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रद्दी का खेल पकड़वाने वाले राजेंद्र गुप्‍ता को जनसंदेश टाइम्‍स प्रबंधन ने अधर में लटकाया

जन्संदेश टाइम्स, लखनऊ के वरिष्ठ प्रसार प्रबंधक राजेंद्र गुप्ता को प्रबंधन ने अधर में लटका दिया है. खबर है कि उन्‍हें लखनऊ से तो रिलीव कर दिया गया है, पर कानपुर में अभी तक ज्‍वाइनिंग नहीं कराई गई है. राजेंद्र गुप्‍ता की जगह नईदुनिया, भोपाल के सर्कुलेशन प्रभारी रहे आरके सिंह ने लखनऊ में राजेंद्र गुप्‍ता के स्‍थान पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है. जानकारी के अनुसार दिसम्बर में राजेंद्र गुप्ता ने कानपुर में बेगमपुरवा इलाके में जन्संदेश टाइम्स की रद्दी का जखीरा पकड़ा था. इसमें सर्कुलेशन मैनेजर के साथ उप महाप्रबंधक अनिल पाण्‍डेय का नाम भी सामने आया था.

जन्संदेश टाइम्स, लखनऊ के वरिष्ठ प्रसार प्रबंधक राजेंद्र गुप्ता को प्रबंधन ने अधर में लटका दिया है. खबर है कि उन्‍हें लखनऊ से तो रिलीव कर दिया गया है, पर कानपुर में अभी तक ज्‍वाइनिंग नहीं कराई गई है. राजेंद्र गुप्‍ता की जगह नईदुनिया, भोपाल के सर्कुलेशन प्रभारी रहे आरके सिंह ने लखनऊ में राजेंद्र गुप्‍ता के स्‍थान पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है. जानकारी के अनुसार दिसम्बर में राजेंद्र गुप्ता ने कानपुर में बेगमपुरवा इलाके में जन्संदेश टाइम्स की रद्दी का जखीरा पकड़ा था. इसमें सर्कुलेशन मैनेजर के साथ उप महाप्रबंधक अनिल पाण्‍डेय का नाम भी सामने आया था.

बताया जा रहा है कि राजेंद्र गुप्ता ने रद्दी खरीदने वाले अबरार नामक आदमी की जन्संदेश टाइम्स के एमडी अनुज पोद्दार से टेलीफोन पर बात भी करवाई थी. उसने स्वीकार किया था कि वह पिछले कुछ समय से जन्संदेश टाइम्स और हिंदुस्तान की रद्दी खरीद रहा है. जन्संदेश टाइम्स के एमडी अनुज पोद्दार ने रद्दी खरीदने वाले अबरार नामक आदमी को अपना परिचय लखनऊ के बड़े रद्दी व्यापारी के रूप में देकर उससे सारी जानकारी भी हासिल की थी. इस कांड में कानपुर के प्रसार प्रबंधक श्यामसुंदर श्रीवास्तव की संलिप्तता पाई गयी थी, जिसके बाद उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया था, परन्तु कानपुर कार्यालय के तत्कालीन प्रभारी व वर्तमान में जन्संदेश टाइम्स ग्रुप के उप महाप्रबंधक अनिल पाण्डेय ने मामले का रफा-दफा करा दिया था. तब से अनिल पाण्डेय लखनऊ के वरिष्ठ प्रसार प्रबंधक राजेंद्र गुप्ता को सबक सिखाने की ताक पर लगे थे.

बताया जाता है क़ि कानपुर में रद्दी के इस खेल में अनिल पाण्डेय के भी शामिल होने की बात सामने आई थी. उस दौरान कानपुर शहर में नौ-दस हजार की सेल दिखाई जा रही थी जब कि वास्तविक सेल पांच हजार से भी कम थी. तभी से धीरे-धीरे सप्लाई भी कम करना शुरू कर दिया गया था. अब लगभग छह हजार सप्लाई है जब कि वास्तविक सेल चार हजार के आस-पास है. आफिस सूत्रों के अनुसार एमडी अनुज पोद्दार को पता नहीं ऐसी कौन सी घूंटी पिला दी गयी है कि वह अनिल पाण्डेय की हर सलाह को आंख बंद कर मान रहे हैं. गोरखपुर ऑफिस की गतिविधियों का कारण भी इन्‍हीं का हाथ बताया जा है. बताया जाता है कि कानपुर ऑफिस की नाकामियों को छिपाने के लिए अनिल पाण्डेय ने एमडी अनुज पोद्दार का ध्यान गोरखपुर वाराणसी व लखनऊ की ओर मोड़ रखा है तथा हर उस आदमी को शिकार बना रहे हैं, जिससे उनकी पोल खुलने का खतरा है.

सूत्रों का कहना है कि अनिल पाण्डेय की अगली शिकार एक महिला अधिकारी होंगी, जिसने संगीन मामले को लेकर इन्‍हें खरी-खोटी सुनाई थी. जन्संदेश टाइम्स की अंदरूनी राजनीति में अनिल पाण्डेय का पलड़ा काफी भारी चल रहा है क्योकि एमडी अनुज पोद्दार केवल उतना ही देखते हैं जितना अनिल पाण्डेय दिखाना चाहते है. इस सबके पीछे आफिस में तरह-तरह की चर्चाएं हैं. लखनऊ के वरिष्ठ प्रसार प्रबंधक राजेंद्र गुप्ता को पहले श्‍याम सुंदर की जगह कानपुर भेजने का झांसा दिया गया. उनकी जगह आरके सिंह को लखनऊ में नियुक्‍त किया गया. फिर राजेंद्र गुप्‍ता को एक मार्च को लखनऊ से रिलीव भी कर दिया गया, परन्‍तु उन्‍हें कानपुर ज्‍वाइन नहीं कराया गया. राजेंद्र अभी तक अधर में लटके हुए हैं. वे अपने को न तो बाहर ही मान पा रहे हैं और ना ही अंदर.

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