: अंकित दर से अस्सी रुपए अधिक की वसूली, रफल्स ब्रांड की बिक्री से कमाया भारी मुनाफा : इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उप्र चीनी मिल संघ की आड़ में पहले जिस ब्लूवाटर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को शराब का कारोबार सौंपा गया और उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान लेने पर उसे हटाकर पुन: उप्र के मेरठ जोन के 23 जिले का कारोबार चीनी मिल संघ केजरिए फ्लोर एंड फेना लिमिटेड एवं एमकिस्ट टाउनशिप प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड को शराब का कारोबार सौंपा गया। उनके कंपनी निदेशक मंडल में जरूर अलग-अलग नाम हैं लेकिन सभी कंपनियों द्वारा जो बिलिंग की जा रही है उसमें उक्त तीनों कंपनियों के मुख्यालय का पता सी-6, फोज 2 नोएडा, उ.प्र. दर्ज है। आबकारी विभाग में यह दस्तावेज उपलब्ध हैं।
पत्रकार विनय कुमार मिश्र द्वारा लोकायुक्त उ.प्र. केयहां आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के विरुद्ध करोड़ों रुपए के आबकारी घोटाले की शिकायत दर्ज कराई गई है। ज्ञातव्य है कि उ.प्र. सरकार ने पिछले पांच वर्षों के दौरान पूरे प्रदेश का आबकारी कारोबार शराब माफिया पोंटी चड्ढा को सौंप रखा है और इसमें करोड़ों के घोटाले का आरोप है। इस घोटाले में आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की शराब माफिया पोंटी चड्ढा से मिलीभगत के आरोप हैं।
शिकायत में कहा गया है कि सहायक आबकारी आयुक्त (लाइसेंस) एनएस चौहान ने 30 जून 2007 को मेसर्स उ.प्र. सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड शराब का थोक व्यापार करने का लाइसेंस दे दिया। इस लाइसेंस की आड़ में एक प्राइवेट ठेकेदार पोंटी चड्ढा की कंपनियों को आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इशारे पर प्रदेश के थोक शराब कारोबार की अवैध रूप से छूट दे दी गई। शराब के थोक व्यापार पर एक ही व्यक्ति का नियंत्रण हो जाने के बाद जिन थोक गोदामों से फुटकर व्यापारियों को माल दिया जाता है वहां से प्रति बोतल अंकित रेट से अस्सी रुपए प्रति बोतल अतिरिक्त दिए जाने के बाद ही उन्हें माल दिया जाता है। जो व्यापारी प्रिंटेड रेट से अधिक मूल्य नहीं देते थे उन्हें माल नहीं दिया जाता था। इस तरह से जो ओवर रेटिंग एक व्यापारी के द्वारा की गई। आरोप है कि उसका शेयर नसीमुद्दीन सिद्दीकी तक पहुंचता था। पूरे प्रदेश में एक तरफ प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार करोड़ रुपए का आबकारी कारोबार होता है। उसमें भारी घोटाला किए जाने के साथ ही प्रति बोतल 80 रुपए की ओवर रेटिंग कर लगभग दो लाख बत्तीस हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है।
इस घोटाले के प्रमुख सूत्रधार व्यवसायी पोंटी चड्ढा ने शराब कारोबार पर ऐसा शिकंजा कसा कि यूपी में प्रचलित ब्रांडों की शराब की बाजार में कमी हो गई। उसकी जगह पर ‘रफल्स’ ब्रांड की जबरन बिक्री करके भारी मुनाफा कमाया गया। इस राशि को यदि जोड़ा जाय तो घोटाले की धनराशि बढ़ सकती है। वर्ष 2007 के मायावती सरकार के पहले उ.प्र. में रफल्स ब्रांड की रम व विहिस्की का कारोबार बहुत कम था। रफल्स ब्रांड पूरे प्रदेश में जबरन बेची गई क्योंकि वह कंपनी उक्त शराब व्यवसायी से संबंधित है। थोक कारोबार का लाइसेंस उपसहकारी चीनी मिल संघ के नाम से था तो संघ के खाते में कारोबार की धनराशि क्यों नहीं जमा कराई गई। यह सरासर धोखाधड़ी व घोटाले का नमूना है। पूरे प्रदेश में ओवर रेटिंग जमकर की गई। प्रदेश के छोटे पुराने दुकानदारों से किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जाए तो ओवर रेटिंग के पुख्ता प्रमाण उपलब्ध हो जाएंगे। आबकारी विभाग केपास पूरा विवरण होना चाहिए कि पूरे प्रदेश में देशी व अंग्रेजी शराब की कितनी बोतलें बिकी हैं। प्रति बोतल 80 रुपए के हिसाब से जोड़ा जाय तो भारी घोटाला सामने आता है। शिकायत में कहा गया है कि शराब घोटाले से जुड़े पोंटी चड्ढा के इशारे पर महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट किए जा रहे हैं और उससे संबंधित शराब की दुकानों से बिक्री रजिस्टर जगह-जगह फाड़े व जला दिए जा रहे हैं। इस घोटाले में दोषी जनों को पकडऩे के लिए ब्लू वॉटर, फलोरा एंड फेना तथा एमपिस्ट से संबंधित सभी रिकार्डों को तत्काल जब्त किया जाय तो सरकारी खजाने को करोड़ों की चोट पहुंचाने का मामला खुल जाएगा।
जेपी सिंह द्वारा लिखी गई यह खबर लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार डीएनए में छप चुकी है, वहीं से साभार लिया गया है.






