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राजदीप और आशुतोष की आत्मा ने उनको ‘धिक्कारना’ शुरू कर दिया है

SANJEEV CHAUHAN : निकाले गये पत्रकारों को खोजिये…कहां हैं…क्यों गायब हैं…बर्बाद कर दिये जाने के बाद भी…. मीडिया से चंडूखाने की खबरें आ रही हैं कि सीएनएन और आईबीएन7 से निकालकर सड़क पर पटके गये पत्रकारों की मदद से लिए टीवी 18 के दफ्तर के सामने होने वाले धरना प्रदर्शन में तमाम पत्रकार शामिल होंगे, सिवाये उनके जो निकालकर चौराहे पर खड़े कर दिये गये हैं। वजह यह कि निकाले गये पत्रकारों को भय है कि…राजदीप सरदेसाई और आशुतोष गुप्ता शायद विरोध करने पर उन्हें कहीं और किसी चैनल में खाने-कमाने के लायक नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि कुछ बाकी चैनलों में भी उन्हीं की तरह के कंस बैठे हुए हैं।

SANJEEV CHAUHAN : निकाले गये पत्रकारों को खोजिये…कहां हैं…क्यों गायब हैं…बर्बाद कर दिये जाने के बाद भी…. मीडिया से चंडूखाने की खबरें आ रही हैं कि सीएनएन और आईबीएन7 से निकालकर सड़क पर पटके गये पत्रकारों की मदद से लिए टीवी 18 के दफ्तर के सामने होने वाले धरना प्रदर्शन में तमाम पत्रकार शामिल होंगे, सिवाये उनके जो निकालकर चौराहे पर खड़े कर दिये गये हैं। वजह यह कि निकाले गये पत्रकारों को भय है कि…राजदीप सरदेसाई और आशुतोष गुप्ता शायद विरोध करने पर उन्हें कहीं और किसी चैनल में खाने-कमाने के लायक नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि कुछ बाकी चैनलों में भी उन्हीं की तरह के कंस बैठे हुए हैं।

अफवाहों की दूसरी पतंगबाजी यह भी हो रही है कि, राजदीप और आशुतोष गुप्ता की आत्मा ने उनको "धिक्कारना" शुरु कर दिया है। रात में दोनो ने एक लाइव सपना देखा था….कि 350 मीडियाकर्मी उनसे (राजदीप सरदेसाई और आशुतोष गुप्ता) निकलवाकर, लाला ने (चैनल मालिक, फाइनेंसर) अब उन्हें भी लात मारकर बाहर कर दिया है। इससे घबराकर इन दोनो ने भी तय किया है कि, अब वो उन पत्रकारों के धरना-प्रदर्शन में साथ होंगे, जिनकी नौकरी इन दोनो कथित उस्तादों ने ही खा-चबा ली।

अक्सर मीडिया जिस तरह की खबरों से हवाखोरी करता है, अगर उन पर ध्यान दिया जाये…तो अब मीडिया के यह दोनो मठाधीश भी मन बना रहे हैं, कि ऐसी जलालत की नौकरी करने से बेहतर है कि अब वो भी लाला की नौकरी को लात मार दें….लेकिन इसकी पुष्टि कोई फिलहाल नहीं कर रहा है…जो भी हो…मैने फेसबुक के साथियों को यह खबर उसी तरह परोसी है…या उसी स्तर की यह खबर है, जिस स्तर की खबरें परोसकर अक्सर मीडिया अपने जाल में फंसे लोगों की एकतरफा खाल उतारकर दिन भर- रात भर "ब्रेकिंग-ब्रेकिंग" खेलता है….. वैसे मुझे यह खबरें एकदम उतनी ही फरेबी और झूठी लग रही हैं, जितनी कि मीडिया बाकियों के बारे में उड़ाता है….मतलब बिलकुल 'बेदम'..  (कानाफूसी)

वरिष्ठ पत्रकार संजीव चौहान के फेसबुक वॉल से.

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