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रवींद्र कुमार का बयान आपत्तिजक : मजीठिया मंच

मजीठिया मंच ने इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी (आईएनएस) के अध्‍यक्ष रवींद्र कुमार के वेज बोर्ड पर उस बयान को दुर्भाग्‍यपूर्ण और आपत्तिजनक करार दिया है जिसमें श्री कुमार ने वेज बोर्डों को घिसा-पिटा और पुरातनपंथी रवायत तक (continuance of the anachronism of Wage Boards) कह डाला है। आईएनएस अध्‍यक्ष ने नई दिल्‍ली में आयोजित इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्‍लैटिनम जुबली समारोह में यह बात कही, जबकि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने न सिर्फ मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को सर्वथा उचित ठहराया है, बल्कि इसके गठन को भी पूरी तरह संवैधानिक माना है। कुमार ने सर्वोच्च न्‍यायालय के फैसले की खिल्ली उड़ाने वाला यह बयान ऐसे कार्यक्रम में दिया है जिसमें महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मौजूद थे।

मजीठिया मंच ने इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी (आईएनएस) के अध्‍यक्ष रवींद्र कुमार के वेज बोर्ड पर उस बयान को दुर्भाग्‍यपूर्ण और आपत्तिजनक करार दिया है जिसमें श्री कुमार ने वेज बोर्डों को घिसा-पिटा और पुरातनपंथी रवायत तक (continuance of the anachronism of Wage Boards) कह डाला है। आईएनएस अध्‍यक्ष ने नई दिल्‍ली में आयोजित इंडियन न्‍यूज पेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्‍लैटिनम जुबली समारोह में यह बात कही, जबकि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने न सिर्फ मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को सर्वथा उचित ठहराया है, बल्कि इसके गठन को भी पूरी तरह संवैधानिक माना है। कुमार ने सर्वोच्च न्‍यायालय के फैसले की खिल्ली उड़ाने वाला यह बयान ऐसे कार्यक्रम में दिया है जिसमें महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मौजूद थे।

मजीठिया मंच ने माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय से आईएनएस अध्‍यक्ष के इस दुर्भावनापूर्ण बयान पर संज्ञान लेकर इस पर तत्‍काल कार्रवाई करने और इस तरह के भ्रामक बयानों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा श्री रवींद्र ने अपने भाषण में न्यायपालिका पर परोक्ष रूप से समाचार पत्रों को मौत की तरफ धकेलने (judicially-directed euthanasia) का भी आरोप जड़ दिया है।

मंच का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कुमार के ये बयान अवमानना की श्रेणी में आते हैं। इससे साफ होता है कि मीडिया मालिकान बिना कार्रवाई के अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आने वाले हैं। ये आनाकानी और हीलाहवाली कर वेज बोर्ड की सिफारिशों को धता बताने पर जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि पिछले कई दशकों से तमाम समाचार पत्र समूहों के मालिक वेज बोर्डों की सिफारिशों पर अपने कर्मचारियों और श्रम विभाग को गुमराह करते रहे हैं। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों की अधिसूचना जारी हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट चले गए। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाने पर भी इस तरह की बयानबाजी आईएनएस की नीयत पर सवाल खड़े करती है।

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