Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

यूपी सरकार के लिए बेइज्जती का कारण बने अखिलेश के पसंदीदा आईपीएस यशस्वी यादव

आईपीएस यशस्वी यादव से कोई पंगा नहीं लेता क्योंकि वो दो सेकेंड में सामने वाले को औकात पर ला देते हैं. इसके पीछे बड़ी वजह उन पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मेहरबानी है. उन्हें नेता मुलायम सिंह यादव कुनबे का वरदहस्त प्राप्त है. कोई उन्हें अखिलेश यादव का क्लास फेलो बताता है तो कोई उन्हें नेताजी कुनबे का रिश्तेदार.

आईपीएस यशस्वी यादव से कोई पंगा नहीं लेता क्योंकि वो दो सेकेंड में सामने वाले को औकात पर ला देते हैं. इसके पीछे बड़ी वजह उन पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मेहरबानी है. उन्हें नेता मुलायम सिंह यादव कुनबे का वरदहस्त प्राप्त है. कोई उन्हें अखिलेश यादव का क्लास फेलो बताता है तो कोई उन्हें नेताजी कुनबे का रिश्तेदार.

यही कारण है कि नेताजी कुनबे ने सरकार बनने के बाद गैर-यूपी कैडर वाले यशस्वी यादव को विशेष अनुरोध पर यूपी ट्रांसफर कराया और कानपुर नगरिया उनके हवाले कर दिया. यशस्वी कानपुर के मालिक हैं. वो जो करें, कोई उस पर चूं चपड़ नहीं कर सकता. किया तो गया. कोप के दायरे में आने से बचने के लिए यशस्वी यादव के इर्द-गिर्द यस मैंस की लंबी चौड़ी टीम इकट्ठी हो गई है जिनमें मीडिया वाले भी भारी संख्या में हैं. कानपुर के पुलिस कप्तान के रूप में यशस्वी यादव ने व्यापारी नेता, भाजपा नेता, मीडिया मालिक, उद्योगपति से लेकर न जाने कितने लोगों को बेइज्जत किया. उनकी इस स्टाइल के कारण उनके प्रशंसक भी ढेर सारे हैं क्योंकि यशस्वी यादव ने बड़े-बड़ों सीधा कर रास्ते पर ले आए. साथ ही, उनके विरोधी भी बहुत हैं जो उनकी तानाशाही वाले रवैये और कानून से उपर रहने वाले उनके मनोभाव की

यशस्वी यादव : हीरो से जीरो बनने की ओर

यशस्वी यादव : हीरो से जीरो बनने की ओर

आलोचना करते हैं. 

समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार संरक्षित यशस्वी यादव ने सपा के प्रेम में अब एक ऐसा कांड कर दिया है कि इसकी धमक काफी दूर तक सुनाई पड़ने लगी है और यह प्रकरण यूपी सरकार के लिए बदनामी का कारण बनने लगा है. सपा नेता और डाक्टरों की आपसी मार-पिटाई में यशस्वी यादव न सिर्फ सपा नेता की पार्टी बन गए बल्कि डाक्टरों को ऐसा सबक सिखाने की ठान ली कि यह कांड यूपी में मेडिकल से जुड़े लोगों के लिए काला दिन बन गया. यशस्वी यादव ने कानपुर के छोटे-बड़े डाक्टरों को इतना पिटवाया कि यह प्रकरण यूपी के बर्बर पुलिसिया उत्पीड़न के इतिहास में दर्ज हो जाएगा.

डाक्टरों की पिटाई को लाइव कवर करने गए मीडियावाले भी यशस्वी के कोप से न बच पाए और पुलिसवालों ने पीट-पीट कर उनका भुर्ता बना दिया. किसी की खोपड़ी खुल गई तो किसी की हड्डी चकनाचूर है. कैमरे आदि टूटे-फूटे हैं वो अलग से.

अमर उजाला अखबार ने आंतरिक निर्देश जारी कर दिया है कि उनके यहां जो भी मीडियाकर्मी पुलिस ज्यादती का शिकार हुआ है, उसका सारा इलाज, खर्च कंपनी वहन करेगी. उधर, यूपी भर के सरकारी और निजी डाक्टरों ने पुलिस की गुंडई के खिलाफ हड़ताल का ऐलान कर दिया है. दर्जनों लोगों के इलाज के अभाव में मरने की सूचना है. मेडिकल एसोसिएशनों ने भी मोर्चा खोल दिया है. आईपीएस यशस्वी यादव के खिलाफ हर तरफ विरोध की आवाज उठने लगी है. जो लोग सत्ता के मद में चूर आईपीएस यशस्वी यादव के कहर की आशंका के कारण चुप्पी साधे रहते थे वो भी अब खुलकर बोलने लगे हैं.

लेकिन नेशनल मीडिया और लखनऊ की मीडिया चुप्पी साधे है. नेशनल मीडिया ने तो इस बहुत बड़े कांड को लगभग ब्लैकआउट कर रखा है, भले ही वो नेताजी की अखिलेश सरकार से मिले करोड़ों के विज्ञापनों का असर हो या सत्ता से पंगा न लेने की मनोभावना. लखनऊ की मीडिया तो पहले से ही सत्ता से उपकृत होने के कारण मुंह में पान घुलाए मदमस्त रहती है. लखनऊ के मीडिया वालों की हिम्मत ही नहीं है कि वे यूपी की किसी भी सरकार के खिलाफ किसी मुद्दे पर मोर्चा खोल सकें और लंबा टिक सकें. बिकाऊ मीडिया से किसी को कोई अपेक्षा करनी भी नहीं चाहिए. ऐसे में अब सोशल और न्यू मीडिया का सहारा है. पीड़ित डाक्टरों और उत्पीड़ित मीडियाकर्मियों को न्याय दिलाने और दोषी पुलिसवालों को दंड दिलाने को लेकर न्यू मीडिया में अभियान चलाया जाना चाहिए.

आखिर किसी को कैसे यह इजाजत मिल सकती है कि वह पीएसी, आरएएफ और पुलिस फोर्स लेकर डाक्टरों को हास्टल में घेर-घेर कर पीटे. ये सच है कि कई मर्तबा डाक्टर मनमानी करते हैं और पेशेंट पर हाथ तक उठा देते हैं. पर एक गल्ती को सुधारने के लिए उससे बड़ी गल्ती करना तो कोई इलाज नहीं है. शर्मनाक बात ये है कि लखनऊ के दलाल टाइप के पत्रकार नेता चुप्पी साधे हुए हैं. ढेर सारे मीडिया संगठनों के नेता लखनऊ में बैठते हैं लेकिन किसी ने अभी तक बयान जारी कर मीडिया वालों की पिटाई की भर्त्सना तक नहीं की. भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने इस प्रकरण को संज्ञान लेकर अखिलेश सरकार से मांग की है कि वे फौरन यशस्वी यादव को कानपुर से कार्यमुक्त करें और जांच पूरी न होने तक उन्हें प्रतीक्षारत रखें. पूरे मामले की न्यायिक जांच कराएं ताकि सच्चाई सामने आ सके.

संबंधित खबरें:

कानपुर में सरकारी गुंडा बनी पुलिस, डाक्‍टरों के बाद मीडियाकर्मियों पर तोड़ी लाठियां

xxx

कानपुर में कई मीडियाकर्मियों का कैमरा टूटा और कइयों की हड्डियां…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...