रफ्तार न्यूज मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में पत्रकारों को अच्छी सेलरी का वादा करके रखा जाता है और महीना पूरा होने के पहले ही नया टारगेट दे दिया जाता है. टारगेट भी किसी न्यूज का नहीं बल्कि पैसे का, जाइए मार्केट से पैसा लाइए और सेलरी लीजिए. चैनल इसी तरह पत्रकारों को रिक्रूट करके दो-तीन महीने तक काम चलाता है फिर निकालकर नया रिक्रूटमेंट कर लेता है और गोरखधंधा चलता रहता है.
रफ्तार न्यूज एमपी-सीजी के हेड हैं शिवकुमार और उनके बेटे अमन शर्मा चैनल के आपरेशन हेड हैं. करीब चार माह पहले अमन शर्मा ने चैनल में रिपोर्टर के तौर पर आलोक शर्मा, दीपक सिंह नरवरिया, गोविन्द कुशवाहा और कई अन्य लोगों को चालीस हजार रूपये प्रतिमाह की सेलरी पर रखा. जब महीना पूरा होने वाला था, चैनल के एमपी-सीजी के एडिटर-इन-न्यूज जयेश कुमार ने इन लोगों से कहा कि एक लाख रूपये मार्केट से लेकर आओ तो सेलरी मिलेगी जिस पर इन सबके द्वारा कहा गया कि हम लोग कैसे पैसे ला सकते हैं, पर इनकी सुनी नहीं गई.
जब इन लोगों को लगा कि चैनल पैसा वसूली के लिए खोला गया है तो इन लोगों आपरेशन हेड अमन शर्मा से कह दिया कि उन्हें इस महीने काम करने के बाद उनका वेतन देकर कार्य से मुक्त किया जाय. उसके बाद इन सभी ने एक महीने और काम किय.। उसके बाद बिना सेलरी दिए ही चैनल से इन्हें निकाल दिया गया. इन लोगों ने तब से कई बार प्रयास किया लेकिन इन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया. चैनल छोड़े हुए दो महीने से ऊपर हो गए लेकिन चैनल में काम करने के एवज में एक रूपया नहीं मिला है. इसके अतिरिक्त निकालने के पहले इन सभी को चैनल के अधिकारियों के द्वारा अपमानित भी किया गया.
चैनल में हालात बहुत खराब हैं. कुछ दिनो पहले ही चैनल की आपसी तनातनी में एमपी-सीजी के ब्यूरो चीफ गिरिराज शर्मा को आरोप लगाकर निकाल दिया गया. गिरिराज शर्मा चैनल के महत्वपूर्ण लोगों में रहे हैं, तथा चैनल की लांचिंग में उनकी प्रमुख भूमिका रही है. गिरिराज शर्मा की ये हालत देखकर उनके सहयोगी सतीश शर्मा ने खुद ही चैनल से इस्तीफा दे दिया. पूरे एमपी-सीजी में केवल पांच लोगों के सहारे चैनल चल रहा है.