: एक पत्र राजस्थान पत्रिका के हुकुमरानों के नाम : श्रीमान जी, मैं पिछले कई वर्षों से राजस्थान पत्रिका का नियमित पाठक हूँ और मैं आपके अखबार से पूर्ण संतुष्ट हूँ. मगर विगत कुछ समय से राजस्थान पत्रिका का जैसलमेर स्टाफ अपनी मनमानी के चलते आपकी साख पर बट्टा लगा रहा है. हम जब भी अपनी खबरें उनको भेजते हैं तो वो कई जगह अपने आपसी द्वेष के चलते नाम नहीं छापते हैं, कई जगह ख़बरों को भी जगह नहीं देते हैं. हद तो तब हो गयी जब जन्माष्टमी के दूसरे दिन यानी 29 अगस्त के आपके जैसलमेर अंक में आपके ब्यूरो चीफ जैसलमेर ने अपने ही बच्चे की फोटो को अखबार में जगह देकर ये दर्शा दिया कि राजस्थान पत्रिका उनकी बपौती है.
नियमानुसार पत्रिका के एम्प्लोई अपने परिवार या स्वयं को अपने अखबार में जगह नहीं देंगे, लेकिन जन्माष्टमी के दिन पांच सौ के करीब कृष्ण भगवान् के विविध रूप रचकर तैयार थे मगर उनमें से स्वयं के पुत्र "कोविद व्यास" का फोटो लगा कर उन्होंने ये जता दिया कि राजस्थान पत्रिका अब आम आदमी का अखबार ना होकर उनकी खुद की निजी सम्पति हो गया है. उस दिन के अखबार का लिंक आपको प्रेषित कर रहा हूँ http://epaper.patrika.com/c/1560018
इससे आहत हो मैं आज आपको शिकायत प्रेषित कर रहा हूँ. मैं स्वयं समाजसेवा से जुड़ा हूँ. आपके अखबार की साख पिछले काफी समय से जैसलमेर स्टाफ की वजह से गिर रही है जिसे हम जैसे पाठक जो नियमित आपसे जुड़े हैं, आपको चेता रहे हैं. अगर इस घटना पर कार्यवाही नहीं हुई तो हम तकरीबन सौ लोग आपके अखबार से किनारा कर लेंगे.
धन्यवाद
जय जैसान
deepak kumar






