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यूपी की लुटेरी सरकार लूट से ध्यान बंटाने की कोशिश में

: ‘माया-राज’ में हुए घोटालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। दिखावे के तौर पर आए दिन मंत्री बर्खास्त हो रहे हैं। घोटालों से ध्यान बंटाने के लिए माया ने भरसक कोशिश की है, लेकिन इस बार ‘सत्ता विरोधी’ लहर चल पड़ी है। देखें, बहनजी उससे कैसे निपटती हैं? अखिलेश अखिल की रिपोर्ट…. :

: ‘माया-राज’ में हुए घोटालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। दिखावे के तौर पर आए दिन मंत्री बर्खास्त हो रहे हैं। घोटालों से ध्यान बंटाने के लिए माया ने भरसक कोशिश की है, लेकिन इस बार ‘सत्ता विरोधी’ लहर चल पड़ी है। देखें, बहनजी उससे कैसे निपटती हैं? अखिलेश अखिल की रिपोर्ट…. :

उत्तर प्रदेश में चुनावी दुदुंभी बज चुकी है। यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री मायावती को ‘सत्ता विरोधी’ लहर (इंकंबेंसी फैक्टर) से भी झूझना पड़ेगा। इससे पहले माया को ऐसी स्थिति से नहीं गुजरना पड़ा था। हमारे देश के चुनाव में इंकंबेंसी फैक्टर का असर अक्सर देखने को मिलता है। ऊपर से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप अलग से हों, तो जनता को ज्यादा देर तक ठगने की गुंजाइश नहीं रह जाती। माया के राज में घोटालों की लंबी फेहरिस्त है। भाजपा वाले घोटालों की उस लंबी फेहरिस्त को जनता के सामने ले जा रहे हैं। संभव है, इसके पोस्टर भी गांव-गांव में लगाए जाएं। यह घोटाला ही है, जिसकी वजह से माया के लगभग दर्जनभर मंत्रियों को चलता भी होना पड़ा है। ऐसा किसी विरोधी पार्टी के दबाव में नहीं हुआ है, स्थानीय लोकायुक्त ने माया के मंत्रियों को दोषी पाया है।

पांच साल तक प्रदेश को लूटने के बाद अब मायावती को उनके मंत्री चोर और बेईमान नजर आने लगे हैं, तो इसे मायावती की ‘लंपट राजनीति’ ही कहा जा सकता है। माया का यह खेल ‘सौ-सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ कहावत को चरितार्थ कर रही है। मायाराज की लंपटई पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे, लेकिन पहले थोड़ी चर्चा चुनावी माहौल की कर लें। सपा, कांग्रेस और भाजपा, माया सरकार पर गंभीर आरोप अलग से लगा रही हैं। कांग्रेस के राहुल गांधी माया सरकार पर विकास के सारे पैसे लूट लेने के आरोप लगा रहे हैं, तो सपा और भाजपा भ्रष्टाचार के साथ ही दलितों और पिछड़ों को न्याय नहीं दे पाने के मसले पर माया सरकार को घेर रहीे हैं। लेकिन माया अभी भी अपने गुमान में हैं। उनको लग रहा है कि पिछले चुनाव में जिस सोसल इंजीनियरिंग के तहत उन्हें सत्ता मिली थी, इस बार भी ऐसा ही होगा और विरोध करने वाले चित हो जाएंगे। माया और उनके रणनीतिकारों को इंकंबेंसी फैक्टर का डर नहीं है। उनका मानना है कि अभी हाल में ही नीतीश कुमार ने बिहार में इंकंबेंसी फैक्टर को धत्ता बताकर फिर सत्ता हासिल की है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी शिवराज सिंह और रमन सिंह इंकंबेंसी फैक्टर को फेल कर चुके हैं। मायावती कहती हैं कि सरकार पर आरोप लगते ही रहते हैं, लेकिन कौन कितने पानी में है, इसका फैसला तो चुनावी मैदान में ही होना है। फिर आरोप लगाने के खेल का कोई मतलब नहीं है। वह चुनाव में केंद्र की दोहरी नीति का खुलासा करेगी। उधर मायावती के बेहद नजदीकी सांसद और ब्राह्मण चेहरा सतीश चंद्र मिश्रा विपक्ष के वारों को महज शिगूफा से ज्यादा कुछ भी नहीं मान रहे हैं। मिश्रा जी को अभी भी पुराने जातीय समीकरण पर नाज है और डंके की चोट पर कह रहे हैं कि आरोप लगाने और हल्ला करने से बसपा की सेहत पर कोई असर नहीं पड़Þ रहा है। प्रदेश की जनता सब देख रही है और चुनाव में कौन कितने पानी में है, इसका फैसला हो जाएगा।

भाजपा प्रदेश चुनाव में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। चुनाव जीतना है, इसके लिए भाजपा भी कई तरह के तीर अपने तरकश में सजा रही है। भाजपा के ये तीर वैसे तो सभी विरोधी पार्टियों पर सधेंगे, लेकिन बसपा पर चौतरफा वार करने की योजना है। भाजपा का केंद्रीय कार्यालय इस मसले पर काफी गंभीर है। भाजपा के रणनीतिकारों ने माया राज में हुए 100 घपलों और घोटालों की सूची तो पहले ही जारी कर दी थी, उस सूची को गांवों तक कैसे पहुंचाया जाए, अब इस पर पार्टी काम कर रही है। 100 घोटालों की ये सूची जनता के हाथ लग गई, तो संभव है कि मायावती के वोट बैंक पर बुरा असर पड़ सकता है। भाजपा का संगीन आरोप है कि मायावती की सरकार ने ‘प्रापर्टी डीलर’ बनकर करोड़ों-अरबों रुपये कमाए हैं।

दरअसल, माया सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में गु्रप हाउसिंग की बेशकीमती जमीन बिल्डरों को कौड़ियों के दाम देकर एक लाख करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है। नोएडा सिटी सेंटर के सेक्टर 25ए और 32 में 162 एकड़ जमीन एक कंपनी को 85 हजार वर्ग मीटर की दर से आवंटित की गई। इसके अलावा उसे कई मंजिला इमारत बनाने की भी मंजूरी दी गई। व्यावसायिक भूखंड आवंटन में अगर नियमानुसार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाती, तो यह जमीन सात से आठ लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित होती। इस सौदे में एक लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से कमीशन लेने की बात है। जमीन से जुड़े दर्जनों मामले ऐसे ही हैं। माया पर चीनी मिल घोटाले का भी आरोप है। प्रदेश में मिश्रित सरकार, सहकारी संघ और निजी क्षेत्र की चीनी मिलें हैं। चीनी संघ के पास 28 मिले हैं, जबकि 93 मिलें निजी क्षेत्र की हैं। साल 1971 से 1989 के बीच जब बड़ी संख्या में घाटे में चल रहीं चीनी मिलों को राष्ट्रीयकृत किया जा रहा था, तब चीनी निगम सामने आया। पिछले कई सालों से चीनी निगम की सरकारी चीनी मिलें घाटे में चल रही हैं। इसके पहले की सपा सरकार ने इसके निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। मायावती के लिए यह प्रक्रिया सोने पर सुहागा साबित हो गया। बिजनौर की चीनी मिल की अनुमानित कीमत 274 करोड़ मानी जाती है, जिसे 101 करोड़ में बेचा गया।

चीनी निगम की बिड़वी चीनी मिल 35 करोड़ में बेच दी गई, जबकि इसकी अनुमानित कीमत 503 करोड़ थी। इसी तरह कुशीनगर की खड्डा इकाई को 22 करोड़ में बेचा गया, जबकि अनुमानित कीमत 175 करोड़ थी। बुलंदशहर की चीनी मिल 29 करोड़ में बेची गई, जबकि इसकी अनुमानित कीमत 175 करोड़ थी। इसी तरह अमरोहा, जरबाल रोड, रोहनकला, सरवती तंडा, सिसवा बाजार, चांदपुर और मेरठ की चानी मिलें औने-पौने दामों में बेच दी गई हैं। नेकपुर की चीनी मिल को 14 करोड़ में बेचा गया, जबकि सर्किल दर के अनुसार इसकी कीमत 145 करोड़ है। इसमें स्क्रैप ही 50 करोड़ का था। 41 एकड़ क्षेत्र में फैली घुगली चीनी मिल की कीमत 100 करोड़ से ज्यादा है, इसे मात्र पौने चार करोड़ में बेचा गया। दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम के वोट बैंक से सत्ता में आने वाली माया के लिए इस बार सबसे पहले जनता के सामने घोटालों का हिसाब रखना है। इसके बाद बदलते हालात में बसपा से मुसलमानों के बिदक जाने की संभावना भी बढ़ती दिख रही है। यह बात और है कि चुनाव आने तक मायावती कौन सा खेल करती हैं, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी माया सरकार के लिए सत्ता में लौटना आसान नहीं है। आप कह सकते हैं कि माया के लूट का खेल कहीं उनके ‘ताबूत’ में आखिरी कील साबित न हो जाए।

मायावती शासन में गड़बड़-घोटालों का ब्यौरा

1. माया गैंग : ‘माया गैंग’ में शामिल कई मंत्रियों-संतरियों ने 40 हजार करोड़ रुपये की जमीन की ‘लूट’ की है। इसके लिए माया के इशारे पर चलने वाले दर्जनभर से ज्यादा कॉरपोरेट हस्तियों ने जमीन अधिग्रहण का खेल खेला।

2. माया उपहार : माया ने अपनी चुनिंदा कॉरपोरेट हस्तियों को नोएडा में एक लाख करोड़ की कीमती जमीन उपहार में दी है।

3. माया की सत्ता : कानून को धता बताकर संदिग्ध तरीके से माया सरकार ने अपने चहेतों को ऊर्जा प्रोजेक्ट दिए, जिससे प्रदेश को 20 हजार करोड़ की हानि हुई है।

4. माया की चीनी : चीनी कारखानों की हजारों करोड़ कीमत की जमीन बहुत ही कम कीमत में अपने चहेते पौंटी चढ्डा और अन्य को दी। इसमें 25 हजार करोड़ की हानि प्रदेश को हुई है।

5. माया का टोरेंट पॉवर : आगरा के आम उपभोक्ताओं के हितों को ताक पर रखकर टोरेंट पॉवर को पॉवर वितरण का फ्रेंचाइजी दिया गया। इससे इसमें 25 हजार करोड़ रुपयों की बंदरबांट की गई।

6. चूना, रेत और पत्थरों की खानों को अपारदर्शी तरीके से अलॉट किया गया। इसमें सत्ता के कई लोग शामिल थे। इसमें 15 हजार करोड़ के घोटाले की आशंका है।

7. अवैध कर और हफ्ता वसूली को प्रदेश में माया टैक्स कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में शराब की जितनी दुकाने हैं, वहां से हर शराब की बोतल पर 10 से 20 रुपये ‘माया टैक्स’ के रूप में वसूल किया जाता है। यह करीब 10 हजार करोड़ की ‘लूट’ है।

8. माया के शासन में स्मारक निर्माण के नाम पर करीब 5 हजार करोड़ की ‘लूट’ की गई है। जबकि शराब लाइसेंस और सड़क निर्माण के नाम पर 10 हजार करोड़ का गबन है।

9. वृद्ध और विधवा पेंशन में भी माया के लोगों ने भारी ‘लूट’ की है, इसमें करीब 2 हजार करोड़ का घोटाला माना जा रहा है।

10. प्रदेश में चल रही सामाजिक कल्याण योजनाओं में भी 2 हजार करोड़ की लूट की बात सामने आ रही है। इस तरह से पिछले चार सालों में 2 लाख चौवन हजार करोड़ रुपयों की लूट माया सरकार में हो चुकी है। लूट की बानगी के तौर पर आप दर्जनभर मंत्रियों को बाहर निकाले जाने के रूप में देख सकते हैं।

पांच साल में लूट ही लूट : मुलायम

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि इस माया सरकार ने अपने पांच साल के शासन में एक ही काम किया है और वह है ‘लूटने’ का काम। जिस तरीके से प्रदेश को लूटा है, वह ऐतिहासिक हो सकता है। इसने केवल लूटने का ही काम नहीं किया है। जिन दलितों की राजनीति वह करती हैं, सबसे ज्यादा वही लोग इस सरकार में ज्यादती के शिकार हुए हैं। अब माया को जनता के सामने जवाब देना होगा।

हाथी खा गया नोट : राहुल

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी कहते हैं कि बसपा के ‘हाथी’ ने विकास के सारे पैसे खा लिए। भ्रष्टाचार में माया की सरकार ऐसी डूबी कि उसने अपने जनदायित्वों को भी भूल गईर्Ñं। अगर इस राज्य में सबसे ज्यादा लूट हुई है, तो वह है मायावती का शासन। लूट करने के सिवा यहां कुछ हुआ ही नहीं। अगर विकास हुआ होता, तो यह प्रदेश आज विकसित हो गया होता।

माया ने लगाया ‘लूट’ में ध्यान : कीरीट

भाजपा के कीरीट सोमैया कहते हैं, ‘मायावती ने अपने शासन में प्रदेश को कुछ देने के बजाय प्रदेश को लूटने में ही सारा ध्यान लगाया है। अगर यह सरकार जनता के लिए कुछ करती, तो प्रदेश की तस्वीर कुछ और ही होती। इस सरकार ने सबसे ज्यादा पैसा जमीन के जरिए उगाहा है। जिस मंत्री को मायावती आज निकाल रही हैं, उससे पहले तो उसे ही जेल जाना चाहिए। और ऐसा होगा भी’।

लेखक अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनकी यह रिपोर्ट हमवतन हिंदी वीकली में प्रकाशित हो चुकी है. वहीं से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

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