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यूपी में सपा लोस चुनाव के बाद ‘इन्नोवा+अल्टो’ पार्टी बन जाएगी

Yashwant Singh : यूपी में समाजवादी पार्टी का वही हाल लोकसभा चुनाव में होना है जो दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी का हुआ. पूछिए कैसे? मैं समझाता हूं. मुजफ्फरनगर कांड का घाव इतना गहरा है कि मुसलमान किसी हालत में सपा को वोट नहीं देने वाला. बसपा को मुस्लिम वोट. मोदी का पिछड़ी जाति का होना यूपी के पिछड़ों में एक अघोषित अंडरकरंट है. सो, सपा का ट्रेडीशनल वोट बैंक लोकसभा चुनाव में टूट रहा है. मोदी के नाम पर भाजपा को पोलराइजेशन मिल रहा है. ऐसे में अगर बसपा और भाजपा ने कसकर वोट खींच लिए तो सपा के पास क्या बचेगा, बाबाजी का ठुल्लू 🙂

Yashwant Singh : यूपी में समाजवादी पार्टी का वही हाल लोकसभा चुनाव में होना है जो दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी का हुआ. पूछिए कैसे? मैं समझाता हूं. मुजफ्फरनगर कांड का घाव इतना गहरा है कि मुसलमान किसी हालत में सपा को वोट नहीं देने वाला. बसपा को मुस्लिम वोट. मोदी का पिछड़ी जाति का होना यूपी के पिछड़ों में एक अघोषित अंडरकरंट है. सो, सपा का ट्रेडीशनल वोट बैंक लोकसभा चुनाव में टूट रहा है. मोदी के नाम पर भाजपा को पोलराइजेशन मिल रहा है. ऐसे में अगर बसपा और भाजपा ने कसकर वोट खींच लिए तो सपा के पास क्या बचेगा, बाबाजी का ठुल्लू 🙂

अपने 75वें जन्मदिन पर लोकसभा की 75 सीट यूपी वालों से मांगने वाले नेताजी अगर सांसदों की संख्या में दहाई में पहुंचा गए तो तय मानिए ये एक करिश्मा होगा. पिछड़ों और मुस्लिमों के बगैर उत्तर प्रदेश में सपा है क्या… कुछ भी नहीं… दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या अगर एक इन्नोवा में बैठने वालों के बराबर है तो यूपी में सपा के सांसदों की संख्या एक इन्नोवा और एक अल्टो से ज्यादा की नहीं होगी…

आप अगर पूछेंगे कि आम आदमी पार्टी का क्या रोल होने वाला है यूपी में, तो बताऊंगा कि ये पार्टी सीटें ज्यादा नहीं ला पाएगी, हां, वोटरों को अचंभित जरूर करेगी. दिल्ली जैसे ज्यादा पढ़े लिखे और रेशनल-डेमोक्रिटेक नागरिकों के इलाके में आम आदमी पार्टी का जोर चला क्योंकि उसने इसी दिल्ली की धरती पर न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि दिल्ली के एक एक मुद्दे, एक एक गली कूचे को छाना. दिल्ली से बाहर आम आदमी पार्टी के लिए इस बार का लोकसभा चुनाव राष्ट्रव्यापी संगठन खड़ा करने का रिहर्सल भर होगा. यूपी और बिहार की जनता अभी जातिवाद, सवर्णवाद, धर्मवाद आदि वादों के खोल से बाहर नहीं निकली है और न निकलने के मूड में है क्योंकि गांवों में आमतौर पर जीवन अब भी सबका ठीकठाक ही चल रहा है… जय हो…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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