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राडिया टेप की जांच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई, आईटी और ईडी से मांगे नाम

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने औद्योगिक घरानों के लिये संपर्क सूत्र का काम करने वाली नीरा राडिया के टैपिंग की गयी टेलीफोन वार्ता के तथ्यों की छानबीन के लिये केन्द्रीय जांच ब्यूरो, आय कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के नाम मांगे हैं। न्यायालय को इन अधिकारियों के नाम कल तक मुहैया कराने है ताकि रिकार्ड की गयी वार्तालाप की जांच करके आपराधिक तथ्यों का पता लगाने के लिये अधिकारियों का दल बनाया जा सके।

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने औद्योगिक घरानों के लिये संपर्क सूत्र का काम करने वाली नीरा राडिया के टैपिंग की गयी टेलीफोन वार्ता के तथ्यों की छानबीन के लिये केन्द्रीय जांच ब्यूरो, आय कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के नाम मांगे हैं। न्यायालय को इन अधिकारियों के नाम कल तक मुहैया कराने है ताकि रिकार्ड की गयी वार्तालाप की जांच करके आपराधिक तथ्यों का पता लगाने के लिये अधिकारियों का दल बनाया जा सके।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि नीरा राडिया के विभिन्न नेताओं, कापरेरेट घरानों के प्रमुख व्यक्तियों तथा दूसरे लोगों के साथ टेलीफोन वार्ता से संबंधित इन टेप के तथ्यों की जांच के लिये दल गठन करने के बारे में 21 फरवरी को आदेश दिया जायेगा।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘अतिरिक्त सालिसीटर जनरल (हरेन रावल जो जांच ब्यूरो का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं) तीनों संस्थाओं (सीबीआई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारियों की सूची कल उपलब्ध करायेंगे।’’ न्यायालय ने रावल से कहा कि वह जांच एजेन्सी के पांच अधिकारियों के भी नाम उपलब्ध करायें। रावल का तर्क है कि इस दल में सिर्फ सीबीआई के सदस्यों को ही शामिल किया जाये क्योंकि दूसरी एजेन्सियों को शामिल करने से काम मुश्किल हो जायेगा।

गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस के वकील प्रशांत भूषण ने इसका विरोध करते हुये कहा कि पहले भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद करीब दो साल तक सीबीआई ने कुछ नहीं किया था। भूषण ने कहा, ‘‘मेरा सुझाव है कि एक ऐसा दल हो जिसमें सीबीआई, आय कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को शामिल किया जाये और इसके निगरानी की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायाधीश जैसे किसी स्वतंत्र व्यक्ति को सौंपी जाये या उसे इसका मुखिया बनाया जाये।’’

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जांच एजेन्सी को चेतावनी दी कि टेलीफोन वार्ता का एक भी अंश मीडिया में लीक होने को बहुत ही गंभीरता से लिया जायेगा। न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘इसके अंश लीक किये जाने पर हम बहुत कड़ा रुख अपनायेंगे। अभी भी कुछ लोग हैं जो मीडिया को कुछ न कुछ लीक कर रहे हैं। आप इसे पसंद करें या न करें लेकिन लीक तो हो ही रहा है। मीडिया में चर्चा होती है और कभी कभी सजा भी हो जाती है। बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में हमारी अलग व्याख्या है।’’ इस पर रावल ने कहा, ‘‘अभी तक ऐसा कुछ भी प्रतिकूल सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जाये कि हमने हमारा कर्तव्य नहीं निभाया है। हमारा विश्लेषण (टेप) न्यायालय के सामने आने दीजिये। इस न्यायालय के समक्ष यह हमारी परीक्षा होगी।

इस बीच, न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अब तक की जांच के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश जांच एजेन्सी को दिया है। अतिरिक्त सालिसीटर जनरल का कहना था कि इन टेलीफोन वार्ता के अंशों को अलग अलग करने की आवश्यकता है। न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि उसने टेलीफोन वार्ता के कुछ अंशों का अवलोकन किया है। इनमें से कुछ चूंकि हानिरहित हैं, इसलिए सावधानी से इनकी जांच की आवश्यकता है ताकि इनमें आपराधिकता के तथ्य का पता लगाया जा सके। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि छानबीन सिर्फ उन्हीं वार्तालाप तक सीमित रहेगी जो आपराधिकता से संबंधित है और न्याय के हित में है।

रतन टाटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे का कहना था कि वार्तालाप के लिपिबद्ध मसौदे की जांच में अत्यधिक सावधानी बरती जानी चाहिए। नीरा राडिया की टेलीफोन वार्ता की रिकार्डिग वित्त मंत्री को 16 नवंबर, 2007 को मिली शिकायत के आधार पर की गयी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि नौ साल के भीतर राडिया ने 300 करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। सरकार ने 20 अगस्त, 2008 से 60 दिन और फिर 19 अक्तूबर से साठ दिन वार्ता रिकार्ड करने के बाद आठ मई के नये आदेश के तहत 11 मई 2009 से साठ दिन और उसके टेलीफोन टैप किये थे। (एजेंसी)

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