Manorma Singh : बनावट, बनावटी तेवर, तय सवाल, झूठ-मूठ का आक्रामक लहज़ा, इन सब के बीच रवीश का अनगढ़, एक हद तक आत्मीय और एकदम सीधे सीधे लोगों तक पहुँचने और उन्हें आतंकित किये बगैर एकदम सहज बल्कि उन्हीं के बीच का होकर रिपोर्ट करना इस चुनावी मौसम में सबसे बड़ी राहत है और टीवी की सबसे बड़ी उपलब्धि भी !
कल वो हमीदिया कॉलेज की लड़कियों को घर जाकर अपने लिए लड़ने को उकसा रहे थे, सिनेमा हॉल में फिल्म देखने जाने को प्रेरित कर रहे थे आज किसी को सवाल पूछते पूछते पान छोड़ देने को कह रहे थे फिर अस्सी, नब्बे साल के बुज़ुर्गों से उनकी एक पार्टी से वफादारी पर हैरान हो रहे थे, उनकी रिपोर्टिंग बिल्कुल 'आम' है और इतनी सरल,सहज रिपोर्टिंग है कि सबके बस की बात नहीं, इसलिए सबसे ख़ास है !
पत्रकार मनोरमा सिंह के फेसबुक वॉल से.
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