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रवींद्र शाह भोपाल से आज शाम दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ने वाले थे

रवींद्र शाह को आज दिल्ली के लिए भोपाल से ट्रेन पकड़ना था. इसीलिए वे इंदौर से भोपाल चले थे. पर रास्ते में कार पलट जाने से उनका निधन हो गया. बताया जाता है कि उन्होंने आउटलुक हिंदी के कुछ लोगों से बातचीत की थी. उन्होंने मैग्जीन के पेज फाइनल कराने को लेकर बात की थी और कहा था कि बस मैं कल आने वाला हूं, पेज फाइनल कर दिया जाएगा. आउटलुक में फाइव डे वीक होता है. रवींद्र शाह शुक्रवार की रात इंदौर के लिए गए. आज वे ट्रेन पकड़ने भोपाल जा रहे थे. कई लोगों से उनकी इस बीच में बातचीत होती रही.

रवींद्र शाह को आज दिल्ली के लिए भोपाल से ट्रेन पकड़ना था. इसीलिए वे इंदौर से भोपाल चले थे. पर रास्ते में कार पलट जाने से उनका निधन हो गया. बताया जाता है कि उन्होंने आउटलुक हिंदी के कुछ लोगों से बातचीत की थी. उन्होंने मैग्जीन के पेज फाइनल कराने को लेकर बात की थी और कहा था कि बस मैं कल आने वाला हूं, पेज फाइनल कर दिया जाएगा. आउटलुक में फाइव डे वीक होता है. रवींद्र शाह शुक्रवार की रात इंदौर के लिए गए. आज वे ट्रेन पकड़ने भोपाल जा रहे थे. कई लोगों से उनकी इस बीच में बातचीत होती रही.

वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा, सुमंत भट्टाचार्या, उमेश चतुर्वेदी आदि ने रवींद्र शाह के निधन पर शोक जताया है. रवींद्र का जीवंत व हंसता हुआ चेहरा किसी को नहीं भूल रहा. स्वभाव से विनम्र और मेहनती रवींद्र ने अपने करियर में काफी उतार चढ़ाव देखे. अब वे एक ठीकठाक मैग्जीन में अच्छे पद पर थे. वे जमकर काम कर रहे थे. उनकी लिखी खबरें कवर स्टोरी के रूप में प्रकाशित होने लगी थीं. वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े कहते हैं कि रवींद्र ने कभी किसी की बुराई नहीं की. हमेशा अपने काम से मतलब रखा. विश्वास नहीं हो रहा कि वे चले गए.

बताया जाता है कि रवींद्र शाह जिस कार में सवार थे वह बीजेपी के प्रवक्ता रहे और वर्तमान में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त गोविंद मालू की है. कार में कुल छह लोग सवार थे जिसमें बाकी सबको हलकी फुलकी चोटें आई हैं लेकिन रवींद्र शाह को बचाया नहीं जा सका. रवींद्र शाह के करीबी दुर्गानाथ स्वर्णकार (दैनिक जागरण, एनडीटीवी समेत कई जगहों पर काम करने के बाद इन दिनों भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी) कहते हैं कि कुछ दिनों पहले कांस्टीट्यूशन क्लब में एक पुस्तक विमोचन समारोह में रवींद्र सर से मुलाकात हुई. ढेरों बातचीत हुई. इस संडे मंडे के दिन मिलने का वादा था. उन जैसा सहज, सहृदय और जीवट पत्रकार मिलना मुश्किल है.

रवींद्र शाह फेसबुक पर ज्यादा सक्रिय नहीं थे. उन्होंने पिछले साल ही अपना एकाउंट फेसबुक पर क्रिएट किया था. उन्होंने फेसबुक पर आउटलुक के एडिटर इन चीफ रहे विनोद मेहता की लखनऊ ब्वायज किताब के लोकार्पण के बाद की एक तस्वीर अपलोड की है जिसमें वे खुद भी नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर पर लोगों ने ढेरों प्रतिक्रियाएं दी हैं. तस्वीर यूं है…

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