एक वेबसाइट है, खबरअबतक डॉट कॉम www.khabarabtak.com. ये समय समय पर अपनी वेबसाइट पर स्टिंग प्रसारित करते हैं. यह बहुत अच्छी बात है. लेकिन गलत बात ये है कि ये केवल स्टिंग वाला वीडियो टांग देते हैं, यह जानकारी नहीं देते कि जिस अफसर का स्टिंग हुआ है, उसका नाम पद जिला क्या है. बिना इन जानकारियों के इस स्टिंग का क्या मतलब. कहानियां तो हम लोग बहुत सुनते रहते हैं कि बड़ा पाप बढ़ गया है, बहुत चोरी बढ़ गई है, बहुत वसूली हो रही है. लेकिन नाम पता ठिकाना न दिखे छपे तो फिर स्टिंग का मकसद हल नहीं हो पाता.
वैसे भी आजकल स्टिंग के नाम पर ब्लैकमेलिंग का चलन खूब बढ़ा है. जो न पट पाए, उसका वीडियो दिखा दो और जो पट जाए उसका वीडियो पी जाओ. खबरअबतक डॉट कॉम के लोग स्टिंग दिखाकर बहुत बढ़िया कर रहे हैं. इससे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो रहा है लेकिन थोड़ी मेहनत और करके वे अफसरों के नाम पता ठिकाने भी बता दें तो उन अफसरों पर कार्रवाई हो जाती और लोगों को भी सही सही जानकारी हो जाती कि आखिर किनेक श्रीमुख से ये अनमोल वचन निकल रहे हैं.
इस साइट पर स्टिंग के वीडियो के बगल में सिर्फ इतना लिखा है- यूपी में अवैध वसूली की कहानी, खनन अधिकारी की जुबानी भाग – 1 और भाग-2. वीडियो देखने पर भी नहीं समझ में आ रहा कि ये अफसर कौन है और किस जिले में किस पद पर पदस्थ है. अपनी साइट के पाठकों पर मेहरबानी करके कृपया अन्य जरूरी जानकारियां भी दे दिया करें खबरअबतक डॉट कॉम के भाई साहब लोग. इससे पहले भी इन लोगों ने इसी तरह का एक स्टिंग वीडियो लगाया. फिलहाल, ताजे स्टिंग मामले के दोनों वीडियो को आप भी देखें, लिंक नीचे दिए जा रहे हैं, उस पर क्लिक कर दें.
यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
यूपी में अवैध वसूली की कहानी, खनन अधिकारी की जुबानी पार्ट एक
यूपी में अवैध वसूली की कहानी, खनन अधिकारी की जुबानी पार्ट दो

(अपडेट- बाद में भड़ास को सूचित किया गया कि यह स्टिंग गोरखपुर में तैनात महाभ्रष्ट खनन अधिकारी बीडी शर्मा द्वारा ली जा रही एक मीटिंग का है। बीडी शर्मा कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया जनपद के बालू ठेकेदारों की मीटिंग बुलाकर उन्हे सिंडिकेट
(माया टैक्स) के बारे में समझा रहा है। इस सूचना के अलावा अलग से एक खबर भी भेजी गई, जिसे प्रकाशित किया जा रहा है. -एडिटर)
गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती के शासन काल में सिर्फ खनन विभाग से पिछले तीन साल में पूरे प्रदेश से लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की अवैध वसूली हुई है। जानकारों का कहना है कि लगभग 3 वर्ष पूर्व एनआरएचएम घोटाले में फंसे पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और उनके बेहद करीबी रहे देवरिया जनपद के एक विधायक राम प्रसाद जायसवाल ने पूरे प्रदेश में बालू ठेकेदारों से 'माया टैक्स' के नाम पर अवैध वसूली कराने की योजना बनाई। इस अवैध वसूली के लिए बाकायदा प्रदेश के कई नामी-गिरामी माफियाओं को नामित किया गया। जानकार बताते हैं कि तत्कालीन ख़नन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के दबाव के चलते अधिकारियों ने खुलकर बालू ठेकदारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और जिसने भी इसका विरोध किया उसको विभिन्न तरीके से प्रताड़ित किया गया जिससे डरकर बालू ठेकेदारों ने 'माया टैक्स' देना शुरू कर दिया।
शुरुआती दिनों में छिटपुट विरोध के बावजूद पूरे प्रदेश से प्रतिदिन करोड़ों की अवैध वसूली शुरू हो गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक बालू ठेकदार बताते हैं कि शुरुआती दिनों में हम लोग प्रति ट्राली 100 रूपये और प्रति ट्रक 200 रूपये देते थे लेकिन बाद में अधिकारियों ने एक मीटिंग करके बताया कि अब 'माया टैक्स' ने कानूनी रूप ले लिया है और यह 'सिंडीकेट' हो गया है जिससे इसका रेट बढ़ाना पड़ेगा। उस समय रेट बढ़ाकर 100 से 150 और 200 से 300 किया गया। बालू ठेकेदारों का कहना है कि आज तक हम यह नहीं समझ पाए कि 'सिंडिकेट' क्या है। हमारे विभाग के अधिकारी हमसे यही बताते हैं कि इसका ठेका मुख्यमंत्री और खनन मंत्री के स्तर से दिया गया है। बालू ठेकेदारों का कहना है कि हमारे अधिकारी मीटिंग के माध्यम से हमें 'सिंडिकेट' के ठेकेदार के बारे में जानकारी देते हैं और उनके लोग प्रतिदिन हमारे बालू घाटों से पैसा वसूल कर ले जाते हैं।
'सिंडिकेट' के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए 'ख़बर अब तक' के एक संवाददाता ने जब इस बारे में दूरभाष पर खनन विभाग के निदेशक एवं संयुक्त निदेशक से बात की तो उनका कहना था कि वे आज तक 'सिंडिकेट' का नाम भी नहीं सुने हैं। निदेशक साहब ने तो यहां तक कह दिया कि अगर आपके पास पुख्ता जानकारी मिल जाए तो जरा हमें भी बता दीजिएगा। 'ख़बर अब तक' ने गोरखपुर में तैनात एक महाभ्रष्ट खनन अधिकारी बीडी शर्मा के एक मीटिंग का स्टिंग जारी किया है। इस मीटिंग में खनन अधिकारी बीडी शर्मा देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया जनपद के बालू ठेकेदारों को सिंडिकेट (माया टैक्स) के बारे में समझा रहा है तथा सिंडिकेट (माया टैक्स) के एक नए नामित ठेकेदार का परिचय कराते हुए बालू ठेकेदारों से कह रहा है कि जो पहले थे वे हट गए हैं और अब ये हैं। 'ख़बर अब तक' के खुफिया कैमरे में कैद इस मीटिंग का लाइव देखने के बाद अनेक लोगों ने हमारे पास अपनी प्रतिक्रिया भेजी है। अधिकतर लोगों का यही कहना है कि "मायावती दलित नहीं दौलत की बेटी है।"





