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ये अरविंद केजरीवाल तो घनघोर निजीकरण का प्रबल पक्षधर निकला!

Arvind Kumar Singh : केजरीवाल की अर्थनीति और निजीकरण… आज केजरीवालजी की अर्थनीति के बारे में कुछ जानने समझने का मौका मिला तो दिल को खुशी हुई कि कम से कम उनके विचारों का विरोध मैं गलत नहीं कर रहा हूं… उनकी इस बात की मैं सराहना करता हूं कि उन्होंने अपनी तमाम खामियों को स्वीकार किया… लेकिन वो तो प्रबल निजीकरण के पक्ष में हैं और मानते हैं कि सरकारों का काम नहीं है कारोबार… यानि रेलवे से लेकर मेट्रो और परिवहन सेवाओं से लेकर पानी-बिजली सब कुछ निजी क्षेत्र के हवाले कर देना चाहिए… सरकार केवल गवर्नेंस करे..

Arvind Kumar Singh : केजरीवाल की अर्थनीति और निजीकरण… आज केजरीवालजी की अर्थनीति के बारे में कुछ जानने समझने का मौका मिला तो दिल को खुशी हुई कि कम से कम उनके विचारों का विरोध मैं गलत नहीं कर रहा हूं… उनकी इस बात की मैं सराहना करता हूं कि उन्होंने अपनी तमाम खामियों को स्वीकार किया… लेकिन वो तो प्रबल निजीकरण के पक्ष में हैं और मानते हैं कि सरकारों का काम नहीं है कारोबार… यानि रेलवे से लेकर मेट्रो और परिवहन सेवाओं से लेकर पानी-बिजली सब कुछ निजी क्षेत्र के हवाले कर देना चाहिए… सरकार केवल गवर्नेंस करे..

कमाल है भाई…एक बिजली के निजीकरण का हाल देख रहे हैं हम..पूरे देश का निजीकरण हो जाएगा तो यह देश केवल चंद संपन्न लोगों के हाथ गिरवी हो जाएगा…आम गरीब, दलित और वंचित तबके के लिए कहीं कोई मौका होगा क्या…आज सार्वजनिक सेवाओं में इस तबके के कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है…निजी क्षेत्र तो रोजगार में वंचित तबकों को क्या महत्व देता है यह किसी से छिपा है क्या..मुझे लगता है कि विकल्प बनने का दावा करने वाले दलों को खाप से लेकर निजीकरण के मसले पर एक ठोस नीति बनाने की जरूरत है..जहां गए उसे खुश करने की नीति कमसे कम देश हित में नहीं होगी…

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

Rising Rahul : ओह… झाड़ू हि‍ला हि‍लाकर नाचने को लेकर अब तक आप समझते थे कि ''आप'' आपके साथ है। कि‍सी गफलत में मत रहि‍ए। केजरीवाल ने सीआईआई में जो बोला है, सच बोला है। पूंजीपति‍यों के साथ बनि‍या जाति पहले भी थी, अब भी है और हमेशा रहेगी। ये जाति कि लड़ाई है बॉस जो खाप से लेकर केजरीवाल तक साफ नजर आती है। इसमें एक जाति गरीब होती जाती है तो दूसरी अमीर।

पत्रकार राहुल पांडेय के फेसबुक वॉल से.

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