Jitendra Dixit : निजी जीवन में मीडिया की दखलंदाजी को लेकर गाहे-बगाहे चिंता जताया जाना वाजिब है। हर बात को बतंगड़ बनाना कहां तक उचित है? कल खबरिया चैनलों ने एक विवाह पार्टी में डांस देखने को लेकर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री की खिंचाई की। अरे, शादी-विवाह के मौके पर नाच-गाना कोई नयी बात नहीं है। वहां शोकगीत तो नहीं होंगे।
एक तरफ ये चैनल फिल्मी नाचने-गाने वालों की छोटी-छोटी बात प्रसारित कर उन्हें युवाओं का ऑइकन बनाने में दिन-रात लगे रहते हैं तो दूसरी ओर डांस कर पेट पालने वाली बाला के थिरकने को अश्लीलता का सर्टिफिकेट दे देते हैं। अरे भाई, मंत्री भी समाज से हैं। शादी-विवाह के मौके पर उसे भी निजी जिंदगी जीने का हक है। नाच देखना कोई बुराई नहीं, फिर क्यों आसमान उठाते हो।
मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र दीक्षित के फेसबुक वॉल से.






