वरिष्ठ पत्रकार राजेन टोडरिया के आकस्मिक निधन से उत्तराखंड की पत्रकारिता जगत के अलावा आम लोग भी मर्माहत हैं. मौत जीवन की आखिरी सच्चाई है परन्तु राजेन को नजदीक से जानने वाले उनके चले जाने का अब भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. राजेन टोडरिया के निधन पर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए अमर उजाला, देहरादून के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिपाठी ने कहा कि राजेन जी पहाड़ की पीड़ा को लेकर हमेशा मुखर रहे. पहाड़ में वे जनसरोकारों की एक सशक्त आवाज थे.
श्री त्रिपाठी ने कहा कि वे आम जन के सरोकारों के साथ स्थानीय विकास को लेकर भी काफी चितिंत रहे. आंदोलनकारी पत्रकारिता के कई अध्याय उन्हें लिखे. उत्तराखंड तथा हिमाचल में भी पत्रकारिता को जनोन्मुखी बनाया. आमजनता के हित में आंदोलन भी चलाए. कलम से भी सरकारों को जगाने का काम करते रहे. उनका असमय जाना उत्तराखंड के जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए एक बड़ा धक्का है.
हिमाचल प्रदेश में राजेन टोडरिया के साथ अमर उजाला में काम कर चुके एवं चंडीगढ़ से संचालित लाइव टुडे के एडिटर इन चीफ गोपाल शर्मा ने कहा कि उनका जाना उत्तराखंड के साथ हिमाचल की पत्रकारिता की भी बहुत बड़ी हानि है. हिमाचल में अमर उजाला की लांचिंग राजेन जी के नेतृत्व में ही हुई. वे हिमाचल के ब्यूरोचीफ थे. श्री शर्मा ने आगे कहा कि राजेन जी सच्चाई को उजागर करने से कभी परहेज नहीं किया. उनको हिमाचल में अमर उजाला को स्टैंड करने के लिए जाना जाता है. एक दौर ऐसा आया जब उनके नेतृत्व में हिमाचल में अमर उजाला ने अपने झंडे गाड़ दिए. एक तरफ अमर उजाला तो दूसरी तरफ हिंदी-अंग्रेजी के दूसरे अखबार होते थे. उनके कलम से पक्ष-विपक्ष दोनों में दहशत रहती थी. आज उनके श्रेणी का एक भी पत्रकार हिमाचल की पत्रकारिता में मौजूद नहीं है.
राजेन टोडरिया के अभिन्न मित्र एवं नरेंद्र नगर के विधायक सुबोध उन्नियाल ने कहा कि राजेन टोडरिया उस श्रेणी का पत्रकार था, जो कलम के साथ सड़क पर भी संघर्ष करने के लिए जाना जाता था. मेरी उससे तीन दशक पुरानी दोस्ती थी. उसका जाना पत्रकारिता के साथ मेरी भी व्यक्तिगत छवि है. वो जनपक्षधरता के मुद्दे पर सरकारों से भिड़ जाता था. तमाम अखबारों में काम करते हुए भी कभी उसने अपने विचारधारा से समझौता नहीं किया. पहाड़ के विकास के लिए वह सदैव चिंतित रहा.





