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राजनीति से वीआईपी संस्कृति खत्म करने पर जोर देने वाले अरविंद केजरीवाल का नया पता जान लीजिए

Jai Prakash Tripathi : जल्दी-जल्दी…? राजनीति से वीआइपी संस्कृति समाप्त करने पर जोर देने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नया पता भगवान दास रोड स्थित फ्लैट नंबर-7/6, 7/7 होगा। डीडीए के इस 10 कमरे के सरकारी फ्लैट में तेजी से काम चल रहा है। 9 हजार वर्गफुट जमीन पर बने इस मकान में पांच-पांच कमरे के दो फ्लैट हैं।

पत्रकार जयप्रकाश त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.

Jai Prakash Tripathi : जल्दी-जल्दी…? राजनीति से वीआइपी संस्कृति समाप्त करने पर जोर देने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नया पता भगवान दास रोड स्थित फ्लैट नंबर-7/6, 7/7 होगा। डीडीए के इस 10 कमरे के सरकारी फ्लैट में तेजी से काम चल रहा है। 9 हजार वर्गफुट जमीन पर बने इस मकान में पांच-पांच कमरे के दो फ्लैट हैं।

पत्रकार जयप्रकाश त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.

शिवानन्द द्विवेदी 'सहर' : अगर केजरीवाल को सरकारी आवास लेने में कोई दिक्कत नही है तो वो मुख्यमंत्री आवास में रहें । उनके लिए अलग से अगर दो फ्लैट्स को मिलाकर एक घर बनाया जा रहा तो यह खर्चीला ढोंग आम आदमी का चरित्र तो नही है । मै फिर बोल रहा हूँ कि मै केजरीवाल को दो नजरिये से देखता हूँ,एक चुनाव से पूर्व के केजरीवाल और दुसरे चुनाव के बाद के मुख्यमंत्री केजरीवाल । वैसे मुख्यमंत्री का बंगला लेना न तो अवैध है और न ही गलत ।

युवा पत्रकार शिवानन्द द्विवेदी 'सहर' के फेसबुक वॉल से.

LN Shital : केजरीवाल ने दो शानदार बंगले चुन लिये अपने लिए। मंत्री राखी बिड़ला ने तीसरे ही दिन सरकारी गाड़ी ले ली। ठीक तो है-खाने के दांत और, दिखाने के और!

पत्रकार एलएन शीतल के फेसबुक वॉल से.

Pushya Mitra : यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि आम आदमी पार्टी आज जिस मीडिया ट्रायल से गुजर रही है उसके जिम्मेवार खुद वही लोग हैं. उन्होंने बेवजह सरकारी बंगलों और गाड़ियों के मसले को इतना बढ़ा चढ़ाकर पेश किया. यह छोटा सा मसला है, सरकारी लोगों को साहब की तरह दिखना नहीं चाहिये. मेरी व्यक्तिगत मान्यता है कि राजनीति में सादगी का सवाल बहुत बड़ा नहीं है. इस देश में सादगी के कई उदाहरण हैं. खुद ममता दीदी एसबेस्टस के घर में रहती हैं और मेहमानों को झिलिया-मूढ़ी खिलाती हैं. मनमोहन सिंह भी इमानदारी की मूरत हैं. रमन सिंह, मानिक सरकार, बुद्धदेव और मनोहर पर्रिकर जैसे उदाहरण भी हैं, मगर ये प्रशासनिक तौर पर सफल न हों तो सादगी का कोई अर्थ नहीं है. मानिक सरकार की पार्टी का नेता नोट पर सोने का सपना खुलेआम पूरा करता है, वह भी नगर पालिका में घूस खाकर. मानिक अगर सादगी से अधिक ध्यान भ्रष्टाचार को खत्म करने में लगायें तो ज्यादा कारगर हो. ममता दीदी की सादगी का क्या मतलब जब वहां चिट-फंड कंपनियां हजारों करोड़ का चूना उनकी नाक के नीचे लगा जाये. इसलिए सादगी का दिखावा करने से बेहतर है प्रशासनिक सुधार लाना और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करना. अब यह काम आप रिक्शे पर बैठकर करें या हेलीकॉप्टर पर जनता को इससे ज्यादा लेना-देना नहीं है.

पुष्य मित्र के फेसबुक वॉल से.

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