अरबों रुपए का चूना लगाया गया।

ब्लू वॉटर इंडस्ट्रीज प्रा. लि. के अलावा एमथीस्ट, फ्लोरा एंड फेना, पटियाला किंग्स लिंकर्स व इंडेक्स फूड दिखावे के तौर पर अलग-अलग दर्ज कराई गई हैं लेकिन इन सभी का एक पता सी-6फेज-2, नोएडा उत्तर प्रदेश व फोन नंबर कॉमन है। ब्लू वॉटर ने अपने बिलों में फैक्स नम्बर 0120-3042416 लिखा था। बाद में फ्लोरा एंड फेना ने छोटे दुकानदारों को जो बिल भेजे हैं उनमें भी वहीं लैंडलाइन फैक्स नम्बर लिखा है जो ब्लू वॉटर में लिखा था। इसका भी प्रमाण दाखिल किया गया है।

गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में अरबों रुपए का कारोबार करने वाली एमथीस्ट कंपनी की 31 मार्च 2007 की बैलेंस सीट में एक लाख रुपए की पूंजी दर्शाई गई है। अब यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि एक लाख रुपए की पूंजी वाली कंपनी को अरबों रुपए के कारोबार की अनुमति देना कहां तक उचित है। ठीक इसी तरह फ्लोरा एंड फेना कंपनी की भी पूंजी मात्र एक लाख रुपए थी, यह कंपनी 16 सितम्बर 2006 में बनी और अब मंत्री जी की कृपा से अरबों रुपए का कारोबार कर रही है। एमथीस्ट कंपनी का एक प्रस्ताव पत्र इसमें भी कंपनी का पता सी-6 फेज -2 नोएडा लिखा है जो कि ब्लू वॉटर का भी पता है। एमथीस्ट कंपनी के साथ सहकारी चीनी मिल संघ द्वारा किए गए अनुबंध पत्र में भी कंपनी का पता सी-6 फेज-2 नोएडा दर्ज है। शिकायत के साथ बैंक में इन कपंनियों द्वारा किए गए लेनदेन की बैलेंस सीट से भी प्रमाणित होता है कि उक्त कंपनियों के आपसी संबंध हैं। इस संबंध में भी दस्तोवजी साक्ष्य दाखिल किए गए हैं।

जेपी सिंह द्वारा लिखी गई यह खबर लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार डीएनए में छप चुकी है, वहीं से साभार लिया गया है.

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