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रवींद्र प्रभात के उपन्यास ‘प्रेम न हाट बिकाय’ का लोकार्पण

नई दिल्ली । ….रवीन्द्र प्रभात का दूसरा उपन्यास ''प्रेम न हाट बिकाय'' का लोकार्पण करते हुए मुझे वेहद ख़ुशी हो रही है। उपन्यास के नाम से ही ज़ाहिर है कि इसकी कथा के केन्द्र में प्रेम है। प्रेम ही एक ऐसा भाव है जो व्यक्ति को हर जटिल से जटिल स्थिति से निपटने की ताकत देता है। प्रेम जोड़ता है तो कभी कभी प्रेम तोड़ता भी है। यहाँ प्रेम माँजता है। चाहे प्रशांत हो या स्वाति और चाहे देव हो या गुलाब से नगीना और नगीना से गुलाब की यात्रा करती हुई एक स्त्री –सभी को विपरीत स्थितियों से प्रेम ही बचाता है। मैंने इस पुस्तक को पढ़ा है और पढ़ने के उपरांत इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि रवीन्द्र प्रभात ने प्रेम के स्वरूप को देह से निकाल कर अध्यात्म तक पहुँचाने का उपक्रम इस कथा के माध्यम से किया है…. ये बातें उपन्यासकार प्रताप सहगल ने स्थानीय प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में प्रेम न हाट बिकाय के लोकार्पण के दौरान कहीं।

नई दिल्ली । ….रवीन्द्र प्रभात का दूसरा उपन्यास ''प्रेम न हाट बिकाय'' का लोकार्पण करते हुए मुझे वेहद ख़ुशी हो रही है। उपन्यास के नाम से ही ज़ाहिर है कि इसकी कथा के केन्द्र में प्रेम है। प्रेम ही एक ऐसा भाव है जो व्यक्ति को हर जटिल से जटिल स्थिति से निपटने की ताकत देता है। प्रेम जोड़ता है तो कभी कभी प्रेम तोड़ता भी है। यहाँ प्रेम माँजता है। चाहे प्रशांत हो या स्वाति और चाहे देव हो या गुलाब से नगीना और नगीना से गुलाब की यात्रा करती हुई एक स्त्री –सभी को विपरीत स्थितियों से प्रेम ही बचाता है। मैंने इस पुस्तक को पढ़ा है और पढ़ने के उपरांत इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि रवीन्द्र प्रभात ने प्रेम के स्वरूप को देह से निकाल कर अध्यात्म तक पहुँचाने का उपक्रम इस कथा के माध्यम से किया है…. ये बातें उपन्यासकार प्रताप सहगल ने स्थानीय प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में प्रेम न हाट बिकाय के लोकार्पण के दौरान कहीं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रेम का आधार जैसे कोई भी हो सकता है वैसे ही अध्यात्म का आधार भी। हरी-भरी दुनिया या सामाजिक नज़रियों से इतर प्रेम अध्यात्म का ही एक रूप है। इन अर्थों में ही इस उपन्यास की कथा को समझा-परखा जा सकता है। रवीन्द्र प्रभात हिन्दी ब्लागिंग की दुनिया में एक चर्चित नाम है और वह अपने पहले उपन्यास ‘ताकि बचा रहे लोकतंत्र’ से साहित्य के क्षेत्र में भी चर्चित लेखकों के दायरे में दाखिल हो चुके हैं। इस उपन्यास की कथा को भी उन्होंने कहीं संवादों तो कहीं सधे हुए वर्णन के सहारे साधने की कोशिश की है।”

विश्व पुस्तक मेला में हिंद युग्म डाट कॉम के तत्वावधान में आयोजित इस आखिरी लोकार्पण समारोह में उपन्यासकार प्रताप सहगल के अलावा वरिष्ठ ब्लॉगर और व्यंग्यकार अविनाश वाचस्पति, वेब पत्रिका साहित्य शिल्पी के संपादक राजीव रंजन प्रसाद, जनसंचार लेखन से जुड़े डा. हरीश अरोड़ा, सुभाष नीरव, सुरेश यादव, बलराम अग्रवाल, जनसत्ता के फज़ल इमाम मालिक, स्त्री विमर्श से जुडी लेखिका गीता पंडित, व्यंग्यकार निर्मल गुप्त, वन्दना, रचना क्रम के संपादक अशोक मिश्र, दैनिक जनवाणी (मेरठ) के फीचर संपादक दिलीप सिंह राणा, सुनील परोहा, उपन्यास के लेखक रवीन्द्र प्रभात और प्रकाशक शैलेश भारतवासी के साथ-साथ काफी संख्या में पाठक, दर्शक और श्रोता उपस्थित थे।

जैसे ही रवीन्द्र प्रभात अपने नवीनतम उपन्यास ‘प्रेम न हाट बिकाय’ के विमोचन के लिए हॉल संख्या-11 स्थित हिंद युग्म के स्टॉल पर पहुँचे, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव अपनी पत्नी मल्लिका देव के साथ आए। उन्होंने कहा कि “मेरी शुभकामना है कि हिंदी साहित्य जगत में आप उत्कर्ष हासिल करें”। इस अवसर पर व्यंग्यकार अविनाश वाचस्पति ने कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर रवीन्द्र प्रभात की प्रतिभा से परिचित हूँ और मैंने जो महसूस किया है उसके आधार पर यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि रवीन्द्र में आसमान की उंचाईयां छूने की क्षमता है। वहीँ राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि मेरी कामना है कि रवीन्द्र प्रभात की प्रतिभा को हिंदी जगत ही नहीं पूरा विश्व महसूस करे। प्रखर साहित्यकार सुभाष नीरव ने कहा कि आज इस आयोजन के बहाने साहित्य जगत और ब्लॉग जगत की हस्तियों से मिलकर बहुत ख़ुशी हई। अंत में शैलेश भारतवासी ने आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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