दैनिक भास्कर के नेशनल एडिशन की बंदी और इसमें कार्यरत कर्मियों को निकाले जाने को लेकर जो खबरें आई थीं, वो बिलकुल सही हैं. हां, ये जरूर हुआ कि भास्कर दिल्ली एडिशन की बंदी की खबर व छंटनी की खबर आ जाने और मुद्दा बन जाने से दबाव में आए भास्कर प्रबंधन ने आनन-फानन में पीआर वेबसाइट्स पर खबर छपवा दिया कि छंटनी व बंदी जैसा कुछ नहीं है, कोई घबड़ाने की बात नहीं है, सब सामान्य है. पर अब सच्चाई सामने आ रही है. पहले जहां इकट्ठे एकमुश्त छंटनी की जानी थी, अब उसे धीरे-धीरे व टुकड़ों में तब्दील कर दिया गया है.
तब से अब तक जिन कुछ लोगों की नौकरी ली जा चुकी है, उनके नाम हैं हरिमोहन मिश्रा, विमल झा, रफीक आलम, संजीव क्षितिज, मुकेश ठाकुर, नागेंद्र राय आदि. नागेंद्र राय तो दैनिक भास्कर के साथ पिछले 24 साल से थे. लोग कह रहे हैं कि इनको बुढ़ापे में अब नौकरी कहां मिलेगी. और, जब उन्हें नौकरी की सख्त जरूरत है तो भास्कर ने दूध की मक्खी की तरह बाहर निकाल फेंका. संजीव क्षितिज वरिष्ठ पत्रकार हैं. पहले उन्हें कहा गया कि उनका तबादला झारखंड किया जा रहा है. बताया जाता है कि वे झारखंड जाने को तैयार बैठे थे. लेकिन उनको तबादले का भी मौका नहीं दिया गया और इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया. उन्होंने भी दस तारीख को अपना हिसाब किताब लेने के बाद आफिस को गुडबाय बोल दिया है. हरिमोहन मिश्रा और विमल झा जैसे लोग अच्छे व गंभीर पत्रकारों में शुमार होते हैं. इन लोगों से भी भास्कर ने इस्तीफा ले लिया है.
अब जो लोग बचे हुए हैं, उनसे इस्तीफा लेने की तैयारी चल रही है. यह सारा काम स्थानीय संपादक राजेश उपाध्याय कर रहे हैं. वे कई तरह के दबाव, प्रलोभन और धमकियों का सहारा लेकर इस्तीफा लिखवा रहे हैं. वे अपने खास लोगों से खुद कहते फिर रहे हैं कि उन पर सीधे सीएमडी और एमडी का प्रेशर है सबसे इस्तीफा लेने का, दिसंबर तक नेशनल एडिशन का सफाया कर देना है, यानि इसमें कार्यरत कर्मियों से इस्तीफा लिखवा लेना है. जो लोग इस्तीफा नहीं देने को तैयार होंगे, उनका हर तरह से परेशान किया जाएगा ताकि वो खुद छोड़कर भाग जाएं. पता चला है कि भास्कर के कुछ कर्मी राजेश उपाध्याय को सबक सिखाने की तैयारी में है. इन कर्मियों का कहना है कि जो संपादक उनकी लड़ाई नहीं लड़ सकता, उल्टे मैनेजमेंट के इशारे पर बिना वजह इस्तीफे लेता हो, उसको सबक सिखाना जरूरी है.






