Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

यूपी में इलेक्शन : नो मोलभाव, रेट फिक्स

आप को टिकट चाहिए. मिलेगा, जरूर मिलेगा. पर आप को टिकट क्यों चाहिए? अच्छा, सेवा के लिए. हां, आप अच्छा सोच रहे हैं, सेवा बहुत जरूरी है. सेवा होनी चाहिए. गांधी जी कहते थे, किसी को भी उपदेश करने के पहले देख लो कि तुमने अपने जीवन में उसे उतार लिया है या नहीं. अब गांधी की बात तो माननी पड़ेगी. अगर जनसेवा करनी है तो पहले शुरुआत खुद से करो, यही अच्छा है. खुद से ही सीखना शुरू करो. सेवा का ढंग तो आना चाहिए. तुम चाहते हो कि लोग सुविधासंपन्न हों, समृद्ध हो, उसकी कठिनाइयां दूर हों. अच्छी बात है.

आप को टिकट चाहिए. मिलेगा, जरूर मिलेगा. पर आप को टिकट क्यों चाहिए? अच्छा, सेवा के लिए. हां, आप अच्छा सोच रहे हैं, सेवा बहुत जरूरी है. सेवा होनी चाहिए. गांधी जी कहते थे, किसी को भी उपदेश करने के पहले देख लो कि तुमने अपने जीवन में उसे उतार लिया है या नहीं. अब गांधी की बात तो माननी पड़ेगी. अगर जनसेवा करनी है तो पहले शुरुआत खुद से करो, यही अच्छा है. खुद से ही सीखना शुरू करो. सेवा का ढंग तो आना चाहिए. तुम चाहते हो कि लोग सुविधासंपन्न हों, समृद्ध हो, उसकी कठिनाइयां दूर हों. अच्छी बात है.

दूसरों के लिए कामना हमेशा शुभ होनी चाहिए पर काम अपना बनना चाहिए. देखो प्रयोग हमेशा अपने-आप पर होना चाहिए. आत्मसेवा फिर जनसेवा. अच्छा ये बताओ अभी तक तुमने अपने लिए क्या किया है? धन-वन कमाया कि नहीं, कुछ प्रापर्टी-वापर्टी बनायी या नहीं. नामी-बेनामी, कैसी भी. चुप क्यों हो. सेवा के लिए निकलोगे तो तुम्हारे पास कुछ तो होना चाहिए. बड़ा कठिन मार्ग है. सेवकों पर दुनिया भर की नजरें रहती हैं. सभी उनकी खबर लेने के चक्कर में रहते हैं. खोजते रहते हैं कि सेवा में कोई कमी तो नहीं है, सेवक में कोई खोट तो नहीं है, उसकी मंशा में कोई गड़बड़ तो नहीं है. जिन्हें सेवा का कभी मौका नहीं मिला, वे और भी खोद-बीन में लगे रहते हैं.

बड़ी टांगखींचू संस्कृति है. अगर आप के घर में कोई भद्रपुरुष सूटकेस लेकर आ गया, तो काना-फूसी शुरू हो जाती है. लोग समझते हैं सूटकेस आया है तो माल जरूर होगा. अरे भाई, सूटकेस में कपड़ा भी हो सकता है, वह खाली भी हो सकता है. छल-कपट में आजकल लोग सुखी महसूस करते हैं. यह ईष्‍या-द्वेष का संसार है. जो जीवन में चाह कर भी कुछ नहीं कर सका, ऊपर नहीं उठ सका, वह दूसरों की टांग खींचकर ही खुश है. उसका फायदा भले न हो, लेकिन उसे किसी पड़ोसी-परिचित का फायदा फूटी आँख नहीं सुहाता. ऐसे कुटिल नयनों की भेदक शक्ति से बचना भी तो आना चाहिए. दुनिया बड़ी अजीब है. वह सेवा भाव से खाली है. सबको पता है कि जो सब कुछ लुटाने को तैयार रहता है, उसे सब कुछ मिल जाता है पर बहुत कम लोग यह जोखिम उठाते हैं. सेवा के काम में तो यह जोखिम उठाना ही पड़ता है. क्या आप सचमुच जनता की भलाई करने के कंटकाकीर्ण पथ पर निकले हैं? अगर हाँ, तो आप को पहले खोने के लिए तैयार रहना चाहिए.

मान लीजिए, टिकट हासिल करना जनसेवा की पहली सीढ़ी है. अब जनाब यह भी कोई आसानी से किसी भी ऐरे-गैरे को तो मिल नहीं जाता. इसकी भी कीमत है. दुनिया में हर चीज की कीमत होती है. जिसे जो पाना है, उसे उसकी कीमत तो चुकानी ही पड़ती है. अब आप को टिकट पाना है तो इसकी कीमत तो चुकानी पड़ेगी. रेट फिक्स. कोई मोलभाव नहीं. हम सत्ता में रहे हैं, पारदर्शिता हमारा दर्शन है. हमने हर दफ्तर, हर काम का खुला रेट रखा हुआ है. नियुक्ति करानी हो, तबादला कराना हो, तैनाती करानी हो, हर काम नीयत समय से होता है. सिटिजन चार्टर लगवा दिया गया है. अन्ना की मांग थी. बड़े लोगों की हम नहीं टालते. लेकिन आप तो समझदार मालूम पड़ते हैं. ये चार्टर-वार्टर तो चलता रहता है, हमारी व्यवस्था वैसे ही बहुत फास्ट है. किसी फजीहत में क्यों पड़ते हैं, रेट फालो  कीजिए, अपना काम कराइये. जो काम चार्टर के हिसाब से एक महीने में होना है, एक दिन में होगा. काहे परेशान होते हैं. भाग-दौड़, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने से क्या फायदा.

आप से क्या छिपा है. न जाने कब चुनाव लड़ना पड़े. धन होगा, तभी तो लड़ेंगे. धन भी तो आना चाहिए. घपलों, घोटालों, कमीशनखोरी से काम नहीं चलता. हम इसके खिलाफ हैं. आप ने देखा होगा, जब भी ऐसी कोई सूचना हमारे संज्ञान में लायी जाती है, उसकी तुरंत जांच होती है. आखिर जो निर्दोष लोग हैं, जिन्होंने कीमत चुकायी है, जो वफादार हैं, जिन्होंने सेवा की है, उनकी रक्षा भी तो करनी है. देखिये बात साफ होनी चाहिए. एक करोड़ जमा करिये, आप को टिकट मिलेगा. कहाँ जमा करना है, यह आप को समय पर बता दिया जायेगा. यह तो निवेश है. लाभ की गारंटी वाला निवेश. फिक्स डिपाजिट. एक बार आप जीत जायेंगे, फिर आप चाहें जैसे अपना डिपाजिट भुना सकते हैं. एक करोड़ लगाया है, कई करोड़ कमा सकते हैं. फिर और खर्च करके मंत्री भी बन सकते हैं और साहब मंत्री होने के मायने आप नहीं समझते होंगे, मैं नहीं मानता. यह सेवा का बड़ा मौका होगा. एक बार पद हाथ लगा तो समझो लक्ष्मी ने आप की तकदीर का खाता खोल दिया. फिर आप अपनी सेवा तो कर ही पायेंगे, बाकी क्षुद्र जनता के भी छोटे-मोटे काम कर पायेंगे.

देखिये भाई कंचन में सभी गुण रहते हैं, यह सारे काम करा सकता है. सर्वे गुणा: कांचनमश्रयंती. इसके बिना सेवा भी संभव नहीं है. चलिये, इंतजाम करिये पैसे कल तक जमा कराने हैं, अगले सप्ताह उम्मीदवारों की सूची जारी होगी. पैसे जमा हो गये तो समझो नाम पक्का. ठीक है, न.  

लेखक डा. सुभाष राय अमर उजाला और डीएलए के संपादक रह चुके हैं. इन दिनों जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ के संपादक हैं. साहित्य, अध्यात्म, आंदोलन से गहरा जुड़ाव रखने वाले डा. सुभाष के लिखे इस लेख को जनसंदेश टाइम्स से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है. उनसे संपर्क 08853002001 के जरिए किया जा सकता है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...