जिलों में पत्रकारिता करने वाले खुद को प्रेस वाला दिखाने के लिए पता नहीं क्या क्या कसरत करते हैं. जिलों में शायद पत्रकारिता सबसे मुश्किल होती है. खबरों को पैदा करने से लेकर विरोधी गुट को किसी के सामने नीचा दिखाने से लेकर खुद की पहचान सबसे अलग रखने की. इस काम में न जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं. कुछ पत्रकार तो विजिटिंग कार्ड या प्रेस कार्ड ऐसा बनवाते हैं कि उसे देखते ही सामने वाले की स्थिति खराब हो जाए.
जिलों में अपने वरिष्ठों का नाम भी बेचने में पीछे नहीं रहते हैं स्ट्रिंगर और संवाददाता. शायद इसलिए कि वरिष्ठ जाने माने चेहरे होते हैं और उनके ब्रांड का एक अलग असर होता है. इंडिया न्यूज में इस समय ब्रांड हैं दीपक चौरसिया, तो भला जिले के पत्रकार कैसे ब्रांड नाम का लाभ लेने में पीछे रहें. बागपत में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है. यहां पर स्ट्रिंगर के रूप में काम करने वाले पारस जैन ने ऐसा ही विजिटिंग कार्ड बनवाया है कि इसे देखकर सामने वाले की फट जाए.
विजिटिंग कार्ड पर दीपक चौरसिया की एक धांसू अंदाज में फोटो पब्लिश करवाया गया है, उसके बाद एडिटर इन चीफ दीपक चौरसिया लिखा गया है. उसके बाद तमाम तरह के तामझाम लिखे गए हैं. पहली नजर में यह प्रेस कार्ड पारस जैन का ना लगकर दीपक चौरसिया का लगता है. अब जब कार्ड पर खुद दीपक चौरसिया मौजूद हों तो भला किसकी हिम्मत है कि पत्रकार/स्ट्रिंगर को भाव ना मिले. ऐसा तमाम जिलों में होता रहता है, पर आप अभी इसी कार्ड का आनंद उठाइए और स्ट्रिंगर की सूझबूझ को दाद दीजिए.







