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राजस्थान में पत्रिका फिर शिखर पर, एमपी में पौन दो लाख पाठक जोड़े

मुम्बई। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) की मुम्बई में जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पत्रिका समूह की कुल पाठक संख्या एक करोड़ 98 लाख 82 हजार हो गई है। अपनी विश्वसनीय खबरों के लिए देशभर में पहचान रखने वाले राजस्थान पत्रिका को इस रिपोर्ट में एक बार फिर राजस्थान का सिरमौर घोषित किया गया है। मध्यप्रदेश में भी पत्रिका ने करीब 1.75 लाख नए पाठक जोड़े हैं।

मुम्बई। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) की मुम्बई में जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पत्रिका समूह की कुल पाठक संख्या एक करोड़ 98 लाख 82 हजार हो गई है। अपनी विश्वसनीय खबरों के लिए देशभर में पहचान रखने वाले राजस्थान पत्रिका को इस रिपोर्ट में एक बार फिर राजस्थान का सिरमौर घोषित किया गया है। मध्यप्रदेश में भी पत्रिका ने करीब 1.75 लाख नए पाठक जोड़े हैं।

पत्रिका समूह ने जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर समेत शहरी क्षेत्रों में 58.82 लाख कुल पाठकों के साथ अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पत्रिका ने पहले से ही बढ़त ले रखी है। ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जुलाई-दिसम्बर 2011) के हिसाब से जयपुर शहर में राजस्थान पत्रिका नम्बर 1 अखबार है। प्रदेश के कुल हिन्दी पाठकों में से लगभग 82 प्रतिशत पत्रिका समूह के अखबार पढ़ते हैं।

राजस्थान के अन्य बड़े शहरों जोधपुर, कोटा और बीकानेर में भी पत्रिका की जबर्दस्त बढ़त है। प्रतिस्पर्घी की औसत पाठक संख्या इन तीनों ही प्रमुख शहरों में कम हुई है। जोधपुर संस्करण में तो प्रतिस्पर्घी से पत्रिका 3.56 लाख औसत पाठक संख्या ज्यादा है। इसी तरह उदयपुर संस्करण में पत्रिका के 1.39 लाख औसत पाठक बढ़े हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार पत्रिका का रेडियो स्टेशन 95 एफएम तड़का जयपुर और कोटा शहरों में नम्बर 1 रेडियो स्टेशन घोषित किया गया है।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार
करीब साढ़े 4 वर्ष पहले भोपाल से पहला संस्करण शुरू कर मप्र पर छाए पत्रिका ने 2012 की दूसरी तिमाही में प्रदेश में करीब 1.75 लाख नए पाठक जोड़े हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 5.88 लाख कुल पाठकों के रूप में धमाकेदार उपस्थिति दी है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में पाठक संख्या के ये आंशिक आंकड़े ही हैं। मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़ में अल्प समय में ही पत्रिका को पाठकों का जो स्नेह मिला है वह पाठकों का पत्रिका की निर्भीक लेखनी पर भरोसा दर्शाता है। वहां पत्रिका ने हर मुद्दे पर जनता की आवाज उठाई तथा पीडितों को राहत दिलाने का काम किया।

पत्रिका के प्रति पाठकों के रूझान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसी तिमाही में वहां दैनिक जागरण के 43 हजार, नई दुनिया के 1.38 लाख, नवभारत के 1.06 लाख, दैनिक भास्कर के 1.30 लाख तथा राज एक्सप्रेस के 1.21 लाख कुल पाठक संख्या में गिरावट आई है। कुल 5 लाख 38 हजार पाठकों ने इन अखबारों से मुंह मोड़ा है। कलम की पैनी धार और सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ पाठकों के विश्वास से पत्रिका ने यह उपलब्घि हासिल की है। ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (जुलाई-दिसम्बर 2011)) के आंकड़ों के अनुसार पत्रिका समूह देश के दूसरे सबसे बड़े हिन्दी अखबार समूह के रूप में उभर कर आया है।

एकाघिकार ध्वस्त
आईआरएस के इस सर्वे की विशेष बात यह है कि पत्रिका ने मध्यप्रदेश में अभी तक छाए एकाघिकार को जबर्दस्त तरीके से ध्वस्त कर दिया है। राजधानी भोपाल संस्करण में पत्रिका ने 61 हजार औसत नए पाठक जोड़े हैं वहीं निकटतम प्रतिद्वंद्वी के 38 हजार औसत पाठक कम हुए हैं। ठीक इसी तरह इंदौर सस्करण में निकटतम प्रतिद्वंद्वी के 1.58 लाख कुल पाठक कम हुए हैं जबकि पत्रिका की बढ़त 60 हजार कुल पाठक संख्या की है। सर्वे के अनुसार पत्रिका ने प्रतिद्वंद्वी अखबार का एकाघिकार समाप्त कर दिया है। इसके अलावा जबलपुर संस्करण में 73 हजार व ग्वालियर संस्करण में 36 हजार कुल पाठको की वृद्धि की हैं।

उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जुलाई-दिसम्बर 2011) के अनुसार पत्रिका भोपाल व इन्दौर जैसे प्रमुख शहरों में नम्बर वन है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कितनी तेजी से मध्यप्रदेश के पाठक पुराने अखबार से नाता तोड़ कर पत्रिका से जुड़ रहे हैं। पाठकों के स्नेह और विश्वास के दम पर अर्जित यह सफलता हम अपने पाठकों को ही समर्पित करते हैं।

राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर


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