मीडिया विश्लेषक पुष्कर पुष्प अपने फेसबुक प्रोफाइल पर कुछ जानकारियां लगातार अपडेट कर रहे हैं… जैसे ये कि– ''दैनिक भास्कर अखबार से रोबर्ट वढेरा की खबर लगातार गायब है. अच्छा – बुरा कुछ नहीं छप रहा.'' ''जी न्यूज़ ने रॉबर्ट वढेरा की इतनी तारीफ़ की कल से उबकाई आ रही है. फिटनेस, डोले-शोले से लेकर…….''. जालंधर से एक सज्जन ने भड़ास को फोन कर सूचित किया कि- ''वढेरा की खबर तो दैनिक भास्कर से पूरी तरह गायब है, आप चाहें तो आनलाइन एडिशन पर ईपेपर चेक कर लें.''
इन सूचनाओं का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि दैनिक भास्कर समूह का दस जनपथ से बहुत करीबी है और भास्कर को कोल ब्लाक समेत कई तरह के गैर-अखबारी प्रोजेक्ट्स में भरपूर फायदा केंद्र सरकार ने दिया है. इस कारण यह अखबार कृतज्ञ मुद्रा में आकर कर्ज का फर्ज अदा कर रहा है और इसी कारण वढेरा पर आरोपों वाली खबर नहीं छाप रहा है. हिंदुस्तान अखबार जिन बिड़ला परिवार के शोभना भरतिया का है, वे कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं और उनके कांग्रेस नेताओं से अच्छे रिश्ते पहले से ही रहे हैं. इसलिए वहां भी दस जनपथ के दामाद पर आरोपों की खबर अंडरप्ले होनी ही थी. अंडरप्ले होकर छप गई, यह भी गनीमत है.
जी ग्रुप वाले भी दस जनपथ के बेहद करीब हैं. इसलिए वे भी खबर दिखाने के साथ साथ वढेरा की जय जय करके उनकी इमेज बिल्डिंग का काम कर रहे हैं और आरोपों को अंडरप्ले कर रहे हैं. मीडिया में जब पूंजी का खेल शुरू हो जाता है और पूरा मकसद सालाना टर्नओवर बढ़ाने और गैर मीडिया कंपनियों को आगे बढ़ाने का हो जाता है तब मीडिया मालिक यही सब करते हैं और कर रहे हैं. ऐसे में न्यू मीडिया का रोल सबसे प्रमुख हो जाता है. न्यू मीडिया के लोगों को चाहिए कि वे फेसबुक, ट्विटर, ब्लाग, वेब, मोबाइल आदि के जरिए इन दैत्याकार मीडिया घरानों की पोलखोल लगातार जारी रखें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इनकी करतूत पहुंच सके.






